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Maharajganj News: सोशल मीडिया और रील की आदत लोगों को बना रही मानसिक रोगी
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युवाओं व महिलाओं में चिड़चिड़ापन और गुस्से की शिकायत, बच्चे भी आ रहे प्रभाव में
महराजगंज। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर रील देखने और बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति का असर अब लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। मनोरोग विभाग के चिकित्सकों के अनुसार, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग इन समस्याओं का एक प्रमुख कारण है।
सोमवार को जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग में 13 नए मरीज मानसिक परेशानी से संबंधित लक्षणों के साथ पहुंचे। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभांबुज ने बताया कि कई मामलों में मरीज की समस्याओं का संबंध लंबे समय तक मोबाइल फोन पर रील देखने से जुड़ा पाया गया है। विशेषकर किशोरों और युवाओं में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से उनमें चिड़चिड़ापन, जल्दी गुस्सा आना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं।
डॉ. शुभांबुज के अनुसार, बच्चों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। अक्सर बच्चे के रोने पर अभिभावक उन्हें मोबाइल फोन थमा देते हैं, जिससे धीरे-धीरे स्क्रीन की आदत बन जाती है। वहीं कुछ महिलाओं में भी सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने के कारण तनाव, सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
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चिकित्सकों का कहना है कि सोशल मीडिया का सीमित और संतुलित उपयोग जरूरी है। जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में दवा परामर्श के साथ-साथ योग, ध्यान और नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी जा रही है।
ऐसे करें बचाव
-स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित रखें।
-बच्चों को मोबाइल और टीवी स्क्रीन से यथासंभव दूर रखें।
-अभिभावक और महिलाएं खुद भी स्क्रीन उपयोग में संतुलन बनाए रखें।
- युवाओं से संवाद बनाए रखें और उन्हें पढ़ने-लिखने व रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।-योग और ध्यान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
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महराजगंज। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर रील देखने और बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति का असर अब लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों में चिड़चिड़ापन, गुस्सा और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। मनोरोग विभाग के चिकित्सकों के अनुसार, मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग इन समस्याओं का एक प्रमुख कारण है।
सोमवार को जिला अस्पताल के मनोरोग विभाग में 13 नए मरीज मानसिक परेशानी से संबंधित लक्षणों के साथ पहुंचे। मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. शुभांबुज ने बताया कि कई मामलों में मरीज की समस्याओं का संबंध लंबे समय तक मोबाइल फोन पर रील देखने से जुड़ा पाया गया है। विशेषकर किशोरों और युवाओं में यह समस्या अधिक देखी जा रही है। लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से उनमें चिड़चिड़ापन, जल्दी गुस्सा आना और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई जैसी शिकायतें बढ़ रही हैं।
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डॉ. शुभांबुज के अनुसार, बच्चों में भी इसका प्रभाव देखने को मिल रहा है। अक्सर बच्चे के रोने पर अभिभावक उन्हें मोबाइल फोन थमा देते हैं, जिससे धीरे-धीरे स्क्रीन की आदत बन जाती है। वहीं कुछ महिलाओं में भी सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने के कारण तनाव, सिरदर्द और माइग्रेन जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
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चिकित्सकों का कहना है कि सोशल मीडिया का सीमित और संतुलित उपयोग जरूरी है। जरूरत से ज्यादा स्क्रीन टाइम मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में दवा परामर्श के साथ-साथ योग, ध्यान और नियमित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी जा रही है।
ऐसे करें बचाव
-स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के उपयोग को सीमित रखें।
-बच्चों को मोबाइल और टीवी स्क्रीन से यथासंभव दूर रखें।
-अभिभावक और महिलाएं खुद भी स्क्रीन उपयोग में संतुलन बनाए रखें।
- युवाओं से संवाद बनाए रखें और उन्हें पढ़ने-लिखने व रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।-योग और ध्यान को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।