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Maharajganj News: जानवरों की प्यास बुझाने के लिए जंगल में बनाई गईं पानी की टंकियां
Sun, 17 Mar 2024 11:53 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 17 Mar 2024 11:53 PM IST
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निचलौल वन रेंज के उत्तरी बीट में बनाई गई टंकियों में भरा पानी।
महराजगंज/निचलौल। गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। जंगली जानवरों को पानी के लिए इधर-उधर न भटकना पड़े इसके लिए वन विभाग ने जंगल में ही चार पानी की टंकियां बनवा दी है। उसमें पानी भी भर दी गई हैं। टंकियों में कोई कमी न हो इसके लिए बोर भी कराया गया है।
जानकारी के मुताबिक, गर्मी शुरू होते ही जंगलों से होकर बहने वाली नदी नाले सुख जाते हैं। ऐसे में जंगलों के अंदर पानी की किल्लत हो जाती है। उसके बाद प्यास बुझाने के लिए वन्य जीव आबादी की ओर बढ़ने लगते हैं, जिससे गांव वालों के साथ-साथ वन्य जीवों की भी जान जोखिम में पड़ जाती है। इसलिए जंगलों में जानवरों के लिए पानी की कमी न हो इसके लिए टंकियां बनाकर पानी भरा जा रहा है।
निचलौल वन रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी सुनील राव ने कहा कि वन रेंज का जंगल 7435.10 हेक्टेयर भूमि में फैला है। इसमें आठ बीट बैठवलीया, गंडक, कलनही, डोमा, उत्तरी, दक्षिणी, सिसवा और चरगहा है। यह जंगल वन संपदाओं से भरा है। इसमें तेंदुआ, हिरन, सूअर, बंदर, नीलगाय सहित अन्य जानवर मौजूद हैं। इन जानवरों को गर्मी में प्यास बुझाने के लिए उत्तरी और दक्षिणी बीट के जंगलों में चार लाख रुपये की लागत से चार जगहों पर चार मीटर चौड़ी और 10 मीटर लंबी के साथ ही एक मीटर गहराई की टंकियां बनाई गई हैं। इन टंकियों में निरंतर पानी भरने के लिए बोरिंग भी कराई गई है। इन दिनों टंकियां पानी से लबालब हैं, जबकि कई जगहों पर वन्य जीवों को सुरक्षित रखने के लिए कार्य चल रहा है।
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जानकारी के मुताबिक, गर्मी शुरू होते ही जंगलों से होकर बहने वाली नदी नाले सुख जाते हैं। ऐसे में जंगलों के अंदर पानी की किल्लत हो जाती है। उसके बाद प्यास बुझाने के लिए वन्य जीव आबादी की ओर बढ़ने लगते हैं, जिससे गांव वालों के साथ-साथ वन्य जीवों की भी जान जोखिम में पड़ जाती है। इसलिए जंगलों में जानवरों के लिए पानी की कमी न हो इसके लिए टंकियां बनाकर पानी भरा जा रहा है।
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निचलौल वन रेंज के क्षेत्रीय वनाधिकारी सुनील राव ने कहा कि वन रेंज का जंगल 7435.10 हेक्टेयर भूमि में फैला है। इसमें आठ बीट बैठवलीया, गंडक, कलनही, डोमा, उत्तरी, दक्षिणी, सिसवा और चरगहा है। यह जंगल वन संपदाओं से भरा है। इसमें तेंदुआ, हिरन, सूअर, बंदर, नीलगाय सहित अन्य जानवर मौजूद हैं। इन जानवरों को गर्मी में प्यास बुझाने के लिए उत्तरी और दक्षिणी बीट के जंगलों में चार लाख रुपये की लागत से चार जगहों पर चार मीटर चौड़ी और 10 मीटर लंबी के साथ ही एक मीटर गहराई की टंकियां बनाई गई हैं। इन टंकियों में निरंतर पानी भरने के लिए बोरिंग भी कराई गई है। इन दिनों टंकियां पानी से लबालब हैं, जबकि कई जगहों पर वन्य जीवों को सुरक्षित रखने के लिए कार्य चल रहा है।
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