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दुर्लभ कल्प वृक्ष का फंगस देखने पहुंचे कृषि वैज्ञानिक
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महोबा। फंगस से जूझ रहे दुर्लभ कल्प वृक्ष को बचाने के लिए डीएम सत्येंद्र कुमार के निर्देश पर मंगलवार को दो हजार वर्ष पुराने देश के इकलौते जुड़वां कल्प वृक्ष को फंगस से मुक्त कराने के लिए कृषि रक्षा इकाई की टीम सिचौरा गांव पहुंची। इस दौरान कल्प वृक्ष के रोगग्रस्त तने पर दवा का छिड़काव किया। गांव के युवाओं की मदद से अब खोलने हो चुके कल्प वृक्ष के मोटे तने में मिट्टी भरी जाएगी।
बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने सोमवार को डीएम से धार्मिक आस्था के केंद्र कल्प वृक्ष को बचाने की गुहार लगाई थी। डीएम के निर्देश पर सुबह कृषि रक्षा इकाई के विमल चौरसिया व राम गोपाल दवा लेकर मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर सिचौरा गांव पहुंचे। दवा का छिड़काव कर कल्प वृक्ष का उपचार किया। टीम का सहयोग गांव के कुलदीप सिंह, अजय सिंह, कृष्णपाल सिंह, संदीप, सचिन खरे, अनिल ने किया।
लोगों का कहना है कि हजार साल पुराना एक कल्प वृक्ष हमीरपुर में यमुना नदी के किनारे है जिसे प्रशासन ने पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर दिया है। इसी तरह सिचौरा के दो हजार साल पुराने दुर्लभ कल्प वृक्ष को भी विकसित किया जाए।
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बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने सोमवार को डीएम से धार्मिक आस्था के केंद्र कल्प वृक्ष को बचाने की गुहार लगाई थी। डीएम के निर्देश पर सुबह कृषि रक्षा इकाई के विमल चौरसिया व राम गोपाल दवा लेकर मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर सिचौरा गांव पहुंचे। दवा का छिड़काव कर कल्प वृक्ष का उपचार किया। टीम का सहयोग गांव के कुलदीप सिंह, अजय सिंह, कृष्णपाल सिंह, संदीप, सचिन खरे, अनिल ने किया।
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लोगों का कहना है कि हजार साल पुराना एक कल्प वृक्ष हमीरपुर में यमुना नदी के किनारे है जिसे प्रशासन ने पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर दिया है। इसी तरह सिचौरा के दो हजार साल पुराने दुर्लभ कल्प वृक्ष को भी विकसित किया जाए।
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