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अजनर ग्राम समूह पेयजल योजना फ्लाप
Mahoba
Updated Thu, 14 Feb 2013 05:31 AM IST
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अजनर (महोबा)। ग्रामीणाें की प्यास बुझाने को छह साल पहले 1.44 करोड़ की लागत से बनाई गई अजनर ग्राम समूह पेयजल योजना फ्लाप हो गई है। गांव में पाइप लाइन बिछाने के बाद भी पर्याप्त जलापूर्ति नहीं हो पा रही है, जिससे ग्रामीणों को पानी नहीं मिल रहा है।
वर्ष 2006-07 में जल निगम ने 1.44 करोड़ रुपए की परियोजना की शुरुआत की थी। इसके तहत गांव में ढाई किलोमीटर राइजिंग मेन, पांच किलोमीटर तक पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन, तीन पंप हाउस, तीन नलकूप, पंपिंग प्लांट, पावर कनेक्शन और जलाशय का निर्माण कराया जाना था, लेकिन छह साल में जल निगम सिर्फ एक पानी की टंकी ही बनवा सका है, वह भी शोपीस बनी है। डबरा ग्राउंड से पाइप लाइन बिछाई गई, जो टेस्टिंग के दौरान फट गई। इससे गांव में लगे कुछ स्टैंड पोस्ट लोगाें को पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। इससे लोगाें को घंटाें इंतजार के बाद भी मुश्किल से पानी नसीब हो पाता है।
सुरेश, ब्रजगोपाल सिंह, मुन्ना कुशवाहा, गनेश राजपूत, भानुप्रताप, रामाधीन ने बताया कि भूजल स्तर में गिरावट और कम बारिश के चलते गांव के तालाब और कुआें ने जवाब दे दिया है। गांव के 35 फीसदी हैंडपंप खराब हैं और 25 फीसदी ड्राई हो गए हैं। बचे हैंडपंपों पर लंबी-लंबी लाइनाें में घंटाें लगने के बाद मुश्किल से पानी मिलता है। इतना ही नहीं गांव के मात्र 20 फीसदी कुओं में ही पानी है। कई ग्रामीण साइकिल और बैलगाड़ी पर मीलाें दूर से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सर्दी में जब यह हाल तो गर्मी में क्या होगा।
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वर्ष 2006-07 में जल निगम ने 1.44 करोड़ रुपए की परियोजना की शुरुआत की थी। इसके तहत गांव में ढाई किलोमीटर राइजिंग मेन, पांच किलोमीटर तक पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन, तीन पंप हाउस, तीन नलकूप, पंपिंग प्लांट, पावर कनेक्शन और जलाशय का निर्माण कराया जाना था, लेकिन छह साल में जल निगम सिर्फ एक पानी की टंकी ही बनवा सका है, वह भी शोपीस बनी है। डबरा ग्राउंड से पाइप लाइन बिछाई गई, जो टेस्टिंग के दौरान फट गई। इससे गांव में लगे कुछ स्टैंड पोस्ट लोगाें को पर्याप्त आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं। इससे लोगाें को घंटाें इंतजार के बाद भी मुश्किल से पानी नसीब हो पाता है।
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सुरेश, ब्रजगोपाल सिंह, मुन्ना कुशवाहा, गनेश राजपूत, भानुप्रताप, रामाधीन ने बताया कि भूजल स्तर में गिरावट और कम बारिश के चलते गांव के तालाब और कुआें ने जवाब दे दिया है। गांव के 35 फीसदी हैंडपंप खराब हैं और 25 फीसदी ड्राई हो गए हैं। बचे हैंडपंपों पर लंबी-लंबी लाइनाें में घंटाें लगने के बाद मुश्किल से पानी मिलता है। इतना ही नहीं गांव के मात्र 20 फीसदी कुओं में ही पानी है। कई ग्रामीण साइकिल और बैलगाड़ी पर मीलाें दूर से पानी लाकर प्यास बुझा रहे हैं। लोगों का कहना है कि सर्दी में जब यह हाल तो गर्मी में क्या होगा।
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