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तीन तलाक बिल पास होने से अब मुस्लिम महिलाओं पर अत्याचार होगा कम
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अब मुस्लिम महिलाओं पर थमेगा अत्याचार
महराजगंज। राज्य सभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद मुस्लिम समाज की महिलाओं ने जहां खुशी जताई। वहीं, समाज के अन्य लोगों की इस मसले पर प्रतिक्रिया मिलीजुली रही। वह इस मसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने से बचते रहे। तीन तलाक पीड़िता को इस मामले में अब कानून बनने से राहत की उम्मीद दिखी। पीड़ित ने इसके लिए सरकार को धन्यवाद दिया। हालांकि मुस्लिम समाज के अन्य लोगों की नजर में इस मामले में कानून बनने से कोई खास फायदा होते नहीं दिखा। इस दौरान लोगों ने अपने विचारों को अमर उजाला से साझा किया।
- महिलाओं को समाज में सम्मान से जीने हक है। फोन पर तलाक देकर जिंदगी तबाह करने का हक किसी को नहीं है। यह बिल तो पहले ही पास हो जाने चाहिए थे। इस मामले में अब कानून बनने से पीड़ित महिलाओं को इससे इंसाफ की राह आसान होगी। साथ ही उनपर अत्याचार भी थमेगा।
गंगा प्रजापति, अधिवक्ता
- अब इंसाफ मिलने में परेशानी नहीं होगी। तीन तलाक बिल पास होने से समाज की महिलाओं को भटकना नहीं पडे़गा। सख्त कानून का डर तो सभी को होता है। ऐसे में यह बिल पास होने के बाद मुस्लिम समाज के लिए वरदात साबित होगा।
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हुस्नआरा, सेवानिवृत अध्यापिका
- दंड का प्रविधान कर जेल में डालने से न्याय नहीं होगा। इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। जबरन किसी समाज पर कानून का भय थोपना ठीक नहीं है।
वाहिद, एडवोकेट
- यह बेहद अच्छा कदम है। काश यह बिल पहले पास हो गया होता तो आज मेरी गृहस्थी बच गई होती। अब कसूरवार को सजा मिलने में देरी नहीं होगा।
नाजमा खातून, तीन तलाक पीड़िता, सिंदुरिया निवासी
- हुकूमत के तीन तलाक बिल पास कर देने से कुछ नहीं होगा। कुरान और हदीस का जो आदेश है वह हमेशा रहेगा, उसे कोई बदल नहीं सकता है।
हाजी मौलाना हुसैन निजामी
- कुरान का फरमान सर्वोपरि है। कानून बनाकर समाज को डराने की कोशिश की जा रही है। इससे कुछ खास असर नहीं होगा।
हाजी इद्दु कुरैशी
- अब किसी का घर उजड़ने से बचेगा। कानून के डर से अत्याचार कम होंगे। राज्य सभा में तीन तलाक बिल पास होने पर पीड़िता ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि हम महिलाओं के लिए यह कानून कवच की तरह होगा।
- रेशमा खातून, तीन तलाक पीडिता
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महराजगंज। राज्य सभा में तीन तलाक बिल पास होने के बाद मुस्लिम समाज की महिलाओं ने जहां खुशी जताई। वहीं, समाज के अन्य लोगों की इस मसले पर प्रतिक्रिया मिलीजुली रही। वह इस मसले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने से बचते रहे। तीन तलाक पीड़िता को इस मामले में अब कानून बनने से राहत की उम्मीद दिखी। पीड़ित ने इसके लिए सरकार को धन्यवाद दिया। हालांकि मुस्लिम समाज के अन्य लोगों की नजर में इस मामले में कानून बनने से कोई खास फायदा होते नहीं दिखा। इस दौरान लोगों ने अपने विचारों को अमर उजाला से साझा किया।
- महिलाओं को समाज में सम्मान से जीने हक है। फोन पर तलाक देकर जिंदगी तबाह करने का हक किसी को नहीं है। यह बिल तो पहले ही पास हो जाने चाहिए थे। इस मामले में अब कानून बनने से पीड़ित महिलाओं को इससे इंसाफ की राह आसान होगी। साथ ही उनपर अत्याचार भी थमेगा।
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गंगा प्रजापति, अधिवक्ता
- अब इंसाफ मिलने में परेशानी नहीं होगी। तीन तलाक बिल पास होने से समाज की महिलाओं को भटकना नहीं पडे़गा। सख्त कानून का डर तो सभी को होता है। ऐसे में यह बिल पास होने के बाद मुस्लिम समाज के लिए वरदात साबित होगा।
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हुस्नआरा, सेवानिवृत अध्यापिका
- दंड का प्रविधान कर जेल में डालने से न्याय नहीं होगा। इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। जबरन किसी समाज पर कानून का भय थोपना ठीक नहीं है।
वाहिद, एडवोकेट
- यह बेहद अच्छा कदम है। काश यह बिल पहले पास हो गया होता तो आज मेरी गृहस्थी बच गई होती। अब कसूरवार को सजा मिलने में देरी नहीं होगा।
नाजमा खातून, तीन तलाक पीड़िता, सिंदुरिया निवासी
- हुकूमत के तीन तलाक बिल पास कर देने से कुछ नहीं होगा। कुरान और हदीस का जो आदेश है वह हमेशा रहेगा, उसे कोई बदल नहीं सकता है।
हाजी मौलाना हुसैन निजामी
- कुरान का फरमान सर्वोपरि है। कानून बनाकर समाज को डराने की कोशिश की जा रही है। इससे कुछ खास असर नहीं होगा।
हाजी इद्दु कुरैशी
- अब किसी का घर उजड़ने से बचेगा। कानून के डर से अत्याचार कम होंगे। राज्य सभा में तीन तलाक बिल पास होने पर पीड़िता ने खुशी जताई। उन्होंने कहा कि हम महिलाओं के लिए यह कानून कवच की तरह होगा।
- रेशमा खातून, तीन तलाक पीडिता