फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Wild animals are becoming violent, human life is in danger

Maharajganj News: हिंसक हो रहे वन्य जीव, मानव जीवन को खतरा

Thu, 05 Jun 2025 01:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Thu, 05 Jun 2025 01:09 AM IST
विज्ञापन
Wild animals are becoming violent, human life is in danger
रात के अंधेरे में दिखा तेंदुआ।
महराजगंज। वन क्षेत्र से वन्य जीव बाहर निकलकर मानव जीवन के लिए खतरा उत्पन्न कर रहे हैं। अक्सर तेंदुओं के आतंक से लोग दहशत में रहने को विवश होते हैं। वहीं बंदर भी अब उत्पात मचाकर लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। बैजनाथपुर में बंदर पकड़ा गया। वहीं निचलौल क्षेत्र के मिश्रौलिया के लोग तेंदुए की आहट से दहशत में हैं।
विज्ञापन

बंदर के आतंक की बात करें तो झनझनपुर में बंदर का आतंक एक माह पहले से है। गांव के रामाकांत ने बताया कि बंदर के आतंक से लोग परेशान थे। करीब 15 लोगों को काट चुका था। इतना ही नहीं मंगलवार को झनझनुपर में बंदर ने चार लोगों को काट कर घायल कर दिया था। बुधवार को गांव के लोगों ने करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बंदर को पकड़कर वन विभाग को सौंप दिया।
विज्ञापन

रेंजर ऋषभ नायक ने बताया कि बंदर को जंगल में छोड़ दिया गया। वन क्षेत्र के आसपास के गांवों के लोगों को जागरूक किया जाता है। इस तरह करीब तीन माह पहले चौक क्षेत्र में बंदर से आतंक मचाया था। इधर पकड़ी क्षेत्र में भी एक बंदर अक्सर लोगों को घायल करता रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

श्री बालाजी महाविद्यालय पकड़ी के प्राचार्य विनय उपाध्याय कहते हैं कि करीब 15 दिन पहले बंदर ने स्कूल जाने के दौरान घायल कर दिया था। वन क्षेत्र से बंदर अक्सर आबादी क्षेत्र में आ जाते हैं। वहीं निचलौल क्षेत्र के जंगलों से सटे गांव गुलरभार, मिश्रवलिया, करमहिया के रहने वाले रामगोपाल, कन्हैया लाल, मुरारी, ऋषि देव ने बताया कि पहले तेंदुआ या अन्य जीव सीधे आबादी का रुख नहीं करते थे, क्योंकि उन्हें जंगल में ही पर्याप्त भोजन मिल जाता था।
कभी-कभार ही ऐसे मामले सुनाई देते थे। तेंदुआ गांव में पहुंचकर जानवरों पर हमला किया हो और बंदरों का झुंड गांवों में घुसकर उत्पाद मचा रहे हो, लेकिन वर्तमान समय में इस तरह की अधिकांश घटना सुनने और देखने को मिल रही है। जहां तेंदुआ गांव में घुसकर पालतू जानवरों पर हमलाकर मार दिया हो।
वहीं गांव में बंदर कई लोगों पर हमलाकर लहूलुहान कर दिया हो। इसका मुख्य कारण है कि जंगलों से गुजरी सड़कों पर दिन रात वाहनों का आवागमन और गांवों की आबादी जंगलों तक पहुंचना है, क्योंकि इससे वन्यजीवों का जीवन काफी हद तक प्रभावित हुआ है।
नेपाल के चितवन पार्क से आते रहते हैं गैंडा, भालू
महराजगंज जनपद 342 वर्ग किमी क्षेत्र वन से घिरा हुआ है, जो जिले के करीब 11.59 प्रतिशत क्षेत्र के बराबर है। यह जिला वन से घिरे होने के कारण काफी हरा-भरा रहता है। गोरखपुर वन क्षेत्र से 1987 में अलग होकर वन्य जीव अभ्यारण्य बना सोहगीबरवा सेंचुरी नेपाल के चितवन पार्क और बिहार के वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर में शामिल है। तीनों वन क्षेत्र एक-दूसरे से सटे हैं। नेपाल के चितवन पार्क से गैंडा, भालू यहां आते रहते हैं। वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व के बाघों की यहां साइटिंग होती रहती है। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग में तेंदुओं की संख्या 67 हैं। चीतल 2004, सांभर 469, नीलगाय 2494, जंगली सुअर 3803, बंदर 7586, लंगूर 4916, सियार 1285, जंगली बिल्ली 113, मगरमच्छ 166, काकड़ 416, खरगोश 573, वनगाय 680 की संख्या में मौजूद हैं।
असंतुलन के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष चिंताजनक
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) का मानना है कि धरती पर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने और मानव जीवन के लिए सुख-समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए जितना जरूरी आदमी है। उतने ही जरूरी अन्य जीव-जंतु भी हैं। इनमें से भी अगर केवल वनस्पतियों पर निर्भर जीव-जंतु ही धरती पर रहेंगे तो यह धरती वनस्पति विहीन हो जाएगी। इसलिए दूसरे जीवों को खाने वाले मांसाहारी जीवों का सही अनुपात में रहना बहुत जरूरी है, लेकिन प्राकृतिक संतुलन बिगड़ गया है। इस असंतुलन के कारण मानव-वन्यजीव संघर्ष चिंताजनक स्थिति तक पहुंच गया है।
हलचल बढ़ने पर वन्य जीव हो जाते हैं प्रभावित
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मैनेजर अरशद हुसैन ने कहा कि सभी वन्य जीवों का एक क्षेत्र होता है, लेकिन उस क्षेत्र में हलचल बढ़ने पर वन्य जीव प्रभावित हो जाते हैं। जंगलों में भोजन नहीं मिलने से तेंदुए सीधे आबादी में पहुंच जाते हैं। जहां पर पालतू जानवरों के शिकार करने के दौरान उनका संघर्ष मानव से हो रहा है। जंगलों में लोमड़ी और सुअरों की संख्या बेहद कम हो चुकी। हालांकि तेंदुओं की संख्या में इजाफा हो रहा है। इसी तरह बंदरों के भी भोजन के लिए फलदार वृक्ष काफी कम हो चुके हैं। आने वाले कुछ वर्षों में तेंदुओं और बंदरों की संख्या में काफी इजाफा हो जाएगा।

तेंदुए और बंदर यहां कर चुके हैं हमला
26 जुलाई को निचलौल क्षेत्र के बढ़या टोला गेठीहवा से सटे बकरियों की झुंड पर तेंदुए ने हमला किया था

24 जुलाई को कोठीभार थाना क्षेत्र के गुरली-रमगढ़वा गांव में एक तेंदुए ने छत पर बंधी बकरी पर हमला किया था
15 जुलाई को निचलौल शहर से सटे चमनगंज नहर पुल के पास तेंदुए ने हिरन को नोचकर मार डाला था।

6 जुलाई को कलनही गांव के सामने खड्डा नहर मार्ग पर तेंदुए ने बाइक सवार बाप,बेटी पर हमला किया था।

5 जुलाई को मधवलिया वन रेंज क्षेत्र के बसौली बीट से सटे सुकड़हर गांव में तेंदुए ने एक पालतू कुत्ते को शिकार कर लिया था।

11 नवंबर को परागपुर गांव में बंदरों का झुंड गांव में घुस काफी उत्पात मचा रखें थे।

4 जुलाई को सिसवा नगर पालिका परिषद में बंदर ने हमला कर कपड़ा व्यवसाई लक्ष्मण प्रसाद को जख्मी कर दिया था।

2 जनवरी को चौक थाना क्षेत्र के पड़री कला गांव में बंदरों ने हमला कर पांच लोगों को घायल कर दिया था।

घने जंगलों के बीच रहना पसंद करते है तेंदुए
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के मैनेजर अरशद हुसैन ने कहा की तेंदुए खुले घास के मैदानों या आबादी वाले क्षेत्रों से बचते हुए घने जंगल वाले क्षेत्रों में रहना पसंद करते हैं। वे गर्म और ठंडी दोनों जलवायु में रह सकते हैं। तेंदुआ मांसाहारी जानवर है और वे ताजा मांस ही खाना पसंद करते हैं। ये इलाके के अनुसार विभिन्न प्रकार के जीवों का शिकार करते हैं। कुछ क्षेत्रों में उनके आहार में 80 फीसदी लोमड़ी,खरगोश को भोजन बनाते हैं। इसके अलावा वे कीड़े, पक्षी, साही, बबून और बंदर, हिरन जैसे जीवों को भी खाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed