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Maharajganj News: बुटवल में डोजर नीति के खिलाफ हजारों लोगों का प्रदर्शन
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सरकार पर गरीबों को उजाड़ने का आरोप
सोनौली। नेपाल में डोजर नीति के विरोध में सोमवार को बुटवल की सड़कों पर हजारों लोग उतर आए। वर्षों से बसे भूमिहीन और गरीब परिवारों को बिना वैकल्पिक पुनर्वास व्यवस्था हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
विरोध मार्च राजमार्ग चौराहा से शुरू होकर मिलनचौक, बस अड्डा, पुष्पलाल पार्क और अस्पताल मार्ग होते हुए यातायात चौराहा पहुंचा, जहां एक सभा का आयोजन किया गया। प्रदर्शन में तराई क्षेत्र के 22 जिलों से आए भूमिहीन परिवारों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार गरीबों को बसाने के बजाय उन्हें उजाड़ने की नीति अपना रही है। उनका कहना था कि वर्षों से बसे लोगों के घरों को बिना पुनर्वास व्यवस्था के बुलडोजर से हटाना अमानवीय और तानाशाहीपूर्ण कदम है।
भीषण गर्मी के बीच छाते लेकर सड़कों पर उतरे लोगों ने बुलडोजर आतंक बंद करो, भूमिहीन होना मजबूरी है, अपराध नहीं, गरीब को जीने दो, बुलडोजर नहीं समाधान दो और सरकार इस्तीफा दो जैसे नारे लगाए। संघर्ष समिति के संयोजक खगेन्द्र पौडेल ने कहा कि सरकार गरीबों की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें जबरन बेघर करने पर आमादा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह अभियान नहीं रोका गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सुशासन और भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे करने वाली सरकार अब गरीबों के आशियाने उजाड़ने में लगी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भूमिहीनों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया तो आंदोलन राजधानी तक पहुंच सकता है।
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प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि वर्षों से बसे भूमिहीन परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास और व्यवस्थित आवास योजना लागू की जाए तथा जबरन बेदखली की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।
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सोनौली। नेपाल में डोजर नीति के विरोध में सोमवार को बुटवल की सड़कों पर हजारों लोग उतर आए। वर्षों से बसे भूमिहीन और गरीब परिवारों को बिना वैकल्पिक पुनर्वास व्यवस्था हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
विरोध मार्च राजमार्ग चौराहा से शुरू होकर मिलनचौक, बस अड्डा, पुष्पलाल पार्क और अस्पताल मार्ग होते हुए यातायात चौराहा पहुंचा, जहां एक सभा का आयोजन किया गया। प्रदर्शन में तराई क्षेत्र के 22 जिलों से आए भूमिहीन परिवारों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार गरीबों को बसाने के बजाय उन्हें उजाड़ने की नीति अपना रही है। उनका कहना था कि वर्षों से बसे लोगों के घरों को बिना पुनर्वास व्यवस्था के बुलडोजर से हटाना अमानवीय और तानाशाहीपूर्ण कदम है।
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भीषण गर्मी के बीच छाते लेकर सड़कों पर उतरे लोगों ने बुलडोजर आतंक बंद करो, भूमिहीन होना मजबूरी है, अपराध नहीं, गरीब को जीने दो, बुलडोजर नहीं समाधान दो और सरकार इस्तीफा दो जैसे नारे लगाए। संघर्ष समिति के संयोजक खगेन्द्र पौडेल ने कहा कि सरकार गरीबों की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें जबरन बेघर करने पर आमादा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह अभियान नहीं रोका गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सुशासन और भ्रष्टाचार खत्म करने के दावे करने वाली सरकार अब गरीबों के आशियाने उजाड़ने में लगी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भूमिहीनों के घरों पर बुलडोजर चलाया गया तो आंदोलन राजधानी तक पहुंच सकता है।
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प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि वर्षों से बसे भूमिहीन परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास और व्यवस्थित आवास योजना लागू की जाए तथा जबरन बेदखली की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए।