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कर्ज से परेशान किसान ने फांसी लगाकर जान दी
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कुलपहाड़ (महोबा)। कोतवाली क्षेत्र के ग्राम बौरा में कर्ज से परेशान एक किसान ने खेत में लगे पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के ऊपर इलाहाबाद बैंक कुलपहाड़ का एक लाख रुपये कर्ज था। किसान शराब पीने का भी आदी था।
ग्राम बौरा निवासी सुखसिंह (45) पुत्र स्व. मोतीलाल के पास करीब आठ बीघा जमीन है। किसान ने इलाहाबाद बैंक में जमीन गिरवी रखकर ढाई साल पहले एक लाख रुपया कर्ज लिया था लेकिन तीन साल से सूखे के चलते फसल की पैदावार न होने से किसान कर्ज की अदायगी नहीं कर सका।
कर्ज से परेशान किसान ने गुरुवार की शाम को खेत में जाकर छेवले के पेड़ में रस्सी बांधकर फांसी लगा ली। देर शाम को आसपास के किसानों ने शव लटका देख मृतकों के परिजनों ने सूचना दी। पुलिस ने परिजनों के साथ मौके पर पहुंचकर शव को नीचे उतारकर पंचनामा कराने के बाद पोस्टमार्टम कराने के लिए भेज दिया है। मृतक की पत्नी रामदेवी का कहना है कि वह कर्ज से परेशान रहते थे। कर्ज अदायगी के लिए मैंने मुंबई में मजदूरी करना शुरू कर दिया था। दिवाली के त्योहार में घर आई थी। तभी पति ने फांसी लगाकर जान दे दी।
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मृतक के दो पुत्र और एक पुत्री है। परिजनों ने बताया कि कर्जमाफी के लिए काफी प्रयास किया गया था लेकिन सूची में नाम न होने की वजह से माफ नहीं हो पाया। तहसीलदार सुबोधमणि शर्मा का कहना है कि किसान शराब का आदी था। आर्थिक स्थिति भी ठीक थी। लेखपाल को भेजकर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद मृतक के परिजनों की हर संभव मदद की जाएगी।
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ग्राम बौरा निवासी सुखसिंह (45) पुत्र स्व. मोतीलाल के पास करीब आठ बीघा जमीन है। किसान ने इलाहाबाद बैंक में जमीन गिरवी रखकर ढाई साल पहले एक लाख रुपया कर्ज लिया था लेकिन तीन साल से सूखे के चलते फसल की पैदावार न होने से किसान कर्ज की अदायगी नहीं कर सका।
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कर्ज से परेशान किसान ने गुरुवार की शाम को खेत में जाकर छेवले के पेड़ में रस्सी बांधकर फांसी लगा ली। देर शाम को आसपास के किसानों ने शव लटका देख मृतकों के परिजनों ने सूचना दी। पुलिस ने परिजनों के साथ मौके पर पहुंचकर शव को नीचे उतारकर पंचनामा कराने के बाद पोस्टमार्टम कराने के लिए भेज दिया है। मृतक की पत्नी रामदेवी का कहना है कि वह कर्ज से परेशान रहते थे। कर्ज अदायगी के लिए मैंने मुंबई में मजदूरी करना शुरू कर दिया था। दिवाली के त्योहार में घर आई थी। तभी पति ने फांसी लगाकर जान दे दी।
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मृतक के दो पुत्र और एक पुत्री है। परिजनों ने बताया कि कर्जमाफी के लिए काफी प्रयास किया गया था लेकिन सूची में नाम न होने की वजह से माफ नहीं हो पाया। तहसीलदार सुबोधमणि शर्मा का कहना है कि किसान शराब का आदी था। आर्थिक स्थिति भी ठीक थी। लेखपाल को भेजकर रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद मृतक के परिजनों की हर संभव मदद की जाएगी।