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सरयू नहर परियोजना में नहीं आया पानी, किसान में रोष

Mon, 20 Dec 2021 12:09 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 20 Dec 2021 12:09 AM IST
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Saryoo canal dry today also
सरयू नहर में नहीं आया पानी, किसानों में रोष
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लक्ष्मीपुर (महराजगंज)। क्षेत्र से गुजरने वाली सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण हुए एक सप्ताह गुजर गए लेकिन नहर में पानी नहीं आ सका जिससे किसानों ने आक्रोश व्यक्त किया है। गेहूं की बुआई होने के बाद सिंचाई प्रभावित हो रही है। पांच नदियों को जोड़ने वाली वर्ष 1978 में शुरू हुई सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 दिसंबर 2021 को किया था। तभी किसानों में आस जगी कि अब उनके खेतों की सिंचाई आसानी से हो सकेगी लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। क्षेत्र के कई स्थानों पर पुल का निर्माण होने के नाते पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।
लक्ष्मीपुर क्षेत्र के किसान रामदेव सहानी, दिवाकर, ओम प्रकाश, रामनाथ वर्मा का कहना है कि पता नहीं नहर में पानी कब आएगा। कोई बताने वाला भी नहीं है। गेहूं खेत में पानी की जरूरत है। इस महंगाई के समय में डीजल भर कर पंपिंग सेट से खेत की सिंचाई करना फायदे का सौदा नहीं रह गया है। क्या होगा पता नहीं। मौजूदा समय में गेहूं की फसल की सिंचाई की तैयारी में किसान जुटे हैं। फसल की समय पर सिंचाई यदि नहीं होती है, तो इसका प्रतिकूल प्रभाव उपज पर पड़ेगा। किसान गेहूं की फसल की सिंचाई करने के लिए नहर में पानी का इंतजार किया जा रहा है। पंचम, श्रीराम, रामनरेश यादव, रामउग्रह यादव, विनोद चौधरी, दीनानाथ, त्रिलोकी, दिवाकर जायसवाल, ओमप्रकाश चौरसिया, रामनिवास, विक्रम आदि ने नहर में पानी नहीं आने पर रोष प्रकट किया।
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सरयू नहर परियोजना के एसडीओ अनीश सोनकर ने बताया कि कुछ स्थानों पर पुल के नीचे रेगुलेटर लगाया जा रहा है। निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। तीन सप्ताह के भीतर कार्य पूर्ण कर लिए जाएंगे। उसके बाद नहर में सप्लाई बहाल की जाएगी।
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44 वर्ष के अंतराल के बाद सरयू नहर परियोजना का लोकार्पण
आंकड़ों के मुताबिक सरयू नहर परियोजना उत्तर प्रदेश में सबसे बड़ी है। इससे उत्तर प्रदेश के बहराइच, गोंडा, बस्ती, श्रावस्ती, बलरामपुर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, गोरखपुर और महाराजगंज के 25-30 लाख किसानों को लाभ मिल सकता है। इस नहर से 14.04 लाख हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा होगी। इस परियोजना के तहत सिंचित क्षेत्र 4.04 लाख हेक्टेयर होगा। परियोजना के तहत पांच नदियों घाघरा, राप्ती, बाणगंगा, सरयू और रोहिणी को जोड़ा गया है। नहर की कुल लंबाई 6,600 किलोमीटर है और इन्हें 318 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर से जोड़ा गया है।
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