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जुलूस ए मोहम्मदी में उमड़ा जनसैलाब
अमर उजाला ब्यूूराो महाोबा
Updated Sun, 04 Jan 2015 11:26 PM IST
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रविवार को अपरान्ह करीब एक बजे अब्दुल समद साहब के आस्ताने से सैय्यद फारूख अली और काजी-ए-शहर सैय्यद आफाक हुसैन के नेतृत्व में जुलूस निकाला गया। जो हवेली दरवाजा, भटीपुरा, मकनियापुरा, मिशन चौराहा, पुलिस चौकी, ऊदल चौक, आल्हा चौक, मुख्य मार्गों से निकाला गया। जुलूस में मुस्लिम समाज के लोगाें की भारी भीड़ जुटी। जुलूस में हिंदू भाइयाें ने भी शिरकत की और जगह-जगह चाय, कॉफी और दूध से स्वागत किया। जुलूस में नवयुवक उछलते हुए चल रहे थे। जुलूस के दौरान सरकार की आमद मरहवा, मक्के की आमद मरहवा, नबी का दामन नहीं छोड़ेंगे, सबसे प्यारा नबी हमारा, नारा-ए-तकवीर अल्लाह हो अकबर, देख लो भइया नबी की शान, बच्चा-बच्चा है कुर्बान आदि नारे लगाते चल रहे थे। जुलूस में लोग हरे परचम लहराते हुए नजर आए।
जुलूस-ए-मोहम्मदी देखने के लिए जगह-जगह भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। आल्हा चौक, सुभाष चौक, ऊदल चौक, तहसील चौराहा सहित तमाम स्थानाें पर महिलाआें, पुरुषाें की भारी भीड़ जमा रही। महिलाएं सड़काें के किनारे बनी छताें पर भारी संख्या में जुटीं। सुबह से ही मुसलिम इलाकाें में चहल पहल बढ़ गई। जुलूस दौरान सृजन संस्था, गुलाम-ए-मुस्तफा कमेटी, व्यापार मंडल, जिला कांग्रेस कमेटी ने जुलूस-ए-मोहम्मदी का जोरदार तरीके से स्वागत किया। जुलूस में झांकियाें में बैठे बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे।
चरखारी प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे की जामा मस्जिद परिसर से जुलूस निकाला गया। जो घड़ी मस्जिद चौराहा सहित मुख्य मार्गों से होता हुआ गोलाघाट होता हुआ जामा मस्जिद में समाप्त हो गया। जहां पर इनाम भी वितरित किए गए। जुलूस दौरान मुस्लिमों में खासा उत्साह दिखाई दिया। इस दौरान झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। कोतवाली प्रभारी अब्दुल रज्जाक पुलिस बल के साथ जुलूस दौरान मुस्तैद रहे। श्रीनगर प्रतिनिधि के अनुसार बारावफात पर्व कस्बे में परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर कस्बे की जामा मस्जिद से जुलूस-ए-मोहम्मदी डीजे की धुनाें के बीच निकाला गया। जो भैरवगंज, देवबाग, बजरंग कालोनी, बस स्टैंड होते हुए बाजार की जामा मस्जिद पहुंचकर समाप्त हो गया। जुलूस बजरंग चौक, बस स्टैंड, दाऊपुरा, मनोहर गंज होता हुआ बाजार पहुंचकर समाप्त हो गया। जुलूस का दुकानदाराें ने स्वागत किया। बेलाताल प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे में जुगियाना से डीजे के साथ जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जो कचेरनपुरा की बड़ी मस्जिद के पास पहुंचकर समाप्त हुआ।
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जुलूस में सबसे आगे घोड़े चल रहे थे। जुलूस में मुस्लिम भाइयाें के अलावा हिंदू भाइयाें ने भी शिरकत की। इस मौके पर बलराम बनाफर, कौशल सोनी, भागीरथ यादव मौजूद रहे। कबरई प्रतिनिधि के अनुसार जुलूस-ए-मोहम्मदी कस्बे के शेर-ए-अली दरगाह परिसर से निकाला गया। जो मेन मार्केट, पंच पहाड़ी होता हुआ कबरई तिराहा पहुंचा। जहां पर नारा-ए-तकवीर अल्लाह हो अकबर की सदाएं बुलंद की गईं। जुलूस दौरान नसीर, नासिर अली सहित तमाम लोग मौजूद रहे। खन्ना प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे के थाने की मस्जिद से जुलूस- ए- मोहम्मदी निकाला गया। जो बजरंग चौक, मेन मार्केट होते हुए पुन: मस्जिद पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस का जगह-जगह स्वागत किया गया। जुलूस दौरान जगह-जगह लंगर लुटाया गया। इस पर्व के प्रति लोगाें में खासा उत्साह दिखाई दिया। कुलपहाड़ जुलूस जामा मस्जिद मदरसा से शुरू होकर टिलवापुरा, नऊअनपुरा, राजा वार्ड, बाजार, बस स्टैंड, किशोरगंज, पुरानी तहसील होता हुआ जामा मस्जिद पहुंचकर समाप्त हुआ। जामा मस्जिद नूरी से जुलूस शाम चार बजे निकाला गया। जुलूस दखने के लिए भारी भीड़ जुटी। नातिया कलाम की धूम रही।
मोहम्मद साहब ने आपसी भाईचारे का दिया संदेश
महोबा। हजरत मोहम्मद साहब की यौमे विलादत पर निकाले गए जुलूस दौरान कारी सैय्यद आफाक हुसैन ने शहर में जगह-जगह खिताब कर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के बताए रास्ते पर चलने का संदेश दिया। उन्हाेंने कहा कि मोहम्मद साहब ने किसी भी धर्म की बुराई नहीं की बल्कि आपसी भाईचारे का संदेश दिया। उन्हाेंने कहा कि ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चलने वाले हमेशा खुशहाल रहते हैं। आज लोग दीन से दूर होते जा रहे हैं। इसीलिए वह परेशान हैं।
इरम बांधे बच्चे रहे आकर्षण का केंद्र
महोबा। जुलूस दौरान छोटे-छोटे बच्चे सिर पर इरम तो कोई सिर पर हरी पगड़ी बांधे हुए चल रहे थे। कुछ लोग सिर पर इरम बांधे हुए चल रहे थे। जो आकर्षण का केंद्र रहे। जुलूस में कहीं कव्वालियां हो रही थीं तो कहीं डीजे पर सवार लोग लब्बैक-लब्बैक पढ़ते हुए चल रहे थे। जुलूस में छोटे-छोटे बच्चों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। कहीं साइकिल पर की सजावट आकर्षक रही वहंीं बाइक पर बनाई गई नाव देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी।
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जुलूस-ए-मोहम्मदी देखने के लिए जगह-जगह भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। आल्हा चौक, सुभाष चौक, ऊदल चौक, तहसील चौराहा सहित तमाम स्थानाें पर महिलाआें, पुरुषाें की भारी भीड़ जमा रही। महिलाएं सड़काें के किनारे बनी छताें पर भारी संख्या में जुटीं। सुबह से ही मुसलिम इलाकाें में चहल पहल बढ़ गई। जुलूस दौरान सृजन संस्था, गुलाम-ए-मुस्तफा कमेटी, व्यापार मंडल, जिला कांग्रेस कमेटी ने जुलूस-ए-मोहम्मदी का जोरदार तरीके से स्वागत किया। जुलूस में झांकियाें में बैठे बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे।
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चरखारी प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे की जामा मस्जिद परिसर से जुलूस निकाला गया। जो घड़ी मस्जिद चौराहा सहित मुख्य मार्गों से होता हुआ गोलाघाट होता हुआ जामा मस्जिद में समाप्त हो गया। जहां पर इनाम भी वितरित किए गए। जुलूस दौरान मुस्लिमों में खासा उत्साह दिखाई दिया। इस दौरान झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। कोतवाली प्रभारी अब्दुल रज्जाक पुलिस बल के साथ जुलूस दौरान मुस्तैद रहे। श्रीनगर प्रतिनिधि के अनुसार बारावफात पर्व कस्बे में परंपरागत तरीके से मनाया गया। इस अवसर पर कस्बे की जामा मस्जिद से जुलूस-ए-मोहम्मदी डीजे की धुनाें के बीच निकाला गया। जो भैरवगंज, देवबाग, बजरंग कालोनी, बस स्टैंड होते हुए बाजार की जामा मस्जिद पहुंचकर समाप्त हो गया। जुलूस बजरंग चौक, बस स्टैंड, दाऊपुरा, मनोहर गंज होता हुआ बाजार पहुंचकर समाप्त हो गया। जुलूस का दुकानदाराें ने स्वागत किया। बेलाताल प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे में जुगियाना से डीजे के साथ जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जो कचेरनपुरा की बड़ी मस्जिद के पास पहुंचकर समाप्त हुआ।
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जुलूस में सबसे आगे घोड़े चल रहे थे। जुलूस में मुस्लिम भाइयाें के अलावा हिंदू भाइयाें ने भी शिरकत की। इस मौके पर बलराम बनाफर, कौशल सोनी, भागीरथ यादव मौजूद रहे। कबरई प्रतिनिधि के अनुसार जुलूस-ए-मोहम्मदी कस्बे के शेर-ए-अली दरगाह परिसर से निकाला गया। जो मेन मार्केट, पंच पहाड़ी होता हुआ कबरई तिराहा पहुंचा। जहां पर नारा-ए-तकवीर अल्लाह हो अकबर की सदाएं बुलंद की गईं। जुलूस दौरान नसीर, नासिर अली सहित तमाम लोग मौजूद रहे। खन्ना प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे के थाने की मस्जिद से जुलूस- ए- मोहम्मदी निकाला गया। जो बजरंग चौक, मेन मार्केट होते हुए पुन: मस्जिद पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस का जगह-जगह स्वागत किया गया। जुलूस दौरान जगह-जगह लंगर लुटाया गया। इस पर्व के प्रति लोगाें में खासा उत्साह दिखाई दिया। कुलपहाड़ जुलूस जामा मस्जिद मदरसा से शुरू होकर टिलवापुरा, नऊअनपुरा, राजा वार्ड, बाजार, बस स्टैंड, किशोरगंज, पुरानी तहसील होता हुआ जामा मस्जिद पहुंचकर समाप्त हुआ। जामा मस्जिद नूरी से जुलूस शाम चार बजे निकाला गया। जुलूस दखने के लिए भारी भीड़ जुटी। नातिया कलाम की धूम रही।
मोहम्मद साहब ने आपसी भाईचारे का दिया संदेश
महोबा। हजरत मोहम्मद साहब की यौमे विलादत पर निकाले गए जुलूस दौरान कारी सैय्यद आफाक हुसैन ने शहर में जगह-जगह खिताब कर हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम के बताए रास्ते पर चलने का संदेश दिया। उन्हाेंने कहा कि मोहम्मद साहब ने किसी भी धर्म की बुराई नहीं की बल्कि आपसी भाईचारे का संदेश दिया। उन्हाेंने कहा कि ईमानदारी और सच्चाई के रास्ते पर चलने वाले हमेशा खुशहाल रहते हैं। आज लोग दीन से दूर होते जा रहे हैं। इसीलिए वह परेशान हैं।
इरम बांधे बच्चे रहे आकर्षण का केंद्र
महोबा। जुलूस दौरान छोटे-छोटे बच्चे सिर पर इरम तो कोई सिर पर हरी पगड़ी बांधे हुए चल रहे थे। कुछ लोग सिर पर इरम बांधे हुए चल रहे थे। जो आकर्षण का केंद्र रहे। जुलूस में कहीं कव्वालियां हो रही थीं तो कहीं डीजे पर सवार लोग लब्बैक-लब्बैक पढ़ते हुए चल रहे थे। जुलूस में छोटे-छोटे बच्चों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। कहीं साइकिल पर की सजावट आकर्षक रही वहंीं बाइक पर बनाई गई नाव देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटी।