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Maharajganj News: निलंबन और अधिकार सीज करने तक सिमटे जिम्मेदार, नहीं हो रही रिकवरी

Mon, 12 Jan 2026 02:07 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 12 Jan 2026 02:07 AM IST
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Responsibility is limited to suspension and seizure of rights, recovery is not taking place
सरकारी योजनाओं में अपात्रों को लाभार्थी बनाने का मामला
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नियम दरकिनार कर पक्के मकान वालों को दिया था आवास योजना का लाभ
महराजगंज। सरकारी योजनाओं में अपात्रों को लाभार्थी देने वालों के खिलाफ निलंबन और अधिकार सीज करने की कार्रवाई तो हो रही है लेकिन इस्तेमाल की गई राशि की रिकवरी नहीं हो रही। जिम्मेदार यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि अभी कुछ मामलों में जांच-पड़ताल जारी है, इसी कारण रिकवरी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है। तकनीकी पेंच यह बताया जा रहा है कि पात्रता शर्ताें की बिंदुवार जांच पूरी नहीं की गई है।
करीब एक सप्ताह पहले हरखोड़ा गांव में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपात्र को लाभार्थी बनाने का खुलासा हुआ था। मामले में सेक्रेटरी का निलंबन व प्रधान का अधिकार सीज कर दिया गया लेकिन अपात्रों से करीब 4 लाख की रिकवरी अभी तक नहीं हो पाई है। जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत हरखोड़ा में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत जिन चार लोगों को लाभ दिया गया, उनमें सुमन वर्मा, अमरावती, त्रिभुवन और रमनी शामिल हैं। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इन सभी के पास पहले से पक्का मकान था। गांव के मेराजुद्दीन सहित अन्य ग्रामीणों ने इस गड़बड़ी की शिकायत प्रशासन से की थी। शिकायत के बाद जिलाधिकारी के निर्देश पर पीडी रामदरश चौधरी ने जांच कराई। जांच के दौरान कुल नौ मकानों का स्थलीय सत्यापन किया गया। सत्यापन में चार लाभार्थी अपात्र पाए गए। जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर उल्लेख किया गया कि इन लोगों को योजना का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए था।
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जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन ग्राम विकास अधिकारी चंद्रप्रकाश गुप्ता को निलंबित कर दिया और ग्राम प्रधान अनीता के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए। कार्रवाई यहीं तक सीमित रह गई। जांच में सामने आया कि 4.80 लाख रुपये की वसूली अभी तक नहीं हो सकी है। इसी तरह लक्ष्मीपुर विकास खंड की ग्राम पंचायत बकैनिया हरैया में वर्ष 2021 से अब तक कराए गए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता सामने आई थी। शिकायत के आधार पर जिलाधिकारी के निर्देश पर कराई गई संयुक्त जांच में कुल 6.10 लाख रुपये के दुरुपयोग की पुष्टि हुई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर 30 दिसंबर को जिलाधिकारी ने ग्राम प्रधान अखिलेश्वर शुक्ल के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार तत्काल प्रभाव से सीज कर दिए, जबकि ग्राम पंचायत सचिव अश्वनी कुमार पटेल को निलंबित कर दिया गया था। मामले में भी अब तक धनराशि की रिकवरी नहीं हो सकी है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना में नियमों की अनदेखी
बकैनिया हरैया ग्राम पंचायत की जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत तीन ऐसे लाभार्थियों को योजना की तीनों किश्तें जारी कर दी गईं, जो पात्रता की शर्तों को पूरा नहीं करते थे। स्थलीय सत्यापन में पाया गया कि पूनम, रीना और मालती पहले से ही पक्के मकानों में रह रही थीं। जांच समिति ने ग्राम प्रधान और सचिव द्वारा प्रस्तुत स्पष्टीकरण और शपथ पत्रों की गहन जांच की लेकिन उन्हें तथ्यहीन और भ्रामक बताते हुए खारिज कर दिया। समिति का स्पष्ट कहना है कि पात्रता की सही जांच किए बिना सरकारी धनराशि जारी की गई। यह नियमों का उल्लंघन है।
मनरेगा कार्यों में भी मिली गड़बड़ी
बकईनिया गांव में जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितता की गई। इंटरलॉकिंग सड़क, सीसी रोड और अन्य निर्माण कार्यों में मानकों की अनदेखी की गई। कई स्थानों पर अधूरा कार्य कर पूरा भुगतान निकाल लिया गया जबकि कहीं निर्माण सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब पाई गई। मनरेगा मद में कुल 2.37 लाख रुपये के दुरुपयोग की पुष्टि हुई है। इसके बावजूद संबंधित लोगों से अभी तक एक रुपया भी वसूल नहीं किया जा सका है।
वित्त आयोग मद में भी भारी अनियमितता
बकईनिया गांव में केंद्रीय और राज्य वित्त आयोग मद से कराए गए कुल 16 कार्यों में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आई है। जांच में पाया गया कि कई स्थानों पर राबिस बिछाए बिना ही इंटरलॉकिंग सड़क बना दी गई और कहीं नाली निर्माण किए बिना ही भुगतान कर दिया गया। कुछ कार्यों में सड़क और नाली की लंबाई-चौड़ाई कम रखकर भी पूरा भुगतान निकाल लिया गया। इस मद में कुल 3.72 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि माप पुस्तिका (एमबी) का संधारण शासनादेश के विपरीत अवर अभियंता से नीचे स्तर के तकनीकी सहायकों से कराया गया।

वर्जन
मामले में नियम के मुताबिक जरूरी प्रक्रिया पूरी करते हुए रिकवरी कराई जाएगी। पात्र लाभार्थियों को योजना का लाभ दिलाने के लिए हर संभव प्रयास जारी है। - महेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य विकास अधिकारी
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