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Maharajganj News: सरकारी क्रय केंद्रों पर सन्नाटा, सरहद पार नेपाल पहुंच रहा गेहूं
Tue, 30 Apr 2024 03:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Tue, 30 Apr 2024 03:05 AM IST
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संशोधित
किसानों के घर से ही खरीदकर तस्कर नेपाल पहुंचा दे रहे हैं भारतीय गेहूं
नेपाल में भाव अधिक होने की वजह से गेहूं की तस्करी में आई है तेजी
सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी चौकसी के बाद हर रोज पकड़ी जा रही है खेप
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की बिक्री कम हो रही है। तस्कर किसानों से उनके घर से ही गेहूं खरीदकर सरहद पार नेपाल पहुंचा दे रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी की वजह से हर दिन सीमा पर गेहूं के खेप की बरामदगी हो रही है। बावजूद इसके तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
गेहूं केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता है। इक्का-दुक्का किसान ही गेहूं बेचने आ रहे हैं। एक-एक बोरी गेहूं की खरीद के लिए क्रय केंद्र प्रभारी किसानों से अपील कर रहे हैं। इसके बावजूद अभी तक 17,203 मिट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है। वहीं, नेपाल में गेहूं का भाव बढ़ा हुआ है। बीते वर्ष से भारत सरकार ने नेपाल में गेहूं के निर्यात पर रोक लगा रखी है। इसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। गेहूं की कटाई के बाद से तस्कर दोबारा से सक्रिय हो गए हैं।
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तस्करी के पीछे का कारण
भारत और नेपाल के बाजार भाव में गेहूं के दाम में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है। इसलिए तस्करों को गेहूं की तस्करी रास आ रही है। भारतीय बाजार में गेहूं 2275 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि सीमा पार पहुंचते ही इसकी कीमत 2600 से 2,700 रुपये हो जाती है। हालांकि, मांग के हिसाब से दाम घटता-बढ़ता रहता है। सीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों के लोग भी अपना गेहूं नेपाल पहुंचाकर लाभ ले रहे हैं।
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84 किमी सीमा पूरी तरह से खुली है
नेपाल सीमा से लगने वाली महराजगंज जनपद की 84 किलोमीटर सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। इस रास्ते से बिना रोक-टोक दोनों देश के लोग आते-जाते हैं। दोनों देशों में बिकने वाली वस्तु की जब भी मांग बढ़ती है, तो उसकी तस्करी शुरू हो जाती है। चाहे वह सोना-चांदी और अन्य सामान हो या अनाज। पिछले एक माह से तस्करों ने अनाज तस्करी शुरू कर दी है।
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नेपाल की फ्लोर मिलें सक्रिय
फसली सीजन में नेपाल की फ्लोर मिल कंपनियों ने भारतीय गेहूं का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। इस कारण भी भारतीय बाजार से गेहूं नेपाल पहुंच रहा है। अब तक कई बार सीमावर्ती क्षेत्र में सीमा पार करने की कोशिश करते हुए एसएसबी और पुलिस की ओर से गेहूं की खेप पकड़ी जा चुकी है।
-- कोट --
समय-समय पर सीमा पर सामानों की बरामदगी की जाती है। तस्करी रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्र में पुलिस कड़ी निगरानी कर रही है।
- आतिश कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक
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कैरियर का लेते हैं सहारा, जितने चक्कर उतने रुपये
जब गेहूं की बड़ी खेप पकड़ी जाने लगी तो तस्करों ने पैंतरा बदल दिया। तस्कर कैरियर का सहारा लेने लगे हैं। बेरोजगारों को पकड़कर 200 रुपये बोरी दे रहे हैं। उन्हें साइकिल से गेहूं इस पार से उस पार करना होता है। जितने चक्कर उतने रुपये मिल जाते हैं।
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गोदाम पर होता है स्टोर, फिर नेपाल की मंडी में पहुंचता है गेहूं
तस्कर की ओर से तैयार किए गए कैरियर को यह बताया जाता है कि यहां से लेकर सीमावर्ती नेपाली गांव स्थित स्थान पर गेहूं ले जाकर रखना है। निर्धारित स्थान पर जब कई बोरियां पहुंच जाती हैं तो खेप को एक गाड़ी में लादकर नेपाल की मंडी में पहुंचाया जाता है। दिन भर यही काम किया जाता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक कारोबारी ने बताया कि भगवानपुर मदरी गांव के निकट श्याम काट, खनुवा, शेख फरेनिया, संपतिहा, कोल्हुई, बरगदवा, ठूठीबारी तक जाल फैला हुआ है। बड़ी मात्रा में गेहूं बार्डर पर करते हैं।
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घर पर ही खरीद ले रहे गेहूं
सरकारी क्रय केंद्रों पर सरकारी मूल्य पर गेहूं को बेचने के लिए किसानों को भाड़ा देकर ले जाना पड़ता है। तौल का भी खर्च लगता है, जबकि आढ़त वाले घर से ही 2150-2250 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीद ले रहे हैं। तौल का भी खर्च नहीं ले रहे हैं। ऐसे में किसान घर पर ही गेहूं बेच दे रहे हैं।
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500-600 रुपये प्रति क्विंटल मुनाफा
नेपाल के गल्ला कारोबारी के मुताबिक, मौजूदा समय में भारतीय मुद्रा के हिसाब से 2600-2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं बिक रहा है। किसी किसी दिन रेट कम हो जाता है तो किसी दिन 50-100 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर आ जाता है। वहीं जब आटा तैयार हो रहा है तो 4000-4500 रुपये क्विंटल में बिकता है।
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गेहूं बरामदगी की आंकड़े
- 22 अप्रैल को सशस्त्र सीमा बल सोनपिपरी बीओपी के जवानों ने गश्त के दौरान 6 बोरी गेहूं बरामद किया था
- 15 अप्रैल को सशस्त्र सीमा बल जोगियाबारी बीओपी के जवान 9 बोरी बरामद मिला था।
- 12 फरवरी को सशस्त्र सीमा बल बीओपी डांडा हेड के जवानों ने गश्त के दौरान तीन बोरी गेहूं बरामद किया था।
- 12 जून को सशस्त्र सीमा बल बीओपी खनुआ के जवानों ने तीन बोरी गेहूं बरामद किया था।
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किसानों के घर से ही खरीदकर तस्कर नेपाल पहुंचा दे रहे हैं भारतीय गेहूं
नेपाल में भाव अधिक होने की वजह से गेहूं की तस्करी में आई है तेजी
सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी चौकसी के बाद हर रोज पकड़ी जा रही है खेप
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं की बिक्री कम हो रही है। तस्कर किसानों से उनके घर से ही गेहूं खरीदकर सरहद पार नेपाल पहुंचा दे रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों की कड़ी निगरानी की वजह से हर दिन सीमा पर गेहूं के खेप की बरामदगी हो रही है। बावजूद इसके तस्करी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
गेहूं केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहता है। इक्का-दुक्का किसान ही गेहूं बेचने आ रहे हैं। एक-एक बोरी गेहूं की खरीद के लिए क्रय केंद्र प्रभारी किसानों से अपील कर रहे हैं। इसके बावजूद अभी तक 17,203 मिट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है। वहीं, नेपाल में गेहूं का भाव बढ़ा हुआ है। बीते वर्ष से भारत सरकार ने नेपाल में गेहूं के निर्यात पर रोक लगा रखी है। इसका फायदा तस्कर उठा रहे हैं। गेहूं की कटाई के बाद से तस्कर दोबारा से सक्रिय हो गए हैं।
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तस्करी के पीछे का कारण
भारत और नेपाल के बाजार भाव में गेहूं के दाम में 500 से 600 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर है। इसलिए तस्करों को गेहूं की तस्करी रास आ रही है। भारतीय बाजार में गेहूं 2275 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि सीमा पार पहुंचते ही इसकी कीमत 2600 से 2,700 रुपये हो जाती है। हालांकि, मांग के हिसाब से दाम घटता-बढ़ता रहता है। सीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों के लोग भी अपना गेहूं नेपाल पहुंचाकर लाभ ले रहे हैं।
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नेपाल सीमा से लगने वाली महराजगंज जनपद की 84 किलोमीटर सीमा पूरी तरह से खुली हुई है। इस रास्ते से बिना रोक-टोक दोनों देश के लोग आते-जाते हैं। दोनों देशों में बिकने वाली वस्तु की जब भी मांग बढ़ती है, तो उसकी तस्करी शुरू हो जाती है। चाहे वह सोना-चांदी और अन्य सामान हो या अनाज। पिछले एक माह से तस्करों ने अनाज तस्करी शुरू कर दी है।
नेपाल की फ्लोर मिलें सक्रिय
फसली सीजन में नेपाल की फ्लोर मिल कंपनियों ने भारतीय गेहूं का स्टॉक करना शुरू कर दिया है। इस कारण भी भारतीय बाजार से गेहूं नेपाल पहुंच रहा है। अब तक कई बार सीमावर्ती क्षेत्र में सीमा पार करने की कोशिश करते हुए एसएसबी और पुलिस की ओर से गेहूं की खेप पकड़ी जा चुकी है।
समय-समय पर सीमा पर सामानों की बरामदगी की जाती है। तस्करी रोकने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्र में पुलिस कड़ी निगरानी कर रही है।
- आतिश कुमार सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक
कैरियर का लेते हैं सहारा, जितने चक्कर उतने रुपये
जब गेहूं की बड़ी खेप पकड़ी जाने लगी तो तस्करों ने पैंतरा बदल दिया। तस्कर कैरियर का सहारा लेने लगे हैं। बेरोजगारों को पकड़कर 200 रुपये बोरी दे रहे हैं। उन्हें साइकिल से गेहूं इस पार से उस पार करना होता है। जितने चक्कर उतने रुपये मिल जाते हैं।
गोदाम पर होता है स्टोर, फिर नेपाल की मंडी में पहुंचता है गेहूं
तस्कर की ओर से तैयार किए गए कैरियर को यह बताया जाता है कि यहां से लेकर सीमावर्ती नेपाली गांव स्थित स्थान पर गेहूं ले जाकर रखना है। निर्धारित स्थान पर जब कई बोरियां पहुंच जाती हैं तो खेप को एक गाड़ी में लादकर नेपाल की मंडी में पहुंचाया जाता है। दिन भर यही काम किया जाता है। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक कारोबारी ने बताया कि भगवानपुर मदरी गांव के निकट श्याम काट, खनुवा, शेख फरेनिया, संपतिहा, कोल्हुई, बरगदवा, ठूठीबारी तक जाल फैला हुआ है। बड़ी मात्रा में गेहूं बार्डर पर करते हैं।
घर पर ही खरीद ले रहे गेहूं
सरकारी क्रय केंद्रों पर सरकारी मूल्य पर गेहूं को बेचने के लिए किसानों को भाड़ा देकर ले जाना पड़ता है। तौल का भी खर्च लगता है, जबकि आढ़त वाले घर से ही 2150-2250 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं खरीद ले रहे हैं। तौल का भी खर्च नहीं ले रहे हैं। ऐसे में किसान घर पर ही गेहूं बेच दे रहे हैं।
500-600 रुपये प्रति क्विंटल मुनाफा
नेपाल के गल्ला कारोबारी के मुताबिक, मौजूदा समय में भारतीय मुद्रा के हिसाब से 2600-2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं बिक रहा है। किसी किसी दिन रेट कम हो जाता है तो किसी दिन 50-100 रुपये प्रति क्विंटल का अंतर आ जाता है। वहीं जब आटा तैयार हो रहा है तो 4000-4500 रुपये क्विंटल में बिकता है।
गेहूं बरामदगी की आंकड़े
- 22 अप्रैल को सशस्त्र सीमा बल सोनपिपरी बीओपी के जवानों ने गश्त के दौरान 6 बोरी गेहूं बरामद किया था
- 15 अप्रैल को सशस्त्र सीमा बल जोगियाबारी बीओपी के जवान 9 बोरी बरामद मिला था।
- 12 फरवरी को सशस्त्र सीमा बल बीओपी डांडा हेड के जवानों ने गश्त के दौरान तीन बोरी गेहूं बरामद किया था।
- 12 जून को सशस्त्र सीमा बल बीओपी खनुआ के जवानों ने तीन बोरी गेहूं बरामद किया था।