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वनटांगियां गावों मंे आने लगे अच्छे दिन
Mon, 24 Dec 2018 12:26 AM IST
राकेश पांडेय
महराजगंज (ब्यूरो)
महराजगंज (ब्यूरो)
Published by: राकेश पांडेय
Updated Mon, 24 Dec 2018 12:26 AM IST
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वनटांगियां गावों मंे आने लगे अच्छे दिन
- फोटो : अमर उजाला
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महराजगंज। वन ग्रामों के अच्छे दिन आने लगे हैं। जबसे सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जिले के सभी 18 वन ग्रामों को राजस्व गांव घोषित किया है, उन्हें विकास की मुख्यधारा में जोड़ने की कवायद तेज कर दी गई है। वनटांगिया समुदाय के लोग उनके गांवों में आवश्यक सुविधाओं के विकास के लिए जागरूक होने के साथ ही आवाज भी बुलंद करने लगे हैं। उनकी जागरूकता का ही असर है कि प्रशासन को एक जनवरी को सभी 18 वन ग्रामों में एक जनवरी 2019 को जिलास्तरीय अधिकारियों को भेजने के निर्देश देने के लिए विवश होना पड़ा है। सीडीओ का कहना है कि एक जनवरी 2018 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वन ग्रामों को राजस्व गांव घोषित किया था। एक साल पूरा होने पर एक जनवरी 2019 को वन ग्राम में जिलास्तरीय अधिकारी पहुंचेंगे और वनटांगियों की खुशी में शरीक होंगे। इस संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश दे दिए गए हैं।
वनटांगिया समुदाय का सामाजिक तानाबाना बदलने लगा है। जहां मेड़ थे, वहां सड़कें और जिन घरों में ढिबरी जलाकर रात में रोशनी की कोशिश की जाती थी, वहां सोलर एवं स्ट्रीट लाइट लगने लगीं हैं। जिले के 18 वन ग्रामों की कुल आबादी 25,979 बताई जाती है। इनमें कुल 6,125 परिवार रहते हैं। वन ग्रामों को राजस्व गांव घोषित किए जाने के बाद वनटांगिया समुदाय के लोगों को कुल 1615.212 हेक्टेअर भूमि पर मालिकाना हक दिया गया है। इसमें से 1486.86 हेक्टेअर कृषि और 128.45 हेक्टेअर आवासीय भूमि है। राजस्व गांव घोषित होने के बाद यहां के लोगों को केंद्र व प्रदेश सरकार की तरफ से संचालित विकास व कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाने लगा है। वैसे तो सूबे में वर्ष 1918 से शुरू हुई वनटांगिया पद्धति (पौधा लगाकर पेड़ होने तक देखरेख करना) 1985 तक चली। इस पद्धति से जुड़े वनटांगिया समुदाय के लोग एक स्थान पर जंगल के लिए पौधे लगाते थे। जब वहां पौधे पेड़ हो जाते थे तो वनटांगिया समुदाय के लोग वहां सेे दूसरे स्थान पर जाकर फिर पौधरोपण करने लगते थे। पेड़ तैयार होने तक वनटांगिया पौधों के बीच की भूमि पर सब्जी आदि उगाकर जीविकोपार्जन करते थे। जब 1985 में यह पद्धति समाप्त की गई तो जो वनटांगिया जहां थे, वहीं के होकर रह गए। इसके बाद वनटांगिया समुदाय के लोग जिस जगह रह कर जीवन यापन कर रहे थे, उस भूमि पर मालिकाना हक की मांग करने लगे। लंबे संघर्ष के बाद जुलाई 2011 में मालिकाना हक मिला। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली जनवरी 2018 को वन ग्रामों को राजस्व गांव घोषित कर दिया। इसके साथ ही वन ग्रामों के विकास का द्वार भी खुल गया। मुख्य विकास अधिकारी राम सिंहासन प्रेम ने बताया कि सभी वन ग्रामों के 3221 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आशियाना मिलेगा। लाभार्थियों में 2860 सामान्य तथा 361 दलित वर्ग के लोग शामिल होंगे। इसमें से 735 लोगों को किस्त भी जारी कर दी गई है। करीब 2800 लोगों को पेंशन संबंधी योजनाओं का लाभ दिलाने की तैयारी है। पेंशन का लाभ पाने वालों में 2208 वृद्धा, 82 दिव्यांगजन व 563 निराश्रित महिलाएं शामिल हैं। सात वन ग्रामों को जहां सोलर लाइट से रोशन किया जा रहा है वहीं 11 का विद्युतीकरण कराया गया है। इन गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग की तरफ से करीब 60 किमी संपर्क मार्ग बनाए जाने की तैयारी है। सभी 18 वन ग्रामों के करीब 4830 जॉब कॉर्डधारकों को जहां गांव में ही रोजगार मिलेगा, वहीं स्व रोजगार के लिए इच्छुक लोगों को भी रोजगार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। जॉब कॉर्डधारको को वन ग्राम में ही मनरेगा के तहत रोजगार दिलाने के लिए नाली, खंड़जा, सड़क आदि के कार्य जारी रखने की व्यवस्था की गई है। स्व रोजगार के लिए इच्छुक वनटांगिया को रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत रिवाल्विंग फंड से रकम जारी करने के साथ ही समूहों को बैंक से लिंक कराकर ऋण दिलाए जा रहे हैं। डीएम अमरनाथ उपाध्याय का कहना है कि वन ग्राम व मुसहर गांवों में विकास कार्य शासन व प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता में है। वन ग्रामों को विकसित करने के साथ ही वनटांगिया समुदाय को समाज की मुख्य धारा में जोड़ने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
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वनटांगिया समुदाय का सामाजिक तानाबाना बदलने लगा है। जहां मेड़ थे, वहां सड़कें और जिन घरों में ढिबरी जलाकर रात में रोशनी की कोशिश की जाती थी, वहां सोलर एवं स्ट्रीट लाइट लगने लगीं हैं। जिले के 18 वन ग्रामों की कुल आबादी 25,979 बताई जाती है। इनमें कुल 6,125 परिवार रहते हैं। वन ग्रामों को राजस्व गांव घोषित किए जाने के बाद वनटांगिया समुदाय के लोगों को कुल 1615.212 हेक्टेअर भूमि पर मालिकाना हक दिया गया है। इसमें से 1486.86 हेक्टेअर कृषि और 128.45 हेक्टेअर आवासीय भूमि है। राजस्व गांव घोषित होने के बाद यहां के लोगों को केंद्र व प्रदेश सरकार की तरफ से संचालित विकास व कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी दिया जाने लगा है। वैसे तो सूबे में वर्ष 1918 से शुरू हुई वनटांगिया पद्धति (पौधा लगाकर पेड़ होने तक देखरेख करना) 1985 तक चली। इस पद्धति से जुड़े वनटांगिया समुदाय के लोग एक स्थान पर जंगल के लिए पौधे लगाते थे। जब वहां पौधे पेड़ हो जाते थे तो वनटांगिया समुदाय के लोग वहां सेे दूसरे स्थान पर जाकर फिर पौधरोपण करने लगते थे। पेड़ तैयार होने तक वनटांगिया पौधों के बीच की भूमि पर सब्जी आदि उगाकर जीविकोपार्जन करते थे। जब 1985 में यह पद्धति समाप्त की गई तो जो वनटांगिया जहां थे, वहीं के होकर रह गए। इसके बाद वनटांगिया समुदाय के लोग जिस जगह रह कर जीवन यापन कर रहे थे, उस भूमि पर मालिकाना हक की मांग करने लगे। लंबे संघर्ष के बाद जुलाई 2011 में मालिकाना हक मिला। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली जनवरी 2018 को वन ग्रामों को राजस्व गांव घोषित कर दिया। इसके साथ ही वन ग्रामों के विकास का द्वार भी खुल गया। मुख्य विकास अधिकारी राम सिंहासन प्रेम ने बताया कि सभी वन ग्रामों के 3221 परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आशियाना मिलेगा। लाभार्थियों में 2860 सामान्य तथा 361 दलित वर्ग के लोग शामिल होंगे। इसमें से 735 लोगों को किस्त भी जारी कर दी गई है। करीब 2800 लोगों को पेंशन संबंधी योजनाओं का लाभ दिलाने की तैयारी है। पेंशन का लाभ पाने वालों में 2208 वृद्धा, 82 दिव्यांगजन व 563 निराश्रित महिलाएं शामिल हैं। सात वन ग्रामों को जहां सोलर लाइट से रोशन किया जा रहा है वहीं 11 का विद्युतीकरण कराया गया है। इन गांवों को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए लोक निर्माण विभाग की तरफ से करीब 60 किमी संपर्क मार्ग बनाए जाने की तैयारी है। सभी 18 वन ग्रामों के करीब 4830 जॉब कॉर्डधारकों को जहां गांव में ही रोजगार मिलेगा, वहीं स्व रोजगार के लिए इच्छुक लोगों को भी रोजगार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रहीं हैं। जॉब कॉर्डधारको को वन ग्राम में ही मनरेगा के तहत रोजगार दिलाने के लिए नाली, खंड़जा, सड़क आदि के कार्य जारी रखने की व्यवस्था की गई है। स्व रोजगार के लिए इच्छुक वनटांगिया को रोजगार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत रिवाल्विंग फंड से रकम जारी करने के साथ ही समूहों को बैंक से लिंक कराकर ऋण दिलाए जा रहे हैं। डीएम अमरनाथ उपाध्याय का कहना है कि वन ग्राम व मुसहर गांवों में विकास कार्य शासन व प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता में है। वन ग्रामों को विकसित करने के साथ ही वनटांगिया समुदाय को समाज की मुख्य धारा में जोड़ने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
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