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Maharajganj News: साधो बैंड ने राममय कर दिया महराजगंज महोत्सव का मंच

Sat, 05 Oct 2024 04:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sat, 05 Oct 2024 04:33 AM IST
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Sadho Band enthralled the stage of Maharajganj Mahotsav
पीजी कालेज के ग्राउंड पर आयोजित महाराजगंज महोत्सव में कार्यक्रम प्रस्तुत करती साधू बैंड।
महराजगंज। शुक्रवार की शाम सात बजे महराजगंज महोत्सव के मंच पर रक्तबीज व महिषासुर वध, देवताओं व दानवों के समुद्र मंथन, जन कल्याण के लिए भगवान शिव के हलाहल विष के पान करने की कथा लेजर शो के माध्यम से प्रदर्शित की गई। दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों ने लेजर शो की प्रस्तुती देख भगवती दुर्गा का जयघोष किया। स्थानीय कलाकारों ने गजल व सूफी संगीत के जरिए दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया।
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8:30 बजे महोत्सव का मंच गोरखपुर से आई महिला कलाकार अनन्या सिंह ने दुर्गा सप्तशती के श्लोक या देवी सर्वभूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: के साथ कार्यक्रम प्रारंभ किया। उनके रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया...रघुकुल नंदन कब आएंगे शबरी की दुअरिया.. भजन ने दर्शकों की रगों में श्रीराम भक्ति का संचार किया। मालिनी अवस्थी के रेलिया बैरन पिया को लिए जाय रे.. सुनाकर दर्शकों पर कंट्रोल किया।
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तार बिजली से पतले हमारे पिया..ओ रे सासू बता तूने ये क्या किया..। रात्रि नौ बजे राज्य सूचना आयुक्त डा. दिलीप अग्निहोत्री ने मंच पर दीप प्रज्वलन कर दर्शकों को जनपद के स्थापना दिवस की बधाई दी। देश विदेश के तरह-तरह की संस्कृतियों का समावेश रखने वाले साधो बैंड के कलाकारों ने रात्रि 9,:30 बजे मंच पर पदार्पण किया। भारत माता के जयघोष से कार्यक्रम शुरू किया। बाहुबली फिल्म के थीम सांग कौन है कौन है वो कहां से है आया.. की प्रस्तुती दी। मैं जहां रहूं जहां भी रहू.. तेरी याद साथ है कि लहरियों में डूबते-उतराते रहे। जिस गाने के लिए इस बैंड को भारत सरकार ने इन्हें ब्रांड एंबेसडर बनाकर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद बुलाया था वह भजन
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मेरी झोपड़ी के भाग्य आज खुल जाएंगे.. राम आएंगे- आएंगे राम आएंगे... सुनाकर अपने साथ दर्शकों को भी गाने के लिए मजबूर कर दिया। इस गाने के बीच-बीच में जय श्रीराम का जयघोष गजब का रोमांच पैदा करता रहा। देर रात तक गीतों की श्रृंखला चलती रही और दर्शक बिना रात की फ़िक्र किए लुत्फ उठाते रहे। दूल्हे का सेहरा सुहाना लगता है.. दुल्हन का तो दिल दिवाना लगता है के जरिए सूफी संगीत की ओर भी ले जाने का प्रयत्न कलाकारों ने किया।
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