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Maharajganj News: मौसम में उतार-चढ़ाव से सांस संबंधी रोगी बढ़े
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डॉक्टरों ने दी ठंडी चीजों के सेवन से बचने की सलाह
प्रतिदिन 30 से 40 मरीज सांस फूलने, खांसी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर पहुंच रहे
महराजगंज। सुबह हल्की ठंड, दोपहर में तेज धूप और रात में फिर तापमान गिरने से लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। मौसम में बदलाव के कारण जिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को सांस संबंधी रोगियों की संख्या में वृद्धि देखी गई। डॉक्टरों के अनुसार, एक दिन में 30 से 40 नए मरीज सांस फूलने, खांसी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह पहले रोजाना ऐसे मरीजों की संख्या 10 से 15 होती थी।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में दिन और रात के तापमान में तेज उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में हवा में नमी कम होने और धूल-मिट्टी के कण बढ़ने से श्वसन तंत्र प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से सरसों के खेतों में फसल कटाई के मौसम में सरसों के फूलों से निकलने वाले पराग कण हवा में उड़कर एलर्जी ट्रिगर कर रहे हैं। ये पराग कण दमा अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस और अन्य सांस संबंधी रोगियों के लिए बहुत हानिकारक साबित हो रहे हैं। दमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि बुजुर्ग, बच्चे और पहले से एलर्जी या दमा से पीड़ित लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। मौसम की यह अनिश्चितता वायरल संक्रमण को भी बढ़ावा दे रही है। इस वजह से खांसी, जुकाम और बुखार के साथ सांस की समस्या कॉमन हो गई है। अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है, और डॉक्टरों को लगातार सलाह देनी पड़ रही है।
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बचाव के उपाय बताते हुए डॉक्टर ने सुझाव दिया कि लोगों को बाहर निकलते समय मास्क अवश्य पहनना चाहिए। धूल-धक्कड़ वाले इलाकों से बचें, खासकर सरसों के खेतों के आसपास। ठंडी चीजों जैसे आइसक्रीम, ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन बिल्कुल न करें। घर में हवा को साफ रखने के लिए नमी बनाए रखें और इनडोर प्लांट्स का उपयोग करें। यदि सांस फूलने या सीने में जकड़न महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर दवा और इन्हेलर का उपयोग दमा के अटैक को रोक सकता है।
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प्रतिदिन 30 से 40 मरीज सांस फूलने, खांसी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर पहुंच रहे
महराजगंज। सुबह हल्की ठंड, दोपहर में तेज धूप और रात में फिर तापमान गिरने से लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। मौसम में बदलाव के कारण जिला अस्पताल में बृहस्पतिवार को सांस संबंधी रोगियों की संख्या में वृद्धि देखी गई। डॉक्टरों के अनुसार, एक दिन में 30 से 40 नए मरीज सांस फूलने, खांसी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। एक सप्ताह पहले रोजाना ऐसे मरीजों की संख्या 10 से 15 होती थी।
जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में दिन और रात के तापमान में तेज उतार-चढ़ाव हो रहा है। ऐसे में हवा में नमी कम होने और धूल-मिट्टी के कण बढ़ने से श्वसन तंत्र प्रभावित हो रहा है। विशेष रूप से सरसों के खेतों में फसल कटाई के मौसम में सरसों के फूलों से निकलने वाले पराग कण हवा में उड़कर एलर्जी ट्रिगर कर रहे हैं। ये पराग कण दमा अस्थमा, एलर्जिक राइनाइटिस और अन्य सांस संबंधी रोगियों के लिए बहुत हानिकारक साबित हो रहे हैं। दमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है।
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डॉ. वैभव श्रीवास्तव ने कहा कि बुजुर्ग, बच्चे और पहले से एलर्जी या दमा से पीड़ित लोग सबसे अधिक प्रभावित हैं। मौसम की यह अनिश्चितता वायरल संक्रमण को भी बढ़ावा दे रही है। इस वजह से खांसी, जुकाम और बुखार के साथ सांस की समस्या कॉमन हो गई है। अस्पताल के ओपीडी में मरीजों की भीड़ बढ़ रही है, और डॉक्टरों को लगातार सलाह देनी पड़ रही है।
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बचाव के उपाय बताते हुए डॉक्टर ने सुझाव दिया कि लोगों को बाहर निकलते समय मास्क अवश्य पहनना चाहिए। धूल-धक्कड़ वाले इलाकों से बचें, खासकर सरसों के खेतों के आसपास। ठंडी चीजों जैसे आइसक्रीम, ठंडा पानी या कोल्ड ड्रिंक्स का सेवन बिल्कुल न करें। घर में हवा को साफ रखने के लिए नमी बनाए रखें और इनडोर प्लांट्स का उपयोग करें। यदि सांस फूलने या सीने में जकड़न महसूस हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। समय पर दवा और इन्हेलर का उपयोग दमा के अटैक को रोक सकता है।