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Mahoba News: मामा माहिल की चुगली पर राज्य से निकाले गए थे आल्हा-ऊदल

Tue, 25 Aug 2026 12:26 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 12:26 AM IST
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Alha and Udal were banished from the kingdom due to the malicious gossip of their maternal uncle, Mahil.
फोटो 24 एमएएचपी 04 परिचय-वीर आल्हा की प्रतिमा। संवाद
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फोटो 24 एमएएचपी 05 परिचय-वीर ऊदल की प्रतिमा। संवाद
-सन् 1182 में साधुवेश में वीर आल्हा-ऊदल ने दिल्ली नरेश को चटाई थी धूल
-आल्हा-ऊदल के शौर्य और वीरता का प्रतीक है कजली मेला
संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। ऐतिहासिक कजली मेला वीर आल्हा-ऊदल के शौर्य, पराक्रम और मातृभूमि से प्रेम का प्रतीक है। मामा माहिल की चुगली पर महोबा के राजा परमाल ने आल्हा-ऊदल को राज्य से निकाल दिया था। सन् 1182 में दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान ने महोबा में चढ़ाई कर दी थी। उस समय आल्हा-ऊदल कन्नौज में थे। राज्य की अस्मिता को बचाने के लिए आल्हा-ऊदल ने यहां आकर दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान को धूल चटाई थी। तब से कजली मेला विजयोत्सव के रूप में लगता चला आ रहा है।
महोबा का कजली मेला चंदेल राजा परमाल के शासन से जुड़ा है। 844 साल पहले सन् 1182 में राजा परमाल की बेटी चंद्रावलि सखियों के साथ भुजरियां विसर्जित करने कीरत सागर जा रही थीं। इसी दौरान दिल्ली नरेश पृथ्वीराज चौहान ने महोबा पर आक्रमण कर दिया था। चारों ओर से महोबा को घेर लेने की सूचना कन्नौज में रह रहे आल्हा-ऊदल को मिली। पृथ्वीराज की योजना राजकुमारी चंद्रावलि का डोला ले जाने की थी। खबर मिलते ही आल्हा-ऊदल चचेरे भाई मलखान के साथ साधु वेश में महोबा आए। कीरत सागर तट पर आल्हा-ऊदल व पृथ्वीराज चौहान के बीच युद्ध हुआ। पृथ्वीराज चौहान को पराजय का सामना करना पड़ा। विजय प्राप्त होने के बाद राजा परमाल की बेटी चंद्रावलि ने सखियों के साथ कीरत सागर में भुजरियां विसर्जित की थीं। पूरे राज्य में जश्न मनाया गया था।
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आल्हा सम्राट वंशगोपाल यादव बताते हैं कि वीर आल्हा-ऊदल राजा परमाल के सैनिक थे लेकिन वह उन्हें अपने बेटों की तरह मानते थे। आल्हा-ऊदल ने अपनी वीरता और पराक्रम के बल पर कई लड़ाइयां जीतीं। राजा परमाल के साले माहिल को अंदेशा हुआ कि कहीं आल्हा-ऊदल महोबा का राज्य न ले लें। उसने आल्हा-ऊदल को राज्य से निकालने के लिए चुगली की थी। माहिल ने राजा से कहा था कि आल्हा-ऊदल का घोड़ा, अस्त्र आदि ले लिए जाएं नहीं तो वह महोबा का राज्य ले लेंगे। इस पर परमाल ने उनसे घोड़ा व अस्त्र मांगे लेकिन उन्होंने नहीं दिए और राज्य छोड़कर कन्नौज के राजा जयचंद्र के यहां पहुंच गए। तब माहिल ने दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान से महोबा में आल्हा-ऊदल के न होने व चढ़ाई करने की योजना बनवाई थी।
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