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दूषित पानी से बुझ रही बुंदेलों की प्यास

Tue, 03 May 2016 12:49 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
अमर उजाला ब्यूरो महोबा Updated Tue, 03 May 2016 12:49 AM IST
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Contaminated water quenched the thirst of the Bundelas
तालाब से प्रदूषित पानी भरते लोग - फोटो : अमर उजाला

महोबा। सूखे बुंदेलखंड में पानी से कराहती बुंदेली धरा के लोगों के लिए बूंद भर पानी अमृत के समान है, पर जरूरत और अंजाने में बुंदेले दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। जिले में सात नदियां और तमाम ऐतिहासिक सरोवर हैं। लेकिन नदियां खुद पानी को तरस रही हैं। सरोवरों की तलहटी में तो अब मटमैला पानी ही बचा है, जिससे लोग प्यास बुझाने को मजबूर हैं।

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बुंदेलखंड की पठारी धरती पर कुदरत का कहर एक दशक से जारी है। सूखे से उपजी अकाल की स्थिति में पानी को लेकर हालात भयावह हो गए हैं। भूजलस्तर लगातार पाताल की ओर भाग रहा है। जिससे 75 फीसदी हैंडपंप व कुएं जवाब दे गए हैं।
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जो पानी उगल रहे हैं, उनसे बेहद गंदा और मटमैला पानी आ रहा है। वहीं, बांधों और कुओं के सूख जाने से लोगों को प्रदूषित पानी मिल रहा है। मजबूरी में लोग इस दूषित पानी को ही पी रहे है। पाइप लाइन से होने वाली जलापूर्ति भी शोधन किए बगैर की जा रही है।
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जलसंकट का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खन्ना क्षेत्र में हैंडपंप व सरकारी ट्यूबवेल के जवाब देने से लोगों ने नया रास्ता खोजा और एक पखवारे पूर्व नदी में पांच फीट गहरा गड्ढा खोदकर निकल रहे मटमैले पानी से प्यास बुझानी शुरू की।

कुछ दिनों पूर्व यह गड्ढा भी सूख गया और अब ग्रामीण दो किमी दूर से पानी लाने को मजबूर हैं। प्रदूषित पानी से बचाव के लिए मध्यम वर्ग के लोगों ने 50 रुपये प्रति डिब्बा के हिसाब से पानी खरीदना शुरू कर दिया है।

जबकि गरीब वर्ग के लोग मजबूरन तालाबों और बांधों का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं। सूखे के संकट में प्रतिदिन दो हजार से अधिक डिब्बों की खपत हो रही है। बुंदेलखंड के महोबा जिले में सूखे की स्थिति में पानी कारोबार बन गया है।


चंदेल राजाओं की नगरी रही महोबा में नदियों, बांधों और ऐतिहासिक तालाबों की कोई कमी नही है। कभी न सूखने वाले चंदेलकालीन तालाब कुदरत के कहर से खुद प्यासे हो गए हैं। सात नदियों के साथ ही कबरई बांध, उर्मिल बांध, चंद्रावल बांध व मझगवां बांध लोगों की प्यास बुझाता रहा है। इसके अलावा ऐतिहासिक मदन सागर, कीरत सागर, कल्याण सागर व विजय सागर में हिलोरे मारता पानी नजर नहीं आता।

 

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