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Maharajganj News: सता रहा गले का संक्रमण, ओपीडी में 17 मरीज मिले

Fri, 05 Dec 2025 02:18 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2025 02:18 AM IST
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Throat infection continues to plague the OPD, with 17 patients found
जिला अस्पताल की ओपीडी में स्ट्रेप थ्रोट रोग के 24 मरीज पहुंचे, कुल 767 का हुआ उपचार
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एक-दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है थ्रोट रोग
महराजगंज। गले की खराश को नजरंदाज करना 17 रोगियों को भारी पड़ गया। बृहस्पतिवार को यह जब उपचार के लिए ओपीडी पहुंचे तो जांच रिपोर्ट में रोग बढ़ा मिला। चिकित्सकों ने जांच रिपोर्ट के आधार पर रोगियों को दवा व एहतियात का परामर्श दिया। साथ-साथ स्ट्रेप थ्रोट को हल्के में न लेने की चेतावनी दी।
बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में 767 रोगियों का उपचार हुआ। इस दौरान सर्वाधिक रोगी फ्लू, कोल्ड डायरिया और स्किन इन्फेक्शन के रहे। 24 रोगी स्ट्रेप थ्रोट की समस्या लेकर पहुंचे इनमें से 17 रोगियों में समस्या बढ़ी पाई गई। डॉ. अनिरुद्ध ने स्ट्रेप थ्रोट की जांच रिपोर्ट देखकर दवा का परामर्श दिया। उन्होंने बताया कि स्ट्रेप थ्रोट बैक्टीरिया जनु रोग है जो गले की हल्की खराश से शुरू होता है। अगर त्वरित ध्यान देकर उपचार शुरू हो तो यह नियंत्रित होगा लेकिन इसे हल्के में लेकर लोग जब बीमारी बढ़ जाती तब पहुंचते हैं। यह गले में होने वाला एक तरह का संक्रमण है जो ग्रुप ए स्ट्रेप्टोकोकस (ग्रुप ए स्ट्रेप) बैक्टीरिया के कारण होता है। समस्या पर त्वरित ध्यान न देने पर स्ट्रेप थ्रोट के कारण गले में गंभीर सूजन हो जाती है। रैपिड स्ट्रेप टेस्ट से इसकी गंभीरता के बारे में जानकारी मिलती है। इसके कारण गले में सूजन, निगलने में असुविधा व बुखार तक हो सकता है। यह बीमारी एक-दूसरे के संपर्क में आने से फैलती है। इसलिए सर्वाधिक समस्या समूह में रहने वाले लोगों को होती है।
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सर्दी-खांसी व स्ट्रेप थ्रोट दोनों अलग रोग
एमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि सर्दी-खांसी व स्ट्रेप थ्रोट दो अलग-अलग बीमारी हैं। सर्दी-खांसी का कारण वायरल हो सकता है। जबकि स्ट्रेप थ्रोट बैक्टीरियल है। इसका प्रभाव त्वचा पर भी उभर सकता है। इसलिए बिना जांच कराए इसका उपचार नहीं शुरू करना चाहिए।
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ऐसे करें बचाव-
- हाथ की सफाई पर विशेष ध्यान दें। हर 30 मिनट पर पानी व साबुन से हाथ साफ करें अथवा सेनेटाइजर का उपयोग करें।
- रोगी टिशू पेपर में खांसें या छींकें। इस्तेमाल किए हुए टिशू पेपर को कूड़ेदान में फेंक दें।
- बीमार के कप, बर्तन और कपड़े अलग साफ करने की व्यवस्था करें।
- साधारणतः 10 दिन एंटीबायोटिक दवा से यह सही हो जाता है। ऐसे में एक सप्ताह एकांतवास करना फायदेमंद होगा।
- गर्म तरल पेय का सेवन करें। नर्म खाद्य का उपयोग करें।
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