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Maharajganj News: चाइनीज लहसुन की तस्करी तेज, 100 रुपये प्रति किलो मुनाफा कमा रहे तस्कर
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भारत ने साल 2014 में चाइनीज लहसुन के आयात पर लगा दिया था प्रतिबंध
अधिक चमकदार होने की वजह से हर कोई जल्दी आकर्षित हो जाता, सीमावर्ती क्षेत्र में अक्सर होती बरामदगी
भारत में लहसुन 200 से 220 रुपये प्रतिकिलो और चाइनीज मिल रहा 70 से 80 रुपये में
प्रति किलो 100 रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं तस्कर, कैरियर व अन्य मद में खर्च कर रहे प्रति किलो 30 रुपये
महराजगंज। चीन के लहसुन की तस्करी इन दोनों फिर शुरू हो गई है। बीते दिन 39 बोरी लहसुन बरामद किया गया। इसे नेपाल से भारतीय क्षेत्र में लाया गया था। चीन का लहसुन नेपाल होकर आसानी से भारतीय सीमा में आ रहा है। सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता के बावजूद मांग के अनुसार तस्कर इसे सरहद पार करते हैं। तस्कर चाइनीज लहसुन की तस्करी से प्रतिकिलो 100 रुपये मुनाफा कमा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, भारत ने साल 2014 में चाइनीज लहसुन के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। फफूंद वाला लहसुन आने की रिपोर्ट्स के बाद यह बैन लगाया गया था। इसके बाद से ही तस्करी शुरू हो गई। सूत्रों के मुताबिक, चाइनीज लहसुन चमकदार होने के चलते धंधेबाजों को अच्छी आमदनी होती है। क्योंकि बाजार में चमकदार और बड़े दाने वाले लहसुन की ज्यादा मांग रहती है। देसी की अपेक्षा चाइनीज लहसुन जल्दी और अच्छे कीमत में बिक जाता है। लहसुन का कारोबार ज्यादातर सीमावर्ती इलाकों से होता है।
धंधेबाज नेपाल से तस्करी कर चाइनीज लहसुन को डंप कर लेते हैं। फिर व्यापारियों को सप्लाई कर देते हैं। निचलौल शहर के एक किराना व्यापारी ने बताया कि लहसुन की कीमतों में उछाल हुआ है। भारतीय क्षेत्र में इन दिनों लहसुन 200 से 220 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। जबकि नेपाल में चाइनीज लहसुन 70 से 80 रुपये प्रति किलो की दर से मिल जा रहा है। तस्कर इसका फायदा उठा तक प्रति किलो 130 रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। कैरियरों व किराया खर्च करने के बाद तस्करों को 100 रुपये प्रति किलो की बचत हो रही है।
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सूत्रों की माने तो सोनौली क्षेत्र की सुनसान पगडंडियों से होकर रात में लहसुन लाया जा रहा है। इसके अलावा बरगदवा, परसामलिक, ठूठीबारी, हरदीडाली आदि क्षेत्र में लहसुन भारतीय क्षेत्र में आ रहा है। महराजगंज में लहसुन खपत करने के अलावा गोरखपुर से कानुपर व लखनऊ की मंडी में भेजा रहा है। सूत्रों की मानें तो पिकअप या अन्य छोटे वाहनों में लहसुन गोरखपुर तक पहुंचाया जाता है। ऊपर से ढका होने के कारण पकड़ में आने की आशंका कम रहती है। सटीक मुखबिरी होने पर ही बरामदगी होती है। एक क्षेत्र से रोजाना करीब 10 पिकअप लहसुन आने की बात कही जा रही है।
निचलौल कस्टम अधीक्षक डीके अस्थाना ने बताया कि टीम की ओर से निगरानी की जा रही है। सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है। जानकारी मिलते ही त्वरित कार्रवाई की जाती है।
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ऑनलाइन मंडी गेट पास कटाकर भेजते बड़ी मंडियों में
देसी की अपेक्षा चीन का लहसुन जल्दी बिक जाता है। लहसुन का कारोबार ज्यादातर सीमावर्ती इलाकों से होता है। धंधेबाज नेपाल से तस्करी कर चीन का लहसुन डंप कर लेते हैं। फिर व्यापारियों के वहां सप्लाई कर देते हैं। कुछ धंधेबाज तो ऑनलाइन मंडी गेट पास बनवा कर गोरखपुर, बिहार और दिल्ली तक की बड़ी मंडियों में चीन का लहसुन भेज देते हैं।
सुगंध से पहचानिए देसी लहसुन
आयुष डॉ. प्रियंका सिंह ने बताया कि चीन के लहसुन की कलियां मोटी और बड़ी होती हैं। यह एक हाइब्रिड है। देसी लहसुन सुगंध के चलते ही आसानी से पहचान लिया जाता है। चीन के लहसुन ठंडे वातावरण में केवल केमिकल से पैदा होते हैं, इसलिए इसमें लहसुन के प्राकृतिक गुण अधिक नहीं मिलेंगे। इसको खाने से यहां के लोगों के सेहत पर असर पड़ेगा। लंबे समय तक सेवन करने से पेट संबंधी समस्या हो सकती है। भारतीय क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में लहसुन होता है। ऐसे में भारतीय लहसुन का प्रयोग ही करना चाहिए।
दवा के रूप में भी होता लहसुन का प्रयोग
जिला अस्पताल के डॉ.अनिल कुमार ने बताया कि लहसुन का प्रयोग दवा के रूप में भी होता है। इसे खाने से जोड़ों का दर्द ठीक रहता है। पेट की अग्नि को प्रदिप्त करता है, जिससे खाना पचने में आसानी होती है। कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल में रखता है। इसके गुणों के कारण ही इसका प्रयोग सब्जी में मसाला के तौर पर किया जाने लगा।
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अधिक चमकदार होने की वजह से हर कोई जल्दी आकर्षित हो जाता, सीमावर्ती क्षेत्र में अक्सर होती बरामदगी
भारत में लहसुन 200 से 220 रुपये प्रतिकिलो और चाइनीज मिल रहा 70 से 80 रुपये में
प्रति किलो 100 रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं तस्कर, कैरियर व अन्य मद में खर्च कर रहे प्रति किलो 30 रुपये
महराजगंज। चीन के लहसुन की तस्करी इन दोनों फिर शुरू हो गई है। बीते दिन 39 बोरी लहसुन बरामद किया गया। इसे नेपाल से भारतीय क्षेत्र में लाया गया था। चीन का लहसुन नेपाल होकर आसानी से भारतीय सीमा में आ रहा है। सुरक्षा कर्मियों की सतर्कता के बावजूद मांग के अनुसार तस्कर इसे सरहद पार करते हैं। तस्कर चाइनीज लहसुन की तस्करी से प्रतिकिलो 100 रुपये मुनाफा कमा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, भारत ने साल 2014 में चाइनीज लहसुन के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। फफूंद वाला लहसुन आने की रिपोर्ट्स के बाद यह बैन लगाया गया था। इसके बाद से ही तस्करी शुरू हो गई। सूत्रों के मुताबिक, चाइनीज लहसुन चमकदार होने के चलते धंधेबाजों को अच्छी आमदनी होती है। क्योंकि बाजार में चमकदार और बड़े दाने वाले लहसुन की ज्यादा मांग रहती है। देसी की अपेक्षा चाइनीज लहसुन जल्दी और अच्छे कीमत में बिक जाता है। लहसुन का कारोबार ज्यादातर सीमावर्ती इलाकों से होता है।
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धंधेबाज नेपाल से तस्करी कर चाइनीज लहसुन को डंप कर लेते हैं। फिर व्यापारियों को सप्लाई कर देते हैं। निचलौल शहर के एक किराना व्यापारी ने बताया कि लहसुन की कीमतों में उछाल हुआ है। भारतीय क्षेत्र में इन दिनों लहसुन 200 से 220 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है। जबकि नेपाल में चाइनीज लहसुन 70 से 80 रुपये प्रति किलो की दर से मिल जा रहा है। तस्कर इसका फायदा उठा तक प्रति किलो 130 रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। कैरियरों व किराया खर्च करने के बाद तस्करों को 100 रुपये प्रति किलो की बचत हो रही है।
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सूत्रों की माने तो सोनौली क्षेत्र की सुनसान पगडंडियों से होकर रात में लहसुन लाया जा रहा है। इसके अलावा बरगदवा, परसामलिक, ठूठीबारी, हरदीडाली आदि क्षेत्र में लहसुन भारतीय क्षेत्र में आ रहा है। महराजगंज में लहसुन खपत करने के अलावा गोरखपुर से कानुपर व लखनऊ की मंडी में भेजा रहा है। सूत्रों की मानें तो पिकअप या अन्य छोटे वाहनों में लहसुन गोरखपुर तक पहुंचाया जाता है। ऊपर से ढका होने के कारण पकड़ में आने की आशंका कम रहती है। सटीक मुखबिरी होने पर ही बरामदगी होती है। एक क्षेत्र से रोजाना करीब 10 पिकअप लहसुन आने की बात कही जा रही है।
निचलौल कस्टम अधीक्षक डीके अस्थाना ने बताया कि टीम की ओर से निगरानी की जा रही है। सूचना तंत्र को मजबूत किया गया है। जानकारी मिलते ही त्वरित कार्रवाई की जाती है।
ऑनलाइन मंडी गेट पास कटाकर भेजते बड़ी मंडियों में
देसी की अपेक्षा चीन का लहसुन जल्दी बिक जाता है। लहसुन का कारोबार ज्यादातर सीमावर्ती इलाकों से होता है। धंधेबाज नेपाल से तस्करी कर चीन का लहसुन डंप कर लेते हैं। फिर व्यापारियों के वहां सप्लाई कर देते हैं। कुछ धंधेबाज तो ऑनलाइन मंडी गेट पास बनवा कर गोरखपुर, बिहार और दिल्ली तक की बड़ी मंडियों में चीन का लहसुन भेज देते हैं।
सुगंध से पहचानिए देसी लहसुन
आयुष डॉ. प्रियंका सिंह ने बताया कि चीन के लहसुन की कलियां मोटी और बड़ी होती हैं। यह एक हाइब्रिड है। देसी लहसुन सुगंध के चलते ही आसानी से पहचान लिया जाता है। चीन के लहसुन ठंडे वातावरण में केवल केमिकल से पैदा होते हैं, इसलिए इसमें लहसुन के प्राकृतिक गुण अधिक नहीं मिलेंगे। इसको खाने से यहां के लोगों के सेहत पर असर पड़ेगा। लंबे समय तक सेवन करने से पेट संबंधी समस्या हो सकती है। भारतीय क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में लहसुन होता है। ऐसे में भारतीय लहसुन का प्रयोग ही करना चाहिए।
दवा के रूप में भी होता लहसुन का प्रयोग
जिला अस्पताल के डॉ.अनिल कुमार ने बताया कि लहसुन का प्रयोग दवा के रूप में भी होता है। इसे खाने से जोड़ों का दर्द ठीक रहता है। पेट की अग्नि को प्रदिप्त करता है, जिससे खाना पचने में आसानी होती है। कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल में रखता है। इसके गुणों के कारण ही इसका प्रयोग सब्जी में मसाला के तौर पर किया जाने लगा।