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Maharajganj News: केमिकल से बढ़ा रहे फलों की रंगत, लापरवाही बिगाड़ देगी सेहत

Wed, 25 Jun 2025 12:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Wed, 25 Jun 2025 12:30 AM IST
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The colour of fruits is being enhanced with chemicals, carelessness will spoil health
महराजगंज। बाजार में दुकानों और रेहड़ियों पर फलों की भरमार है। इन दिनों आम, केला, पपीता आदि फलों को केमिकल से पकाने की बात कही जा रही है, जो सेहत के लिए बेहद घातक है।
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खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के अभियान का भी कोई असर नहीं दिखाई दे रहा है। आम का सीजन जोरों पर है, लेकिन फलों के राजा को जल्दी पकाने के लिए प्रतिबंधित रसायन कार्बाइड का इस्तेमाल धड़ल्ले से कुछ जगहों पर हो रहा है। फल के थोक कारोबारियों के अनुसार, शहर में रोजाना 30 क्विंटल केला आंध्र प्रदेश से आता है। इसके अलावा स्थानीय और कुशीनगर जिले से केला मंगाया जाता है।
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वहीं आम भी शहर में एक टन रोजाना आता है। मलिहाबाद का दशहरी आम अधिक मंगाया जा रहा है। फरेंदा व नौतनवा से कच्चे आम अधिक मंगाए जाते हैं। महाराष्ट्र से पपीता आता है। करीब 50 क्विंटल रोजाना खपत होती है। कारोबारी बताते हैं कि केला 68 रुपये प्रति दर्जन बिक्री हो रही है। वहीं आम 40 से 50 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। पपीता 50 से 55 रुपये प्रति किलो है।
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सूत्रों की माने तो खपत को देखते हुए धंधेबाज कार्बाइड व केमिकल का उपयोग कर फलों को जल्द पका कर बाजार में उतार दिए हैं, इससे उनको मोटा मुनाफा हो रहा है। शहर में कुछ स्थानों पर ऐसे फलों की पकाने की व्यवस्था है।
वहीं दूसरी ओर शहर से सटे इलाकों के कुछ गांव में चोरी-छिपे फलों को पकाया जा रहा है। जानकार बताते हैं कि केमिकल से पकाए गए फलों का रंग बेहद चटक होता है। इन फलों का सीधा असर लिवर पर पड़ता है और धीरे-धीरे शरीर को कमजोर कर देता है। इसलिए इनका सेवन करने से बचें। उधर, जिला अस्पताल की ओपीडी में पेट के मरीज पहुंचने लगे हैं। जांच में पता चला की आम खाने से उल्टी-दस्त होने लगा।
खासकर बच्चे इससे अधिक पीड़ित मिल रहे हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रंजन मिश्रा ने बताया कि बच्चों को आम खाने के लिए देने से पहले अच्छी तरह से धुल लें। खरीदने के दौरान सतर्कता बरतें।
कार्बाइड से पके आम सेहत के लिए ठीक नहीं होते हैं। उल्टी-दस्त से पीड़ित रोजाना 15 से 20 बच्चे आ रहे हैं। तुलसीपुर के दिनेश कहते हैं कि दो दिन पहले रात में आम खा लिया था। इससे पेट में दर्द होने लगा। अब आम खान बंदकर दवा का सेवन कर रहा हूं तो कुछ राहत है।
केएमसी मेडिकल काॅलेज के डॉ. डीके कुशवाहा ने बताया कि कार्बाइड से पके आम की पहचान आसान है। आम को पानी भरे बर्तन में डालें, अगर वह तैरने लगे तो यह रसायन से पकाया गया है। इसके अलावा, हल्का हरा रंग, झुर्रियां, हरे धब्बे या काटने पर अधपका और लाल-पीला रंग दिखना भी कार्बाइड के इस्तेमाल का संकेत है।
30-40 घंटे में पक जाता है कच्चा आम : फल कारोबारी कच्चे आम को कार्बाइड लगाकर मात्र 30-40 घंटे में पका लेते हैं, जिससे बाजार में मांग के अनुरूप आपूर्ति हो जाती है।

जिले के कई कस्बों में तमाम गोदामों में यह काम बड़े पैमाने पर हो रहा है। प्रतिबंध के बावजूद कार्बाइड की आसान उपलब्धता पर जिम्मेदारों की उदासीनता सवाल उठा रही है।
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