{"_id":"687d3ccbce6262be1f03bf1d","slug":"special-permit-issued-in-a-fraudulent-manner-maharajganj-news-c-206-1-go11002-155112-2025-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: कूटरचित तरीके से जारी कराया स्पेशल परमिट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: कूटरचित तरीके से जारी कराया स्पेशल परमिट
Mon, 21 Jul 2025 12:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 21 Jul 2025 12:30 AM IST
विज्ञापन
महराजगंज। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा सोनौली से नेपाल जाने वाली बसों का स्पेशल परमिट इन दिनों जांच के दायरे में है। जनपद के एआरटीओ की जांच में एक बस की स्पेशल परमिट कूटरचित मिली।
विभाग ने सदर कोतवाली में केस दर्ज कराया है। प्रदेश के अन्य जनपदों में भी स्पेशल परमिट की जांच चल रही है और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। जनपद के एआरटीओ कार्यालय से चल रही जांच में जानकारी मिल रही है कि स्पेशल परमिट का खेल किसी आरटीओ ऑफिस से नहीं, बल्कि साइबर कैफे के जरिये संभव हो रहा है। वाहन 4.0 एप के जरिए इसे अंजाम दिया जा रहा है।
एक बार अगर किसी वाहन का इस एप से स्पेशल परमिट जारी हो जाए तो उसका रिकार्ड नेपाल तक चलने वाले वाहन चालक जान-पहचान के कैफे वालों के यहां संरक्षित करा देते हैं।
विज्ञापन
जब भी उन्हें नेपाल के लिए स्पेशल परमिट की जरूरत होती है। इस सर्टिफिकेट पर डिजिटल बदलाव कराकर उपयोग कर लिया जाता है। ऑटो अप्रूवल की सुविधा सहज करने के लिए विभाग ने इस एप का उपयोग प्रारंभ किया था। आज इसी का दुरुपयोग कर विभाग को चूना लगाने का खेल चल रहा है।
विज्ञापन
विभाग ने सदर कोतवाली में केस दर्ज कराया है। प्रदेश के अन्य जनपदों में भी स्पेशल परमिट की जांच चल रही है और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। जनपद के एआरटीओ कार्यालय से चल रही जांच में जानकारी मिल रही है कि स्पेशल परमिट का खेल किसी आरटीओ ऑफिस से नहीं, बल्कि साइबर कैफे के जरिये संभव हो रहा है। वाहन 4.0 एप के जरिए इसे अंजाम दिया जा रहा है।
विज्ञापन
एक बार अगर किसी वाहन का इस एप से स्पेशल परमिट जारी हो जाए तो उसका रिकार्ड नेपाल तक चलने वाले वाहन चालक जान-पहचान के कैफे वालों के यहां संरक्षित करा देते हैं।
विज्ञापन
जब भी उन्हें नेपाल के लिए स्पेशल परमिट की जरूरत होती है। इस सर्टिफिकेट पर डिजिटल बदलाव कराकर उपयोग कर लिया जाता है। ऑटो अप्रूवल की सुविधा सहज करने के लिए विभाग ने इस एप का उपयोग प्रारंभ किया था। आज इसी का दुरुपयोग कर विभाग को चूना लगाने का खेल चल रहा है।