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Maharajganj News: सुस्त गति से हो रहा रोहिन बैराज निर्माण
Fri, 15 Mar 2024 03:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 15 Mar 2024 03:32 AM IST
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नौतनवां। तहसील क्षेत्र के रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी पर बन रहा डिजिटल बैराज निर्माण कार्य सुस्त गति से चल रहा है। निर्माण कार्य मार्च में ही पूरा होना था, लेकिन निर्माण कार्य में देरी के चलते मई तक पूरा होने की संभावना है। निर्माण कार्य अभी 75 फीसदी ही हो सका है।
क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए वर्ष 1947 में रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी में बीयर गेट बनाकर रोहिन नहर प्रणाली की नहरों में पानी की आपूर्ति की जाती थी। अगस्त 2005 में आई भीषण बाढ़ से रोहिन का बीयर गेट टूट गया, जिससे नहरों में पानी आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। किसानों की सिंचाई की समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग ने नदी में अस्थाई कच्चा बांध बनाकर पानी आपूर्ति शुरू की, लेकिन बरसात आने से पहले बाढ़ से बचाव के लिए विभाग द्वारा बांध काट दिया जाता था इससे किसानों को केवल रबी की फसल की ही सिंचाई की सुविधा मिल पाती थी।
2005 में बीयर गेट टूटा तो तत्कालीन सपा सरकार ने छह करोड़ रुपये बांध निर्माण के लिए दी थी। वर्ष 2008 में शासन द्वारा स्वीकृति मिलने पर बीयर गेट निर्माण कार्य शुरू कराया गया, लेकिन तेज बाढ़ की धारा में बीयर गेट का पिलर क्षतिग्रस्त हो गया जिससे निर्माण कार्य बंद हो गया। उसके बाद से अस्थाई कच्चा बांध बनाकर पानी की आपूर्ति होती रही। वर्ष 2018 में योगी की सरकार बनी तो रोहिन नदी पर ऑटोमेटिक बैराज बनाने की स्वीकृति दी और 148 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली। 2020 में ठेका हुआ, जिसमें रायल इन्फ्रा कंस्ट्रू प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को प्रोजेक्ट निर्माण के लिए ठेका मिला, जिसकी फंडिंग नाबार्ड संस्था द्वारा की गई। उसके बाद 1.27 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण कर बैराज निर्माण कार्य शुरू किया गया।
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अवर अभियंता मुकेश कुमार ने बताया कि अक्तूबर 2022 से बैराज निर्माण कार्य शुरू हुआ। अब तक 75 से 80 फीसदी के बीच निर्माण कार्य हो चुका है। टेक्निकल समस्या आने से निर्माण कार्य में देरी हुई है। मई तक निर्माण कार्य पूरा होने की संभावना है। 148 करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट निर्मित हो रहा है, जिसमें 87 करोड़ रुपये केवल रोहिन बैराज में लगेगा। शेष धन का खर्च नहरों की सफाई, पुलिया आदि मरम्मत कार्यों में खर्च होगा।
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45 किलोमीटर लंबी है रोहिन नहर प्रणाली
रोहिन नहर प्रणाली से 65 गांवों के 16000 किसानों के खेतों की सिंचाई होती थी। इससे 8881 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती थी। रोहिन नहर प्रणाली की लंबाई 45 किलोमीटर है।
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किसान बोले-बैराज बनाने में हो रही देरी
रोहिन बैराज का निर्माण कार्य मार्च तक पूरा होना था, लेकिन अभी तक 75 फीसदी कार्य हो सका है। किसान योगेश सिंह, राजाराम, चंद्रजीत यादव, रामप्यारे यादव, जिताई, लक्ष्मी शंकर यादव, मुनीर अहमद, शाह आलम, मकसूद आलम, राम बहाल, रसीद अहमद, हेलाल अहमद, मनीराम, हरखू, दशरथ, मनमोहन आदि किसानों ने बताया कि बैराज निर्माण कार्य में देरी होने से लग रहा है कि धान रोपाई के समय नहर में पानी आपूर्ति नहीं हो पाएगी।
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क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए वर्ष 1947 में रतनपुर के मिश्रौलिया में रोहिन नदी में बीयर गेट बनाकर रोहिन नहर प्रणाली की नहरों में पानी की आपूर्ति की जाती थी। अगस्त 2005 में आई भीषण बाढ़ से रोहिन का बीयर गेट टूट गया, जिससे नहरों में पानी आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई। किसानों की सिंचाई की समस्या को देखते हुए सिंचाई विभाग ने नदी में अस्थाई कच्चा बांध बनाकर पानी आपूर्ति शुरू की, लेकिन बरसात आने से पहले बाढ़ से बचाव के लिए विभाग द्वारा बांध काट दिया जाता था इससे किसानों को केवल रबी की फसल की ही सिंचाई की सुविधा मिल पाती थी।
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2005 में बीयर गेट टूटा तो तत्कालीन सपा सरकार ने छह करोड़ रुपये बांध निर्माण के लिए दी थी। वर्ष 2008 में शासन द्वारा स्वीकृति मिलने पर बीयर गेट निर्माण कार्य शुरू कराया गया, लेकिन तेज बाढ़ की धारा में बीयर गेट का पिलर क्षतिग्रस्त हो गया जिससे निर्माण कार्य बंद हो गया। उसके बाद से अस्थाई कच्चा बांध बनाकर पानी की आपूर्ति होती रही। वर्ष 2018 में योगी की सरकार बनी तो रोहिन नदी पर ऑटोमेटिक बैराज बनाने की स्वीकृति दी और 148 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली। 2020 में ठेका हुआ, जिसमें रायल इन्फ्रा कंस्ट्रू प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को प्रोजेक्ट निर्माण के लिए ठेका मिला, जिसकी फंडिंग नाबार्ड संस्था द्वारा की गई। उसके बाद 1.27 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण कर बैराज निर्माण कार्य शुरू किया गया।
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अवर अभियंता मुकेश कुमार ने बताया कि अक्तूबर 2022 से बैराज निर्माण कार्य शुरू हुआ। अब तक 75 से 80 फीसदी के बीच निर्माण कार्य हो चुका है। टेक्निकल समस्या आने से निर्माण कार्य में देरी हुई है। मई तक निर्माण कार्य पूरा होने की संभावना है। 148 करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट निर्मित हो रहा है, जिसमें 87 करोड़ रुपये केवल रोहिन बैराज में लगेगा। शेष धन का खर्च नहरों की सफाई, पुलिया आदि मरम्मत कार्यों में खर्च होगा।
45 किलोमीटर लंबी है रोहिन नहर प्रणाली
रोहिन नहर प्रणाली से 65 गांवों के 16000 किसानों के खेतों की सिंचाई होती थी। इससे 8881 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती थी। रोहिन नहर प्रणाली की लंबाई 45 किलोमीटर है।
किसान बोले-बैराज बनाने में हो रही देरी
रोहिन बैराज का निर्माण कार्य मार्च तक पूरा होना था, लेकिन अभी तक 75 फीसदी कार्य हो सका है। किसान योगेश सिंह, राजाराम, चंद्रजीत यादव, रामप्यारे यादव, जिताई, लक्ष्मी शंकर यादव, मुनीर अहमद, शाह आलम, मकसूद आलम, राम बहाल, रसीद अहमद, हेलाल अहमद, मनीराम, हरखू, दशरथ, मनमोहन आदि किसानों ने बताया कि बैराज निर्माण कार्य में देरी होने से लग रहा है कि धान रोपाई के समय नहर में पानी आपूर्ति नहीं हो पाएगी।