{"_id":"65c93ad7645a68b08807e0f6","slug":"the-changing-picture-of-the-city-along-with-the-surrounding-villages-and-towns-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-115603-2024-02-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: नगर के साथ आसपास के गांव कस्बों की बदल रही तस्वीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: नगर के साथ आसपास के गांव कस्बों की बदल रही तस्वीर
Mon, 12 Feb 2024 02:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 12 Feb 2024 02:53 AM IST
विज्ञापन
महराजगंज। अभी महायोजना 2031 लागू नहीं हुई है पर शहर का दायरा चार से पांच किमी तक बढ़ गया है। निचलौल रोड से आने पर मुंडेराकला से ही शहर जैसा नजारा दिखने लगता है। सड़क के किनारे दुकानें बन गई हैं। आगे बढ़ने पर पुलिस लाइन दिखती है। मुख्य रोड पर तो ज्यादातर जमीन बिक चुकी है। मुडेंरा के आस पास प्लाटिंग कर जमीनों की बिक्री की जा रही है। इस रोड से पुलिस लाइन, डायट, स्टेडियम, जवाहर नवोदय विद्यालय व जिला कारागार जुड़ा है। इस वजह से जमीनों के रेट बढ़ गए हैं।
गोरखपुर रोड से शहर में आने पर शिकारपुर से बदलती तस्वीर दिखने लगती है। गुजरे वक्त में इधर कोई जमीनों को नहीं खरीदता था, लेकिन अब शहर का दायरा बढ़ा तो आस पास के इलाकों में बदलाव भी दिखने लगा है। शिकारपुर में ही नीजी अस्पताल, स्कूल के अलावा बड़ी दुकानें, मैरिज हाॅल खुल गए हैं। फरेंदा रोड से आने पर पकड़ी चौराहे की सूरत ही अगल दिखती है, यहां की सड़क चौड़ी है। हाईवे फरेंदा होकर सिद्धार्थनगर को जोड़ रहा है। आसपास के गांव के लोगों को शहर आने में मुश्किल से 10 से 20 मिनट लगते हैं। पकड़ी चौराहे से थोड़ी दूरी पर मेडिकल कालेज बनकर तैयार हो चुका है। क्षेत्र का तेजी से विकास हो रहा है। पहले खेती के भाव से जमीन बिकती थी, लेकिन अब वर्ग फुट के रेट से जमीन बिक रही है। आस पास के इलाकों में तेजी से बदलाव दिख रहा है। पकड़ी चौराहे के धीरेंद्र कहते हैं कि यहां तो बहुत बदलाव हो गया है। जगह जगह प्लाटिंग हो रही है। अब तक सड़क के किनारे जमीन मिल भी नहीं रही है।
अमहवा के नरेंद्र पासवान कहते हैं कि सड़क इतनी अच्छी बन गई है। शहर जाने में वक्त नहीं लगता है। सड़क के किनारे जगह जगह मकान बन गए हैं। पहले तो शाम को गांव से महराजगंज जाने में डर लगता था। अब कभी भी जाना हो तो निकल लेते हैं। महुअवा चौराहे के राजपाल यादव कहते हैं कि जिले में बदलाव तेजी से हुआ है। गुजरे दस साल की बात करें तो शाम को कोई चौराहे पर भी नहीं रुकता था, अब तो देर रात तक चहल पहल रहती है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
फरेंदा रोड पर तेजी से बन रहे होटल व मकान
शहर का दायरा बढ़ने से फरेंदा रोड शहरी लुक में आ गया है। इस रोड पर तेजी से होटल व मकान बन रहे हैं। सड़क के किनारे जमीनों का रेट 20 लाख रुपये डिस्मिल से ज्यादा है। सड़क पर जगह जगह रेट में अंतर है। सड़क से हटकर जमीन लेने पर भी सात लाख रुपये डिस्मिल से कम नहीं हैं। केएमसी मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल की ओर सड़क के दोनों तरफ कई स्थानों पर प्लाटिंग हुई है। पकड़ी से खुटहा मार्ग पर मेडिकल कालेज बन कर तैयार है। रेलवे ट्रैक का निर्धारण होने के बाद महुअवा में स्टेशन के लिए जमीन चिन्हित होने से तेजी उधर लोग जमीन खरीद रहे हैं। नीजी स्कूलों की भरमार हो गई है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
अब मेरे गांव में शहर जैसी सुविधाएं हो गई हैं। गुजरे वक्त में कुछ खास सुविधा नहीं थी। गांव के करीब तक नगर पालिका का दायरा बढ़ गया है। गांव में शहर तक पहुंचने में चंद मिनट ही लगते हैं। अब सड़कें बेहतर हो गई हैं। जो लोग शहर में घर बनाने का सपना देख रहे थे, उन्होंने गांव में ही रहने का मन बना लिया। गांव में भी विकास कार्यों को बेहतर ढंग से कराया गया है। स्कूल भी अच्छे हैं, जहां बेहतर ढंग से पढ़ाई होती है। पहले की अपेक्षा अब गांव में ज्यादा बदलाव दिख रहा है।
सोनी कश्यप, ब्लॉक प्रमुख सदर
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
शहर के आस पास क्षेत्र में जहां सुनसान दिखाई देता था, वहां अब घर बन गए हैं। जलभराव वाले क्षेत्र की जमीनों के अच्छे भाव मिल रहे हैं। बेहतर सड़कें बनीं हैं। बडे़ बड़े मकान बन रहे हैं। लोगों को रोजागार के अवसर भी मिल रहे हैं। जिला मुख्यालय जाने वालों की संख्या बढ़ने से शहर के आस पास के चौराहों पर छोटी मोटी दुकानें लगाकर लोग जिविकोपार्जन कर रहे हैं। बीते वक्त में कहीं कहीं दुकानें दिखती थी। गांव में भी बहुत बदलाव दिख रहा है।
सुशील श्रीवास्तव, अध्यक्ष, सिविल कोर्ट बार एसोशिएसन
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
पहले तो हमारे गांव के शहर जाने के लिए कई बार सोचना पड़ता था, लेकिन अब तो ऐसा लगता है कि यही शहर है। आने जाने में बहुत कम समय लगता है। सड़क ठीक हो गई है। गांव में भी सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। शहर की तरह से गांव का भी विकास हो रहा है। गुजरे वक्त जमीनों के खरीदार नहीं थे, अब तो जमीन नहीं मिल रही है। लोगों को रोजगार मिल रहा है। शहर से काम करने के बाद लोग आसानी से चले आते हैं।
अमरजीत साहनी, ग्राम प्रधान करमहा
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
सड़कों के किनारे बड़े बडे़ शो रूम बन गए हैं। पहले यहां बड़ी गाड़ियों के शोरूम नहीं थे। अब तो किसी को गोरखपुर नहीं जाना पड़ता है। गाड़ियों की सर्विसिंग से लेकर अन्य जरूरी काम यहीं हो जाते हैं। पहले तो गौनरिया बाबू के आस पास कोई जमीन नहीं खरीदना चाहता था, आज हालत यह है कि सड़क के किनारे जमीन नहीं मिलेगी। सड़क के किनारे अच्छे रेस्टोरेंट खुल गए हैं। युवाओं को काम मिल रहा है। सचमुच में बदलाव ऐसा हो रहा है कि दस साल पहले पहले आया हुआ व्यक्ति, अब आएगा तो गांव के चौराहे को पहचान नहीं पाएगा।
त्रिभुवन वर्मा, जिला पंचायत सदस्य
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
पहले गांव से शहर तक जाने के लिए करीब घंटे भर का वक्त लग जाता था। 12 किमी की दूरी जाने में अब 20 मिनट ही लगता है। पहले सड़क ठीक नहीं थी। अब गांव से महराजगंज जाने पर सड़क के किनारे जगह जगह स्कूल दुकान आदि की भरमार है। ताने में समय नहीं लगता है। सड़क के किनारे के चौराहें काफी बदल गए हैं।
मारकंडेय पांडेय, गौनरियाराजा
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
पहले सोचता था की शहर में जमीन खरीद लूं, लेकिन अब तो इरादा बदल गया है। शहर तक पहुंचने में समय नहीं लगता है। गांव के पास ही आईटीएम कालेज है। पुलिस चौकी है। गांव का चौराहा ही शहर की तरह से दिख रहा है। जरूरत की सामाग्री यही मिल जाती है। गुजरे वक्त से अब बहुत कुछ बदलाव हो गया है।
गोविंद मणि त्रिपाठी, चेहरी
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
विज्ञापन
गोरखपुर रोड से शहर में आने पर शिकारपुर से बदलती तस्वीर दिखने लगती है। गुजरे वक्त में इधर कोई जमीनों को नहीं खरीदता था, लेकिन अब शहर का दायरा बढ़ा तो आस पास के इलाकों में बदलाव भी दिखने लगा है। शिकारपुर में ही नीजी अस्पताल, स्कूल के अलावा बड़ी दुकानें, मैरिज हाॅल खुल गए हैं। फरेंदा रोड से आने पर पकड़ी चौराहे की सूरत ही अगल दिखती है, यहां की सड़क चौड़ी है। हाईवे फरेंदा होकर सिद्धार्थनगर को जोड़ रहा है। आसपास के गांव के लोगों को शहर आने में मुश्किल से 10 से 20 मिनट लगते हैं। पकड़ी चौराहे से थोड़ी दूरी पर मेडिकल कालेज बनकर तैयार हो चुका है। क्षेत्र का तेजी से विकास हो रहा है। पहले खेती के भाव से जमीन बिकती थी, लेकिन अब वर्ग फुट के रेट से जमीन बिक रही है। आस पास के इलाकों में तेजी से बदलाव दिख रहा है। पकड़ी चौराहे के धीरेंद्र कहते हैं कि यहां तो बहुत बदलाव हो गया है। जगह जगह प्लाटिंग हो रही है। अब तक सड़क के किनारे जमीन मिल भी नहीं रही है।
विज्ञापन
अमहवा के नरेंद्र पासवान कहते हैं कि सड़क इतनी अच्छी बन गई है। शहर जाने में वक्त नहीं लगता है। सड़क के किनारे जगह जगह मकान बन गए हैं। पहले तो शाम को गांव से महराजगंज जाने में डर लगता था। अब कभी भी जाना हो तो निकल लेते हैं। महुअवा चौराहे के राजपाल यादव कहते हैं कि जिले में बदलाव तेजी से हुआ है। गुजरे दस साल की बात करें तो शाम को कोई चौराहे पर भी नहीं रुकता था, अब तो देर रात तक चहल पहल रहती है।
विज्ञापन
फरेंदा रोड पर तेजी से बन रहे होटल व मकान
शहर का दायरा बढ़ने से फरेंदा रोड शहरी लुक में आ गया है। इस रोड पर तेजी से होटल व मकान बन रहे हैं। सड़क के किनारे जमीनों का रेट 20 लाख रुपये डिस्मिल से ज्यादा है। सड़क पर जगह जगह रेट में अंतर है। सड़क से हटकर जमीन लेने पर भी सात लाख रुपये डिस्मिल से कम नहीं हैं। केएमसी मेडिकल कालेज एंड हास्पिटल की ओर सड़क के दोनों तरफ कई स्थानों पर प्लाटिंग हुई है। पकड़ी से खुटहा मार्ग पर मेडिकल कालेज बन कर तैयार है। रेलवे ट्रैक का निर्धारण होने के बाद महुअवा में स्टेशन के लिए जमीन चिन्हित होने से तेजी उधर लोग जमीन खरीद रहे हैं। नीजी स्कूलों की भरमार हो गई है।
अब मेरे गांव में शहर जैसी सुविधाएं हो गई हैं। गुजरे वक्त में कुछ खास सुविधा नहीं थी। गांव के करीब तक नगर पालिका का दायरा बढ़ गया है। गांव में शहर तक पहुंचने में चंद मिनट ही लगते हैं। अब सड़कें बेहतर हो गई हैं। जो लोग शहर में घर बनाने का सपना देख रहे थे, उन्होंने गांव में ही रहने का मन बना लिया। गांव में भी विकास कार्यों को बेहतर ढंग से कराया गया है। स्कूल भी अच्छे हैं, जहां बेहतर ढंग से पढ़ाई होती है। पहले की अपेक्षा अब गांव में ज्यादा बदलाव दिख रहा है।
सोनी कश्यप, ब्लॉक प्रमुख सदर
शहर के आस पास क्षेत्र में जहां सुनसान दिखाई देता था, वहां अब घर बन गए हैं। जलभराव वाले क्षेत्र की जमीनों के अच्छे भाव मिल रहे हैं। बेहतर सड़कें बनीं हैं। बडे़ बड़े मकान बन रहे हैं। लोगों को रोजागार के अवसर भी मिल रहे हैं। जिला मुख्यालय जाने वालों की संख्या बढ़ने से शहर के आस पास के चौराहों पर छोटी मोटी दुकानें लगाकर लोग जिविकोपार्जन कर रहे हैं। बीते वक्त में कहीं कहीं दुकानें दिखती थी। गांव में भी बहुत बदलाव दिख रहा है।
सुशील श्रीवास्तव, अध्यक्ष, सिविल कोर्ट बार एसोशिएसन
पहले तो हमारे गांव के शहर जाने के लिए कई बार सोचना पड़ता था, लेकिन अब तो ऐसा लगता है कि यही शहर है। आने जाने में बहुत कम समय लगता है। सड़क ठीक हो गई है। गांव में भी सरकार की योजनाओं का लाभ मिल रहा है। शहर की तरह से गांव का भी विकास हो रहा है। गुजरे वक्त जमीनों के खरीदार नहीं थे, अब तो जमीन नहीं मिल रही है। लोगों को रोजगार मिल रहा है। शहर से काम करने के बाद लोग आसानी से चले आते हैं।
अमरजीत साहनी, ग्राम प्रधान करमहा
सड़कों के किनारे बड़े बडे़ शो रूम बन गए हैं। पहले यहां बड़ी गाड़ियों के शोरूम नहीं थे। अब तो किसी को गोरखपुर नहीं जाना पड़ता है। गाड़ियों की सर्विसिंग से लेकर अन्य जरूरी काम यहीं हो जाते हैं। पहले तो गौनरिया बाबू के आस पास कोई जमीन नहीं खरीदना चाहता था, आज हालत यह है कि सड़क के किनारे जमीन नहीं मिलेगी। सड़क के किनारे अच्छे रेस्टोरेंट खुल गए हैं। युवाओं को काम मिल रहा है। सचमुच में बदलाव ऐसा हो रहा है कि दस साल पहले पहले आया हुआ व्यक्ति, अब आएगा तो गांव के चौराहे को पहचान नहीं पाएगा।
त्रिभुवन वर्मा, जिला पंचायत सदस्य
पहले गांव से शहर तक जाने के लिए करीब घंटे भर का वक्त लग जाता था। 12 किमी की दूरी जाने में अब 20 मिनट ही लगता है। पहले सड़क ठीक नहीं थी। अब गांव से महराजगंज जाने पर सड़क के किनारे जगह जगह स्कूल दुकान आदि की भरमार है। ताने में समय नहीं लगता है। सड़क के किनारे के चौराहें काफी बदल गए हैं।
मारकंडेय पांडेय, गौनरियाराजा
पहले सोचता था की शहर में जमीन खरीद लूं, लेकिन अब तो इरादा बदल गया है। शहर तक पहुंचने में समय नहीं लगता है। गांव के पास ही आईटीएम कालेज है। पुलिस चौकी है। गांव का चौराहा ही शहर की तरह से दिख रहा है। जरूरत की सामाग्री यही मिल जाती है। गुजरे वक्त से अब बहुत कुछ बदलाव हो गया है।
गोविंद मणि त्रिपाठी, चेहरी