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Maharajganj News: शहर से लेकर गांव तक बगैर लाइसेंस मेडिकल स्टोर का मकड़जाल
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फोटो
तीन दिन से ताबड़तोड़ हो रही कार्रवाई, फिर भी गुमटी में बिक रहीं दवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर से लेकर गांव तक बगैर लाइसेंसी मेडिकल स्टोर का मकड़जाल फैला हुआ है। कहीं-कहीं तो गुमटी व झोपड़ी में मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। तीन दिनों से ताबड़तोड़ हुई छापामारी में बगैर लाइसेंस की दुकानें संचालित होती हुई मिली हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर औषधि विभाग की टीम छापा मार रही है। जिले में करीब 1300 लाइसेंसी दवा की दुकानें हैं।
जिले में बिना लाइसेंस के दवा की दुकानों काे संचालित होने की बात नई नहीं है। ऐसा लंबे समय से हो रहा है। इन दिनों छापे की कार्रवाई में बिना लाइसेंस की दुकानों को संचालित होने की पुष्टि हो रही है। इन दिनों में अप्रशिक्षित लोग अपने हिसाब से दवा बेचते हैं। डॉक्टर का पर्चा भी ठीक ढंग से नहीं पढ़ पाते हैं। गांव में ज्यादा ऐसे मेडिकल स्टोर संचालक बीमारी का शर्तिया इलाज भी करते हैं। गड़बड़ इलाज का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। छोटी से बीमारी को गलत दवा देकर बढ़ा देते हैं। पनियरा व निचलौल क्षेत्र में ऐसी दुकानों की भरमार है। अनुमान है कि जिले में करीब 100 से अधिक अवैध दवा की दुकानें संचालित हो रही हैं।
पनियरा क्षेत्र के राजन बताते हैं कि क्षेत्र में तमाम स्थानों पर झोपड़ी में दवा की दुकानें हैं। जबकि नियम है कि दवा की दुकानों का पक्के मकान में होना चाहिए। इसके बावजूद इन दुकानों पर कार्रवाई इसलिए नहीं होती है कि विभाग के अधिकारियों की जेब गर्म करते हैं। मुसहर बस्ती लेदी टीन शेड में दुकान संचालित मिली। फोटो लेने के दौरान दुकान संचालक आक्रोशित हो गया, उसने कहा कि इससे कुछ होने वाला नहीं है। बीते दिनों घुघली, खनुआ क्षेत्र में पांच दुकानों को सील किया जा चुका है।
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सीमावर्ती क्षेत्र में करते हैं नशीली दवाओं का धंधा
नेपाल सीमा से लगे गांव में अवैध रूप से संचालित दवा की दुकानों पर नशीली दवाओं की बिक्री का धंधा खूब होता है। दुकान संचालक छोटी सी दुकान खोलकर मोटा पैसा कमाते हैं। देखने में दुकानें छोटी लगेंगी, लेकिन दवा कहीं और रखकर अपने धंधे को चमकाते हैं। नेपाल के युवा सरहद पार आसानी से आकर इन दुकानों से नशीली दवाओं का सेवन कर चले जाते हैं। पकड़े जाने का डर भी नहीं रहता है। नशे वाले एक कैपसूल की कीमत 20 से लेकर 50 रुपये तक वसूल की जाती है।
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दुकान पर बस नाम के फार्मासिस्ट
गैर लाइसेंसी दुकानों के अलावा जो लाइसेंसी दुकानें हैं, वहां कागज में फार्मासिस्ट का नाम चलता है। सूत्र बताते हैं कि प्रपत्रों को पूरा करने के लिए 60 से 70 हजार रुपये सालाना रकम देकर फार्मासिस्ट की डिग्री शामिल की जाती है। दुकानदार अपने अनुभव से दवा बेचते हैं, हकीकत में फार्मासिस्ट दुकान पर नहीं होता है। अधिकारी जानने के बाद भी इस पर ध्यान नहीं देते हैं।
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लाइसेंस के लिए यह होता जरूरी
दवा की दुकान का लाइसेंस लेने के लिए आधार, पैन, वोटर-आईडी, फोटो, हाई स्कूल का अंकपत्र, फार्मासिस्ट की डिग्री और अंकपत्र, ग्रीन कार्ड, दुकान का रैक काउंटर बोर्ड पर नाम लिखा फोटो पता सहित, बिजली का बिल, नक्शा, फ्रीज व कंप्यूटर का बिल, किरायानामा, खसरा, खतौनी आदि जरूरी होता है। दवा की दुकान का लाइसेंस लेने के लिए हर हाल में पक्का मकान होना चाहिए।
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चढावा के बगैर नहीं बनता लाइसेंस
सूत्र बताते हैं कि दवा की दुकानों का लाइसेंस लेने के लिए चढावा देना पड़ता है। शहर से लेकर गांव तक काम कराने वालों का नेटवर्क फैला हुआ है। सूत्रों पर यकिन करें तो सीधे काम कराने पर इतने नियम कानून बता दिए जाएंगे की लाइसेंस बन पाना संभव नहीं है। बिचौलियों से संपर्क करने पर काम जल्दी हो जाता है।
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फोटो
सीमावर्ती क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित चार मेडिकल स्टोर सीज
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। निचलौल थाना क्षेत्र के भारत नेपाल बॉर्डर की सीमा से सटे गांव शितलापुर खेसरहा में बुधवार को औषधीय निरीक्षक और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारा। इस दौरान टीम ने अवैध तरीके से संचालित चार मेडिकल स्टोरों को सीज कर दिया। बॉर्डर से सटे गांव में मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई से पूरे दिन हड़कंप मचा रहा।
औषधीय निरीक्षक शिवकुमार नायक ने कहा कि सहायक औषधीय आयुक्त गोरखपुर की ओर से एक टीम गठित की गई है। टीम में औषधीय निरीक्षक गोरखपुर जय सिंह, देवरिया के रुद्रेश तिवारी और कुशीनगर के दीपक पांडेय शामिल रहे। टीम के नायब तहसीलदार नवीन निश्चल त्रिपाठी और शितलापुर पुलिस के साथ बॉर्डर से सटे गांव शितलापुर खेसरहा गांव में अवैध तरीके से संचालित चार मेडिकल स्टोरों पर छापा मारा गया। जिस दौरान चारों दुकानों को सीज कर दिया गया। वहीं, चारों दुकानों से करीब एक लाख से अधिक रुपये की दवा को कब्जे में लेकर पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया है। जबकि कुछ दवाओं को जांच के लिए नमूने लिए गए है।
जिन्हें जांच के लिए राजकीय विशेषज्ञ प्रयोगशाला लखनऊ भेजा जाएगा। वहीं, मेडिकल स्टोर संचालित करने वाले मिथुन गौतम, अनमोल पाल, जयकरन पासवान, अफरोज अंसारी निवासी शितलापुर के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा।
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नियम के विपरीत दुकानें संचालित नहीं होने दी जाएंगी। छापा मार कार्रवाई की जा रही है। नियमों के अनुसार ही लाइसेंस जारी किए जाते हैं। छापा अभियान चलता रहेगा।
शिव कुमार नायक, औषधि निरीक्षक
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लाइसेंसी दुकानदार नियम का पालन करते हैं। थोक दुकानदार बिना लाइसेंस देखे दवा बिक्री नहीं करते हैं। नियम के अनुसार लाइसेंस बनवाकर ही दुकान संचालित करनी चाहिए।
अशोक चौरसिया, जिलाध्यक्ष, केमिस्टस एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन
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तीन दिन से ताबड़तोड़ हो रही कार्रवाई, फिर भी गुमटी में बिक रहीं दवाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर से लेकर गांव तक बगैर लाइसेंसी मेडिकल स्टोर का मकड़जाल फैला हुआ है। कहीं-कहीं तो गुमटी व झोपड़ी में मेडिकल स्टोर संचालित हो रहे हैं। तीन दिनों से ताबड़तोड़ हुई छापामारी में बगैर लाइसेंस की दुकानें संचालित होती हुई मिली हैं। जिला प्रशासन के निर्देश पर औषधि विभाग की टीम छापा मार रही है। जिले में करीब 1300 लाइसेंसी दवा की दुकानें हैं।
जिले में बिना लाइसेंस के दवा की दुकानों काे संचालित होने की बात नई नहीं है। ऐसा लंबे समय से हो रहा है। इन दिनों छापे की कार्रवाई में बिना लाइसेंस की दुकानों को संचालित होने की पुष्टि हो रही है। इन दिनों में अप्रशिक्षित लोग अपने हिसाब से दवा बेचते हैं। डॉक्टर का पर्चा भी ठीक ढंग से नहीं पढ़ पाते हैं। गांव में ज्यादा ऐसे मेडिकल स्टोर संचालक बीमारी का शर्तिया इलाज भी करते हैं। गड़बड़ इलाज का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। छोटी से बीमारी को गलत दवा देकर बढ़ा देते हैं। पनियरा व निचलौल क्षेत्र में ऐसी दुकानों की भरमार है। अनुमान है कि जिले में करीब 100 से अधिक अवैध दवा की दुकानें संचालित हो रही हैं।
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पनियरा क्षेत्र के राजन बताते हैं कि क्षेत्र में तमाम स्थानों पर झोपड़ी में दवा की दुकानें हैं। जबकि नियम है कि दवा की दुकानों का पक्के मकान में होना चाहिए। इसके बावजूद इन दुकानों पर कार्रवाई इसलिए नहीं होती है कि विभाग के अधिकारियों की जेब गर्म करते हैं। मुसहर बस्ती लेदी टीन शेड में दुकान संचालित मिली। फोटो लेने के दौरान दुकान संचालक आक्रोशित हो गया, उसने कहा कि इससे कुछ होने वाला नहीं है। बीते दिनों घुघली, खनुआ क्षेत्र में पांच दुकानों को सील किया जा चुका है।
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सीमावर्ती क्षेत्र में करते हैं नशीली दवाओं का धंधा
नेपाल सीमा से लगे गांव में अवैध रूप से संचालित दवा की दुकानों पर नशीली दवाओं की बिक्री का धंधा खूब होता है। दुकान संचालक छोटी सी दुकान खोलकर मोटा पैसा कमाते हैं। देखने में दुकानें छोटी लगेंगी, लेकिन दवा कहीं और रखकर अपने धंधे को चमकाते हैं। नेपाल के युवा सरहद पार आसानी से आकर इन दुकानों से नशीली दवाओं का सेवन कर चले जाते हैं। पकड़े जाने का डर भी नहीं रहता है। नशे वाले एक कैपसूल की कीमत 20 से लेकर 50 रुपये तक वसूल की जाती है।
दुकान पर बस नाम के फार्मासिस्ट
गैर लाइसेंसी दुकानों के अलावा जो लाइसेंसी दुकानें हैं, वहां कागज में फार्मासिस्ट का नाम चलता है। सूत्र बताते हैं कि प्रपत्रों को पूरा करने के लिए 60 से 70 हजार रुपये सालाना रकम देकर फार्मासिस्ट की डिग्री शामिल की जाती है। दुकानदार अपने अनुभव से दवा बेचते हैं, हकीकत में फार्मासिस्ट दुकान पर नहीं होता है। अधिकारी जानने के बाद भी इस पर ध्यान नहीं देते हैं।
लाइसेंस के लिए यह होता जरूरी
दवा की दुकान का लाइसेंस लेने के लिए आधार, पैन, वोटर-आईडी, फोटो, हाई स्कूल का अंकपत्र, फार्मासिस्ट की डिग्री और अंकपत्र, ग्रीन कार्ड, दुकान का रैक काउंटर बोर्ड पर नाम लिखा फोटो पता सहित, बिजली का बिल, नक्शा, फ्रीज व कंप्यूटर का बिल, किरायानामा, खसरा, खतौनी आदि जरूरी होता है। दवा की दुकान का लाइसेंस लेने के लिए हर हाल में पक्का मकान होना चाहिए।
चढावा के बगैर नहीं बनता लाइसेंस
सूत्र बताते हैं कि दवा की दुकानों का लाइसेंस लेने के लिए चढावा देना पड़ता है। शहर से लेकर गांव तक काम कराने वालों का नेटवर्क फैला हुआ है। सूत्रों पर यकिन करें तो सीधे काम कराने पर इतने नियम कानून बता दिए जाएंगे की लाइसेंस बन पाना संभव नहीं है। बिचौलियों से संपर्क करने पर काम जल्दी हो जाता है।
फोटो
सीमावर्ती क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित चार मेडिकल स्टोर सीज
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। निचलौल थाना क्षेत्र के भारत नेपाल बॉर्डर की सीमा से सटे गांव शितलापुर खेसरहा में बुधवार को औषधीय निरीक्षक और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापा मारा। इस दौरान टीम ने अवैध तरीके से संचालित चार मेडिकल स्टोरों को सीज कर दिया। बॉर्डर से सटे गांव में मेडिकल स्टोरों पर कार्रवाई से पूरे दिन हड़कंप मचा रहा।
औषधीय निरीक्षक शिवकुमार नायक ने कहा कि सहायक औषधीय आयुक्त गोरखपुर की ओर से एक टीम गठित की गई है। टीम में औषधीय निरीक्षक गोरखपुर जय सिंह, देवरिया के रुद्रेश तिवारी और कुशीनगर के दीपक पांडेय शामिल रहे। टीम के नायब तहसीलदार नवीन निश्चल त्रिपाठी और शितलापुर पुलिस के साथ बॉर्डर से सटे गांव शितलापुर खेसरहा गांव में अवैध तरीके से संचालित चार मेडिकल स्टोरों पर छापा मारा गया। जिस दौरान चारों दुकानों को सीज कर दिया गया। वहीं, चारों दुकानों से करीब एक लाख से अधिक रुपये की दवा को कब्जे में लेकर पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया है। जबकि कुछ दवाओं को जांच के लिए नमूने लिए गए है।
जिन्हें जांच के लिए राजकीय विशेषज्ञ प्रयोगशाला लखनऊ भेजा जाएगा। वहीं, मेडिकल स्टोर संचालित करने वाले मिथुन गौतम, अनमोल पाल, जयकरन पासवान, अफरोज अंसारी निवासी शितलापुर के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोर्ट में वाद दायर किया जाएगा।
नियम के विपरीत दुकानें संचालित नहीं होने दी जाएंगी। छापा मार कार्रवाई की जा रही है। नियमों के अनुसार ही लाइसेंस जारी किए जाते हैं। छापा अभियान चलता रहेगा।
शिव कुमार नायक, औषधि निरीक्षक
लाइसेंसी दुकानदार नियम का पालन करते हैं। थोक दुकानदार बिना लाइसेंस देखे दवा बिक्री नहीं करते हैं। नियम के अनुसार लाइसेंस बनवाकर ही दुकान संचालित करनी चाहिए।
अशोक चौरसिया, जिलाध्यक्ष, केमिस्टस एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन