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श्रद्धा, भक्ति से की गोखारगिरि परिक्रमा
Mahoba
Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
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कबीर अमृतवाणी सत्संग में कबीर के उपदेशाें की व्याख्या
महोबा। गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि ऐतिहासिक गोखारगिरि की परिक्रमा भक्तिभाव से पूरी हुई। परिक्रमा के बाद कबीर आश्रम में हुई विचार गोष्ठी में कबीरपंथी वक्ताआें ने संत कबीर दास के उपदेशाें की व्याख्या की।
ऐतिहासिक गोखारगिरि की परिक्रमा रविवार को शिवतांडव मंदिर से शुरू हुई। परिक्रमा कबीर आश्रम, फिरोजशाह की दरगाह, छोटी चंद्रिका मंदिर, नागौरिया मंदिर, कालीमाता मंदिर होते हुए पुन: शिवतांडव मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। परिक्रमा में पुरुषाें, महिलाआें और बच्चाें ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। परिक्रमा दौरान श्रद्धालु रामधुन गाते चल रहे थे। परिक्रमा के बाद सभी भक्तगणाें को प्रसाद वितरित किया गया। परिक्रमा में मेवालाल परदेशी, शिवकुमार गोस्वामी, सीताराम शुक्ला, आशीष पुरवार, सुरेश पुरवार, कंछेदी पुरवार, प्रमोद सक्सेना, मदनमोहन सक्सेना, ललता सक्सेना, जगत गुप्ता सहित तमाम लोग शामिल रहे। परिक्रमा मार्ग में स्थित सभी ऐतिहासिक स्थलाें के सुंदरीकरण के लिए विचार गोष्ठी आयोजित हुई। उधर कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में अमृतवाणी सत्संग का आयोजन संत कबीर आश्रम में हुआ। इस दौरान गोष्ठी में हरदयाल हरि ने कहा कि मनुष्य को मुसीबत में कभी घबराना नहीं चाहिए। हमें सुख और दुख हर परिस्थिति में ईश्वर को याद करना चाहिए। कहा कि मनुष्य को पानी बर्बाद नहीं करना चाहिए। बल्कि पानी की बचत कर उसे एकत्रित करना चाहिए। क्याेंकि आज के समय में पानी अमृत के समान है। इस मौके पर ब्रजमोहन ताम्रकार ने संगीत की धुन में गायत्री मंत्र सुनाकर श्रोताआें को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्यामानंद, योगिता और मंगीलाल सेन ने श्रोताआें को भजन सुनाए। योगेंद्र अनुरागी, नंदकिशोर, क्षमा सहित तमाम लोग उपसि्थत रहे।
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महोबा। गुरु गोरखनाथ की तपोभूमि ऐतिहासिक गोखारगिरि की परिक्रमा भक्तिभाव से पूरी हुई। परिक्रमा के बाद कबीर आश्रम में हुई विचार गोष्ठी में कबीरपंथी वक्ताआें ने संत कबीर दास के उपदेशाें की व्याख्या की।
ऐतिहासिक गोखारगिरि की परिक्रमा रविवार को शिवतांडव मंदिर से शुरू हुई। परिक्रमा कबीर आश्रम, फिरोजशाह की दरगाह, छोटी चंद्रिका मंदिर, नागौरिया मंदिर, कालीमाता मंदिर होते हुए पुन: शिवतांडव मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। परिक्रमा में पुरुषाें, महिलाआें और बच्चाें ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। परिक्रमा दौरान श्रद्धालु रामधुन गाते चल रहे थे। परिक्रमा के बाद सभी भक्तगणाें को प्रसाद वितरित किया गया। परिक्रमा में मेवालाल परदेशी, शिवकुमार गोस्वामी, सीताराम शुक्ला, आशीष पुरवार, सुरेश पुरवार, कंछेदी पुरवार, प्रमोद सक्सेना, मदनमोहन सक्सेना, ललता सक्सेना, जगत गुप्ता सहित तमाम लोग शामिल रहे। परिक्रमा मार्ग में स्थित सभी ऐतिहासिक स्थलाें के सुंदरीकरण के लिए विचार गोष्ठी आयोजित हुई। उधर कबीर अमृतवाणी सत्संग समिति के तत्वावधान में अमृतवाणी सत्संग का आयोजन संत कबीर आश्रम में हुआ। इस दौरान गोष्ठी में हरदयाल हरि ने कहा कि मनुष्य को मुसीबत में कभी घबराना नहीं चाहिए। हमें सुख और दुख हर परिस्थिति में ईश्वर को याद करना चाहिए। कहा कि मनुष्य को पानी बर्बाद नहीं करना चाहिए। बल्कि पानी की बचत कर उसे एकत्रित करना चाहिए। क्याेंकि आज के समय में पानी अमृत के समान है। इस मौके पर ब्रजमोहन ताम्रकार ने संगीत की धुन में गायत्री मंत्र सुनाकर श्रोताआें को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्यामानंद, योगिता और मंगीलाल सेन ने श्रोताआें को भजन सुनाए। योगेंद्र अनुरागी, नंदकिशोर, क्षमा सहित तमाम लोग उपसि्थत रहे।
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