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Maharajganj News: पराली जलाने और दिवाली में आतिशबाजी से खराब हुई शहर की हवा

Wed, 15 Nov 2023 01:08 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Nov 2023 01:08 AM IST
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The air of the city got spoiled due to stubble burning and fireworks during Diwali.
दिवाली में जमकर हुई आतिशबाजी से खराब हुईपराली जलाने और दिवाली में आतिशबाजी से खराब हुई शहर की ह
शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स 168 तक पहुंचा, दिवाली के पहले एक्यूआई था 152, हवा में प्रदूषण के बढ़ते स्तर से हो सकती ज्यादा परेशानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। दिवाली के पहले शहर में एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 152 था, लेकिन अब 168 हो गया है। इसे थोड़े खराब स्तर का माना जाता है। दिवाली में जमकर आतिशबाजी हुई का नतीजा प्रदूषण के स्तर पर दिख रहा है। एक पटाखों से निकला धुंआ तो दूसरी ओर पराली से प्रदूषण में बढ़ोतरी दर्ज हो रही है। सुबह शाम धुंध की तरह से दिख रहा है। सेहत के लिए इसे हानिकारक माना जाता है। ऐसे में बीमारों व बुजुर्गाें को सचेत रहने की जरूरत है।
मंगलवार को शहर में सुबह आठ बजे कांशीराम आवास से आगे बढ़ने पर धुंध फैला नजर आया। इसी तरह से शहर के अन्य हिस्सों में धुंध का असर दिखा। गोरखपुर रोड पर पेट्रोल पंप से आगे बढ़ने पर भी यही नजारा दिखा। निचलौल रोड पर स्टेडियम से आगे जाने पर धुंध की चादर दिखती है। निचलौल की ओर से राधेश्याम ने बताया कि सुबह शाम धुंध ज्यादा दिख रहा है। 20 मीटर की दूसरी ठीक से नहीं दिखती है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी के कारण सब कुछ हो रहा है।
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दिवाली पर तेज धुएं वाले पटाखे खूब चले। देर रात तक पटाखे जलाने का सिलसिला चला। जिससे अचानक ही वायु प्रदूषण का स्तर थोड़ा खराब हुआ। अब बुजुर्गों को जहां सांस लेने में तकलीफ हो रही है वहीं आंखों में जलन होने से लोग परेशान हैं। सामान्य तौर पर हवा का एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 100 होता है तो यह स्वास्थ्य के लिए सामान्य माना जाता है। जैसे-जैसे यह बढ़ता जाता है तो हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व भी बढ़ते चले जाते हैं।
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विशेषज्ञों के अनुसार इस मौसम में ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए क्योंकि शरीर के अंदर गए कण ठंडे पानी से जम जाते है। जहां तक संभव हो बिना किसी कारण के घर से नहीं निकलना चाहिए और घर से निकलते समय मुंह पर मास्क व आंखों पर चश्मा लगाना चाहिए। आंखों को दिन में तीन-चार बार धोना चाहिए। डॉ. एवी त्रिपाठी ने बताया कि पटाखे चलाने से प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। अब भी ऐसा है। हवा में दिख रहा धुंध की चादर पटाखों के धुएं के कारण ही है। यह स्वास्थ्य के लिए भी काफी नुकसानदायक है।
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सीधे तौर पर पटाखों से निकला जहरीला धुआं है
--प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से जांच की जाती है कि वायु में पीएम (परटिक्यूलेट मैटर) 2.5 व पीएम 10 कितना है। ये पता होने के बाद दोनों का औसत निकाला जाता है, जिसे औसत एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) कहा जाता है। इस एक्यूआई से ही पता चलता है कि हवा में कितना प्रदूषण है। इस समय यह एक्यूआई काफी ऊपर पहुंचा हुआ है। इसका कारण सीधे तौर पर पटाखों से निकला जहरीला धुआं है।
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वायु प्रदूषण से लोगों को थकान, कमजोरी और सांस फूलने की सबसे अधिक समस्या होती है। सीओपीडी व दमा के मरीजों के लिए ज्यादा नुकसानदेह है। प्रदूषण उनके रोग को और बढ़ा देता है। सुबह-शाम घर के अंदर व्यायाम करना चाहिए। बच्चे और बुजुर्ग घर से बाहर ज्यादा न घूमें। नवंबर माह में अस्थमा के मरीजों को अतिरिक्त एहतियात बरतने की आवश्यकता है।
- डॉ. विजय शर्मा, फिजीशियन
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एयर क्वालिटी इंडेक्स को ऐसे समझें

एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) हवा की गुणवत्ता को बताता है। इससे पता चलता है कि हवा में किन गैसों की कितनी मात्रा घुली है। एक्यूआई की गुणवत्ता के आधार पर छह अलग-अलग श्रेणी बनाई गई है। इसमें 0-50 अच्छी, 51-100 संतोषजनक (संवेदनशील लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है), 101-200 मध्यम (फेफड़े की बीमारी जैसे अस्थमा ओर हृदय रोग, बच्चाें और बड़ों को असुविधा में सांस लेने में तकलीफ), 201-300 खराब (लंबे समय तक ऐसा रहने से सांस की बीमारी हो सकती है।), 301-400 बहुत खराब (लंबे समय तक ऐसा रहने से सांस की बीमारी हो सकती है। फेफड़े और दिल पर प्रतिकूल प्रभाव) और 401 से 500 एक्यूआई को गंभीर श्रेणी में रखा गया है (इसे आपातकाल कहा जाएगा। स्वस्थ लोगों का भी श्वसन तंत्र खराब हो सकता है।)।
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क्या होता है पीएम-2.5 और पीएम-10

पीएम को पर्टिकुलेट मैटर कहते हैं। इन कणों का साइज 2.5 माइक्रोमीटर या इससे बड़ा 10 माइक्रोमीटर तक होता है। इसमें पीएम-2.5 पॉल्यूशन धूल, कंस्ट्रक्शन, कूड़ा व पराली जलाने से होता है। वहीं, पीएम-10 धूल, गर्दा और अन्य सूक्ष्म कण होते हैं। पीएम 2.5 का सामान्य स्तर 60 माइक्रो ग्राम और पीएम-10 का 100 माइक्रो ग्राम क्यूबिक मीटर (एमजीसीएम) होना चाहिए। इससे ज्यादा होने पर सांस लेने संबंधी शिकायतें बढ़ने लगती हैं।

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फोटो
आंखों में जलन, सांस के मरीजों बन रहे लोग
बचाव की जरूरत प्रदूषण थोड़े से खराब स्तर पर होने के कारण सेहत हो रही प्रभावित
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। शहर का वर्तमान में एक्यूआई 168 है। इसे थोड़े खराब स्तर का माना जाता है। जहां धुआं उगल रही गाड़ियां सेहत के लिए खतरा बन रही हैं, वहीं आतिशबाजी से हवा और प्रदूषित हो गई है। आंखों में जलन की समस्या के साथ ही सांस के मरीज भी अस्पताल पहुंच रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले में करीब दो लाख वाहन वर्ष 2019 के पहले के पंजीकृत हैं। ये पुराने वाहन धुआं उगल रहे हैं। इनके प्रदूषण प्रमाण पत्र भी नहीं हैं। इन दिनों सुबह और शाम को धुंध छाई रह रही है। जिस कारण मरीज बढ़ गए हैं। बढ़ते प्रदूषण के कारण लोगों की आंखों में जलन हो रही है। सांस के मरीज भी प्रदूषण के कारण परेशान हो रहे हैं। अस्पताल में स्वास्थ्य संबंधित दिक्कत लेकर मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। जिन्हें आवश्यक टिप्स दिए जा रहे हैं। मंगलवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में आंखों में जलन संबंधित 40 से अधिक मरीज उपचार के लिए पहुंचे। सांस के करीब 30 मरीज पहुंचे। डॉक्टरों ने जांच कर दवा लिखी।

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ मनीष निगम ने बताया कि प्रदूषण के कारण आंखों में जलन संबंधित अनेक मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। धुंध के कारण स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। आंखों में जलन के मरीज बढ़े हैं। आंखें अनमोल हैं। हमें आंखों का विशेष ध्यान रखना होगा। डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि सांस लेने की समस्या से पीड़ित मरीज आ रहे हैं। बचाव करने की जरूरत है।

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आंखों में जलन से बचाव के उपाय :
आंखों में जलन की समस्या हो तो आंखों को सादे पानी से धोना चाहिए।

एक कपड़े को गर्म पानी में भिगोएं और फिर अपनी आंखों पर दिन में कुछ मिनट के लिए गर्म सेंक लगाएं, जिससे आंखों में जलन की समस्या ख़त्म हो जाएगी।

आंखों का जलन बढ़ता जा रहा है तो गुलाब जल डालें।
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सांस के मरीजों के लिए बचाव के उपाय :
धूम्रपान न करें
तंबाकु का सेवन बिलकुल न करें

प्रदूषण से दूर रहें

बहुत ज्यादा ठंड से बचकर रहें

वजन घटाएं

बहुत ही कठिन व्यायाम न करें

पौष्टिक खाना खाएं

8 घंटे की नींद जरूर लें
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