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तस्करी : बंगाल की मछली नेपाल पहुंचाकर मालामाल हो रहे धंधेबाज
Tue, 22 Apr 2025 12:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 22 Apr 2025 12:27 AM IST
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लाइन न मिलने पर निचलौल शहर से पहले सड़क किनारे खड़ा की गई मछली लदी डीसीएम।
महराजगंज/निचलौल। भारत-नेपाल बाॅर्डर पर तस्कर इन दिनों गेहूं, राइस ब्रान, कपड़ा सहित अन्य खाद्य सामाग्रियों के साथ ही पश्चिम बंगाल से आने वाली मछली के खेप को भी सरहद पार कर मालामाल हो रहे हैं।
इस धंधे से जुड़े एक धंधेबाज के मुताबिक इन मछलियों को बंगाल से नेपाल में भेजने के लिए तीन चरण में काम होता है। सरहद पार होने के बाद धंधेबाजों को प्रति किलो 125 से 140 रुपये भारतीय मुद्रा में मुनाफा होता है। सूत्रों की माने तो इस धंधे में बरेली और गोरखपुर के कुछ बड़े व्यापारियों की अहम भूमिका है। उक्त व्यापारियों के जरिए ही डीसीएम और पिकअप से मछली पहले जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचती है। वहां से अंधेरे में कैरियर की मदद से सरहद पार कराया जाता है। जहां से नेपाल के धंधेबाज काठमांडू सहित अन्य पहाड़ी क्षेत्र में माल पहुंचाते हैं।
कई बार सुरक्षा एजेंसियों की टीम मुखबिर की सूचना पर बड़ी मात्रा में माल बरामद करती है, फिर भी सरहद पर तस्करी का यह खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बताया जा रहा है कि इन दिनों सरहद पर मछली की तस्करी हो रही है। सोमवार को निचलौल शहर से पहले एक चाय की दुकान के पास सड़क किनारे मछली लदे एक डीसीएम को लाइन नहीं मिलने पर अचानक रोक दिया गया।
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कुछ देर बाद डीसीएम सवार दो शख्स चाय की दुकान पर पहुंचे। चाय पीने के साथ ही उक्त डीसीएम चालक मछली लदे वाहन को आगे बढ़ाने के लिए मोबाइल फोन के जरिए किसी से लोकेशन लेने लगा। करीब 20 मिनट बाद चालक के मोबाइल पर किसी शख्स का अचानक फोन आया।
उसके बाद चालक आनन-फानन में मछली लदा डीसीएम लेकर सीमावर्ती क्षेत्र की ओर निकल पड़ा। धंधेबाजों की माने तो एक दिन में करीब पांच से आठ लाख रुपये का खेल होता है।
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इस धंधे से जुड़े एक धंधेबाज के मुताबिक इन मछलियों को बंगाल से नेपाल में भेजने के लिए तीन चरण में काम होता है। सरहद पार होने के बाद धंधेबाजों को प्रति किलो 125 से 140 रुपये भारतीय मुद्रा में मुनाफा होता है। सूत्रों की माने तो इस धंधे में बरेली और गोरखपुर के कुछ बड़े व्यापारियों की अहम भूमिका है। उक्त व्यापारियों के जरिए ही डीसीएम और पिकअप से मछली पहले जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचती है। वहां से अंधेरे में कैरियर की मदद से सरहद पार कराया जाता है। जहां से नेपाल के धंधेबाज काठमांडू सहित अन्य पहाड़ी क्षेत्र में माल पहुंचाते हैं।
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कई बार सुरक्षा एजेंसियों की टीम मुखबिर की सूचना पर बड़ी मात्रा में माल बरामद करती है, फिर भी सरहद पर तस्करी का यह खेल रुकने का नाम नहीं ले रहा है। बताया जा रहा है कि इन दिनों सरहद पर मछली की तस्करी हो रही है। सोमवार को निचलौल शहर से पहले एक चाय की दुकान के पास सड़क किनारे मछली लदे एक डीसीएम को लाइन नहीं मिलने पर अचानक रोक दिया गया।
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कुछ देर बाद डीसीएम सवार दो शख्स चाय की दुकान पर पहुंचे। चाय पीने के साथ ही उक्त डीसीएम चालक मछली लदे वाहन को आगे बढ़ाने के लिए मोबाइल फोन के जरिए किसी से लोकेशन लेने लगा। करीब 20 मिनट बाद चालक के मोबाइल पर किसी शख्स का अचानक फोन आया।
उसके बाद चालक आनन-फानन में मछली लदा डीसीएम लेकर सीमावर्ती क्षेत्र की ओर निकल पड़ा। धंधेबाजों की माने तो एक दिन में करीब पांच से आठ लाख रुपये का खेल होता है।