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राष्ट्रीय लोक अदालत 546 वादों का हुआ निस्तारण
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
Updated Sat, 08 Aug 2015 10:17 PM IST
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महोबा। जनपद न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन जिला जज चैतन्य कुमार कुलश्रेष्ठ की अध्यक्षता में किया गया, जिसमें कुल 546 वादों का निस्तारण करने के साथ 1 लाख 15175 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूल किया गया। आपसी सुलह समझौते के आधार पर कराए गए वादों के निस्तारण से वादकारी भी खुश दिखे।
जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में व्यवहार वाद के 07, एमएसीटी एक्ट के 02, लघु अपराधिक मामलों के 297, दत्तराधिकारी अधिनियम का 01, वैवाहिक वाद के 04, उपभोक्ता फोरम के 02, बंाटमाप के 09, बैंक ऋण से संबधित 132, विद्युत अधिनियम के 24 वादों सहित 546 वादों का निस्तारण दोनों पक्षों की आपसी सहमति सुलह समझौते के आधार पर किया गया। लोक अदालत में प्रतिकर के रूप में 70 हजार, अर्थदंड के रूप में 1 लाख 15175, रुपये जमा कराए गए। लोक अदालत की अध्यक्षता करते हुए जिला जज ने कहा कि लोक अदालत में वाद पंजीकृत कराने से वादी का समय और धनराशि दोनों बचती है और जल्दी मामले का निस्तारण हो जाता है। लोक अदालत में अपर जिला जज कोर्ट-1 गजेंद्र कु मार, अपर जिला जज कोर्ट-2 के संजय हरि शुक्ला, अपर जिला जज कोर्ट-3 महेंद्र प्रताप सिंह यादव, प्रधान न्यायाधीश फेमिली कोर्ट श्याम लाल कोरी, सीजेएम नवीन कु मार सिंह सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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जनपद न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में व्यवहार वाद के 07, एमएसीटी एक्ट के 02, लघु अपराधिक मामलों के 297, दत्तराधिकारी अधिनियम का 01, वैवाहिक वाद के 04, उपभोक्ता फोरम के 02, बंाटमाप के 09, बैंक ऋण से संबधित 132, विद्युत अधिनियम के 24 वादों सहित 546 वादों का निस्तारण दोनों पक्षों की आपसी सहमति सुलह समझौते के आधार पर किया गया। लोक अदालत में प्रतिकर के रूप में 70 हजार, अर्थदंड के रूप में 1 लाख 15175, रुपये जमा कराए गए। लोक अदालत की अध्यक्षता करते हुए जिला जज ने कहा कि लोक अदालत में वाद पंजीकृत कराने से वादी का समय और धनराशि दोनों बचती है और जल्दी मामले का निस्तारण हो जाता है। लोक अदालत में अपर जिला जज कोर्ट-1 गजेंद्र कु मार, अपर जिला जज कोर्ट-2 के संजय हरि शुक्ला, अपर जिला जज कोर्ट-3 महेंद्र प्रताप सिंह यादव, प्रधान न्यायाधीश फेमिली कोर्ट श्याम लाल कोरी, सीजेएम नवीन कु मार सिंह सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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