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Maharajganj News: जमीन के दलालों का फैला जाल... फंसे तो न मिलेगी जमीन न बनेगा आशियाना

Mon, 16 Sep 2024 03:24 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Mon, 16 Sep 2024 03:24 AM IST
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The network of land brokers is spread... If you get trapped, you will not get land or house.
महराजगंज। शहर में जमीन के दलालों का जाल फैला हुआ है। उनके चक्कर में फंसकर लोग अपनी गाढ़ी कमाई गवां रहे हैं। बाद में उन्हें न तो जमीन मिल रही है और न ही रुपये मिल रहे हैं। दलालों का पूरा नेटवर्क इस तरह से काम करता है कि सीधे साधे ग्राहक समझ नहीं पाते हैं। बीते दिन दलालों ने जमीन दिखाकर रकम हजम कर लिया।
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13 सितंबर की बात करें तो शहर से सटे पनेवा पनेई गांव के शमशेर आलम से 1.10 लाख रुपये लेकर जमीन बैनामा नहीं किया गया। मामले में कोतवाली पुलिस ने दो लोगों पर केस दर्ज किया है। शमशेर दिव्यांग भी हैं। शमशेर के मुताबिक 30 हजार रुपये प्रति डिस्मिल की दर से जमीन देने के नाम पर 1,10,000 रुपये दिए थे। शुरुआत में मामला जेल चौकी पर पहुंचा। आरोपियों के साथ समझौता भी हुआ था। जमालुद्दीन ने एक सुलहनामा जेल चौकी पर लिखकर दिया कि मैं शमशेर आलम का 1.10 लाख रुपये 15 सितंबर को 2024 दे दूंगा। समय बीतने के बाद जमालुद्दीन ने रकम नहीं दी।
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सुग्रीव ने इस मामले में हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों में विवाद फैलाने की कोशिश की। दोनों मिलकर कानूनी प्रकिया में फंसाने की कोशिश कर रहे हैं। सदर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार राय ने बताया कि आरोपी जलालुद्दीन और सुग्रीव के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। इसी तरह से अन्य मामलों में भी जमीन दिखाकर रकम हड़प लिया जाता है।
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छह माह पहले जमीन दिलाने के नाम हड़प लिए 40 लाख

छह माह पहले मार्च में बृजमनगंज क्षेत्र के हाताबेला हरैया गांव निवासी दंपती से जालसाजों ने जमीन दिलाने के नाम पर 40 लाख रुपये ठग लिए थे। न्यायालय के आदेश पर पुलिस ने एक महिला समेत चार आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था। हाताबेला हरैया निवासी जमाल अहमद चौधरी के अनुसार, मार्च 2024 में कुछ लोग उनके पास आए और गांव में ही करीब 1.0255 हेक्टेयर जमीन (अलग-अलग गाटा संख्या) बेचने की बात कही। जमीन की कीमत 40 लाख तय हुई। जमाल के अनुसार, उन्होंने 13 मार्च को डेढ़ लाख रुपये, 15 मार्च को 11.50 लाख, 19 मार्च को तीन लाख व 21 मार्च को चार लाख रुपये का भुगतान उनके बताए खाते में कर दिया। पत्नी आयेशा जमाल अहमद चौधरी ने भी 12 मार्च को डेढ़ लाख, 14 मार्च को 50 हजार, 18 मार्च को 15 लाख तथा 21 मार्च को तीन लाख रुपये का भुगतान आरोपियों के बताए खाते में कर दिया। बैनामा करने के लिए 31 मार्च को फरेंदा तहसील पहुंचे तो बीच में विवाद हो गया। इसके बाद जमीन बैनामा नहीं हुई।

जमीन खरीदने से पहले इन बिंदुओं पर दें ध्यान
-किसी जमीन को खरीदने से पहले उसके खसरा-खतौनी की जांच कराएं।
-जमीन का 12 साल का रिकार्ड जरूर चेक करा लें। जमीन कहां पर है, उसका भू-उपयोग क्या है, इसके बारे में भी जानकारी लें।
-कई बार कृषि जमीन का उपयोग बदलकर गैर कृषि कर दिया जाता है। जो जमीन आप ले रहे हैं व्यावसायिक और इंडस्ट्रीयल जोन में नहीं होनी चाहिए। नहीं तो रिहायशी मकान बनवाने में अवरोध पैदा होगा।


आवेदन करके जमीन का कराया जाता है मुआयना
अधिवक्ता दिग्विजय नाथ दुबे ने बताया कि जमीन खरीदने से पहले पूरी छानबीन जरूरी है। तहसील में आवेदन करके जमीन का मुआयना कराया जाता है। इससे पता चल जाता है कि भूमि किसके-किसके नाम रही है इसका 12 साल का रिकाॅर्ड निकल जाता है। खतौनी का मुआयना कराने के लिए सरकारी शुल्क 1250 रुपये जमा होता है। भू-राजस्व विभाग के रिकाॅर्ड में दस्तावेज मौजूद रहते हैं। खसरा-खतौनी का बस्ता बनाकर रखा जाता है। 12 साल के रिकार्ड के लिए 120 रुपये की रसीद कटती है। फोटो काॅपी सहित अन्य खर्चों को मिलाकर करीब ढाई से तीन हजार रुपये खर्च होता है। इससे पता चल जाता है कि भूमि व्यावसायिक है या बंधक रखी गई है। जानकारी होने से मोटी रकम डूबने से बच जाती है।
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