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एफपीओ बनाकर रेशम कीट पालन पर जोर दें जिम्मेदार
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जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने किया राजकीय रेशम फार्म डोमा का निरीक्षण
महराजगंज। कृषक उत्पादक संघ (एफपीओ) बनाकर जिले में रेशम कीट पालन पर जोर दिया जाए। इससे जुड़ कर किसान जहां अपनी आय बढ़ा सकते हैं, वहीं रेशम के उत्पादन मेेें जिले को नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
ये बातें जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने रविवार को राजकीय रेशम फार्म डोमा का निरीक्षण करने के उपरांत कहीं। उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए इससे जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सहायक निदेशक रेशम को भी निर्देशित किया कि अधिक से अधिक किसानों को रेशम पालन से जोड़ते हुए उसका लाभ दिलाएं। किसान पार्वती देवी, पूजा व विश्वनाथ ने रेशम से होने वाली आय के बारे में अपने अनुभव को साझा किया। सहायक निदेशक रेशम ने बताया कि पिछले वर्ष 1,11,600 किग्रा कोया का उत्पादन किया गया था। इस बार इसे बढ़ाने के दृष्टिगत प्रयास जारी है। जिले में स्थित सात फार्म पर अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित किए जाने की कार्ययोजना बनाई जाएगी। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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शहतूत का पौधा भी लगाया
डीएम सत्येंद्र कुमार ने डोमा में निरीक्षण के उपरांत शहतूत का पौधा भी लगाया। उन्होंने रेशम के उत्पादन के दायरे को बढ़ाने के लिए सभी को प्रोत्साहित भी किया।
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महराजगंज। कृषक उत्पादक संघ (एफपीओ) बनाकर जिले में रेशम कीट पालन पर जोर दिया जाए। इससे जुड़ कर किसान जहां अपनी आय बढ़ा सकते हैं, वहीं रेशम के उत्पादन मेेें जिले को नई पहचान दिलाने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं।
ये बातें जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने रविवार को राजकीय रेशम फार्म डोमा का निरीक्षण करने के उपरांत कहीं। उन्होंने किसानों से बातचीत करते हुए इससे जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। सहायक निदेशक रेशम को भी निर्देशित किया कि अधिक से अधिक किसानों को रेशम पालन से जोड़ते हुए उसका लाभ दिलाएं। किसान पार्वती देवी, पूजा व विश्वनाथ ने रेशम से होने वाली आय के बारे में अपने अनुभव को साझा किया। सहायक निदेशक रेशम ने बताया कि पिछले वर्ष 1,11,600 किग्रा कोया का उत्पादन किया गया था। इस बार इसे बढ़ाने के दृष्टिगत प्रयास जारी है। जिले में स्थित सात फार्म पर अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित किए जाने की कार्ययोजना बनाई जाएगी। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
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शहतूत का पौधा भी लगाया
डीएम सत्येंद्र कुमार ने डोमा में निरीक्षण के उपरांत शहतूत का पौधा भी लगाया। उन्होंने रेशम के उत्पादन के दायरे को बढ़ाने के लिए सभी को प्रोत्साहित भी किया।
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