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Maharajganj News: किस्त के दबाव ने बना दिया बीमार पीछा छूटते ही समूह से कर ली ताैबा
Sat, 29 Mar 2025 12:50 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 29 Mar 2025 12:50 AM IST
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लुठहवा टोला घोड़हवा गांव में बैठी महिलाएं।
महराजगंज। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों का जिले में मजबूत नेटवर्क है। गांव-गांव समूह में महिलाओं को लोन उनकी ओर से दिया गया है। वसूली करने वाले एजेंट के दबाव से तनावग्रस्त महिलाओं ने समूह लोन से तौबा कर ली है।
कर्ज जमा करने के बाद एजेंटों की खरी खोटी सुनाने से मुक्ति मिल गई है। अब तमाम ऐसी महिलाएं हैं जो माइक्रोफाइनेंस कंपनी से कर्ज नहीं लेना चाह रही हैं। मिठौरा ब्लॉक के टीकर गांव में कुछ महिलाएं मिलीं जो अब माइक्रो फाइनेंस से कर्ज लेना नहीं चाह रही हैं। गांव की सुभावती ने बताया कि करीब आठ माह पहले तक परेशान थी। वसूली करने वाले एजेंट घर आते थे तो खरीखोटी सुनाते थे।
उनकी कड़वी बातें ठीक नहीं लगती थीं। तनाव के कारण काम में मन नहीं लगता था। दो माइक्रो फाइनेंस कंपनी से दो लाख रुपये कर्ज लिया गया था। एजेंट बहुत परेशान करते थे। 20 डिस्मिल खेत बेचकर रकम चुका दी। अब तो भविष्य में ऐसी कंपनी से कर्ज नहीं लूंगी। परसौनी गांव की सरस्वती तो माइक्रोफाइनेंस कंपनी से कर्ज लेने की बात पर नाराज हो जाती हैं।
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उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियों से कर्ज नहीं लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि सात माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से साढ़े तीन लाख रुपये कर्ज ली। कंपनी के वसूली एजेंट के दबाव से बीपी की बीमारी हो गई थी। मन हमेशा अशांत रहता था। कर्ज ली थी, इस वजह से कहीं शिकायत भी नहीं की। रिश्तेदारों से उधार लेकर किसी तरफ कर्ज जमा किया। तब जाकर सुकून मिला। अब मैं कभी भी माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज नहीं लूंगी। पड़री कला गांव की आयशा ने बताया डेढ़ वर्ष पहले एक लाख रुपये दो माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज ली थी। उसी रकम से बेटी की शादी की। किश्त नहीं भर पाने के कारण एजेंट घर पर आकर गाली गलौज करते थे। बेइज्जती महसूस होती थी। घर में पाली हुई बकरियों को बेचकर किसी तरह कर्ज जमा कर दी। सेखुई गांव की तारा देवी ने बताया कि बीमार पति के इलाज कराने के लिए माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 50 हजार रुपये कर्ज ली थी।
आधा रकम जमा करने के बाद किश्त जमा नहीं हुई। एजेंट घर आकर घर खेत बेचने की धमकी देते थे। घर में रखे अनाज बेचकर और उधार लेकर कर्ज जमा की। तब जाकर राहत मिली। अब तो कोई कर्ज लेने की बात करता है तो उसे मना कर देती हूं।
बीमार होने पर कंपनी से कर्ज लेकर इलाज कराई : रीता देवी कहने लगीं की वर्तमान में तीन किस्त जमा करनी है। बेटी की शादी के दौरान कर्ज लेना पड़ा था। इसी तरह से शिबुन ने भी समस्याओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बीमार होने पर कंपनी से कर्ज लेकर इलाज कराई। किस्त जमा नहीं हो पा रही है।
पति को दिल्ली काम करने जाना पड़ा। अब किसी तरह से किस्त जमा हो जा रही है। सोनिया ने बताया कि चार किस्त में रकम जमा कर किनारा कस लूंगी।
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कर्ज जमा करने के बाद एजेंटों की खरी खोटी सुनाने से मुक्ति मिल गई है। अब तमाम ऐसी महिलाएं हैं जो माइक्रोफाइनेंस कंपनी से कर्ज नहीं लेना चाह रही हैं। मिठौरा ब्लॉक के टीकर गांव में कुछ महिलाएं मिलीं जो अब माइक्रो फाइनेंस से कर्ज लेना नहीं चाह रही हैं। गांव की सुभावती ने बताया कि करीब आठ माह पहले तक परेशान थी। वसूली करने वाले एजेंट घर आते थे तो खरीखोटी सुनाते थे।
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उनकी कड़वी बातें ठीक नहीं लगती थीं। तनाव के कारण काम में मन नहीं लगता था। दो माइक्रो फाइनेंस कंपनी से दो लाख रुपये कर्ज लिया गया था। एजेंट बहुत परेशान करते थे। 20 डिस्मिल खेत बेचकर रकम चुका दी। अब तो भविष्य में ऐसी कंपनी से कर्ज नहीं लूंगी। परसौनी गांव की सरस्वती तो माइक्रोफाइनेंस कंपनी से कर्ज लेने की बात पर नाराज हो जाती हैं।
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उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियों से कर्ज नहीं लेना चाहिए। उन्होंने बताया कि सात माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से साढ़े तीन लाख रुपये कर्ज ली। कंपनी के वसूली एजेंट के दबाव से बीपी की बीमारी हो गई थी। मन हमेशा अशांत रहता था। कर्ज ली थी, इस वजह से कहीं शिकायत भी नहीं की। रिश्तेदारों से उधार लेकर किसी तरफ कर्ज जमा किया। तब जाकर सुकून मिला। अब मैं कभी भी माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज नहीं लूंगी। पड़री कला गांव की आयशा ने बताया डेढ़ वर्ष पहले एक लाख रुपये दो माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज ली थी। उसी रकम से बेटी की शादी की। किश्त नहीं भर पाने के कारण एजेंट घर पर आकर गाली गलौज करते थे। बेइज्जती महसूस होती थी। घर में पाली हुई बकरियों को बेचकर किसी तरह कर्ज जमा कर दी। सेखुई गांव की तारा देवी ने बताया कि बीमार पति के इलाज कराने के लिए माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 50 हजार रुपये कर्ज ली थी।
आधा रकम जमा करने के बाद किश्त जमा नहीं हुई। एजेंट घर आकर घर खेत बेचने की धमकी देते थे। घर में रखे अनाज बेचकर और उधार लेकर कर्ज जमा की। तब जाकर राहत मिली। अब तो कोई कर्ज लेने की बात करता है तो उसे मना कर देती हूं।
बीमार होने पर कंपनी से कर्ज लेकर इलाज कराई : रीता देवी कहने लगीं की वर्तमान में तीन किस्त जमा करनी है। बेटी की शादी के दौरान कर्ज लेना पड़ा था। इसी तरह से शिबुन ने भी समस्याओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बीमार होने पर कंपनी से कर्ज लेकर इलाज कराई। किस्त जमा नहीं हो पा रही है।
पति को दिल्ली काम करने जाना पड़ा। अब किसी तरह से किस्त जमा हो जा रही है। सोनिया ने बताया कि चार किस्त में रकम जमा कर किनारा कस लूंगी।