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Maharajganj News: नारायणी की बाढ़ में सोहगीबरवा के वन्यजीव कहां गए, वन विभाग को जानकारी नहीं
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शिवपुर रेंज में 10 फीट से अधिक रहा पानी का बहाव, बाढ़ के कारण सोहगीबरवा सहित तीन ग्राम सभाओं की आबादी प्रभावित
निचलौल। नारायणी नदी के उफान और मूसलाधार बारिश से सोहगीबरवा का दियारा क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया। इस बाढ़ से जनपद के सोहगीबरवा समेत तीन ग्राम सभाओं और कुशीनगर जिले की चार ग्राम सभाओं में करीब 50 हजार की आबादी प्रभावित हुई। सबसे बड़ी चिंता सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के शिवपुर रेंज में मौजूद जंगली जानवरों को लेकर है जिनकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है।
तीन तरफ जंगल और एक तरफ नदी से घिरे इन गांवों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। शिवपुर रेंज में बाढ़ का पानी करीब 10 फीट से अधिक ऊंचाई तक बहता दिखाई दिया था। पानी उतरने के बाद जंगल में तबाही का मंजर स्थिति की भयावहता दर्शाता है। शिवपुर रेंज में बड़ी संख्या में जंगली जानवरों की मौजूदगी मानी जाती है। इसके अलावा वाल्मीकिनगर वन्यजीव अभयारण्य और नेपाल के चितवन क्षेत्र से भी वन्यजीवों का आवागमन इस क्षेत्र में होता रहता है।
ऐसे में बाढ़ के दौरान ये वन्यजीव कहां गए, कितने सुरक्षित हैं और कितने प्रभावित हुए, यह अभी स्पष्ट नहीं है। बाढ़ के बाद क्षेत्र में मवेशियों के मरने की संख्या का आकलन विभिन्न विभागों द्वारा किया जा रहा है, लेकिन वन्यजीवों के नुकसान का कोई स्पष्ट आंकड़ा अब तक सामने नहीं आया है।
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वन्यजीवों की सुरक्षा बड़ी चुनौती
वन्यजीवों को देश की प्राकृतिक धरोहर माना जाता है। ऐसे में उनके लापता होने, बह जाने या मौत होने की स्थिति का पता लगाना वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है। विभाग को अभी तक इस संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। यह स्थिति वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों पर सवाल उठाती है।
निचलौल रेंज के साथ शिवपुर रेंज का अतिरिक्त चार्ज देख रहे रेंजर सुनील कुमार राव ने बताया कि बाढ़ का पानी बढ़ने पर जंगली जानवर ऊंचे स्थानों की ओर चले गए होंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी वन्यजीव की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। विभाग की ओर से इसका आकलन कराया जाएगा। आकलन के बाद ही वन्यजीवों के नुकसान की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
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निचलौल। नारायणी नदी के उफान और मूसलाधार बारिश से सोहगीबरवा का दियारा क्षेत्र बाढ़ की चपेट में आ गया। इस बाढ़ से जनपद के सोहगीबरवा समेत तीन ग्राम सभाओं और कुशीनगर जिले की चार ग्राम सभाओं में करीब 50 हजार की आबादी प्रभावित हुई। सबसे बड़ी चिंता सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के शिवपुर रेंज में मौजूद जंगली जानवरों को लेकर है जिनकी वर्तमान स्थिति स्पष्ट नहीं है।
तीन तरफ जंगल और एक तरफ नदी से घिरे इन गांवों में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। शिवपुर रेंज में बाढ़ का पानी करीब 10 फीट से अधिक ऊंचाई तक बहता दिखाई दिया था। पानी उतरने के बाद जंगल में तबाही का मंजर स्थिति की भयावहता दर्शाता है। शिवपुर रेंज में बड़ी संख्या में जंगली जानवरों की मौजूदगी मानी जाती है। इसके अलावा वाल्मीकिनगर वन्यजीव अभयारण्य और नेपाल के चितवन क्षेत्र से भी वन्यजीवों का आवागमन इस क्षेत्र में होता रहता है।
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ऐसे में बाढ़ के दौरान ये वन्यजीव कहां गए, कितने सुरक्षित हैं और कितने प्रभावित हुए, यह अभी स्पष्ट नहीं है। बाढ़ के बाद क्षेत्र में मवेशियों के मरने की संख्या का आकलन विभिन्न विभागों द्वारा किया जा रहा है, लेकिन वन्यजीवों के नुकसान का कोई स्पष्ट आंकड़ा अब तक सामने नहीं आया है।
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वन्यजीवों की सुरक्षा बड़ी चुनौती
वन्यजीवों को देश की प्राकृतिक धरोहर माना जाता है। ऐसे में उनके लापता होने, बह जाने या मौत होने की स्थिति का पता लगाना वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है। विभाग को अभी तक इस संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। यह स्थिति वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों पर सवाल उठाती है।
निचलौल रेंज के साथ शिवपुर रेंज का अतिरिक्त चार्ज देख रहे रेंजर सुनील कुमार राव ने बताया कि बाढ़ का पानी बढ़ने पर जंगली जानवर ऊंचे स्थानों की ओर चले गए होंगे। उन्होंने कहा कि फिलहाल किसी वन्यजीव की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। विभाग की ओर से इसका आकलन कराया जाएगा। आकलन के बाद ही वन्यजीवों के नुकसान की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।