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Maharajganj News: पीएचसी में सांस के रोगियों की होगी स्क्रीनिंग
Sat, 01 Mar 2025 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 01 Mar 2025 12:57 AM IST
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महराजगंज। जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सांस फूलने की समस्या से जूझ रहे मरीजों की स्क्रीनिंग की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गैर संचारी रोग (एनसीडी) कार्यक्रम के तहत तैयारी की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। यहां ओपीडी के दौरान दमा और अन्य सांस संबंधी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बढ़ते प्रदूषण, धूम्रपान और बदलती जीवनशैली के कारण लोग इन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राथमिक स्तर पर ही मरीजों की पहचान कर उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने की योजना बनाई गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एनसीडी कार्यक्रम के तहत, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों का विशेष रूप से सांस फूलने की समस्याओं के निजात के लिए स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके बाद स्पाइरोमिट्री टेस्ट के जरिये मरीज की फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच की जाएगी।
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पल्स ऑक्सीमीटर से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर मापा जाएगा। इसके अलावा मरीजों से उनके लक्षणों और जीवनशैली से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। स्क्रीनिंग जांच विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जो लंबे समय से खांसी, सांस फूलने, सीने में जकड़न या थकान की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे मरीजों को इलाज में सहूलियत मिलेगी।
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जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित है। यहां ओपीडी के दौरान दमा और अन्य सांस संबंधी बीमारियों के मामलों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। बढ़ते प्रदूषण, धूम्रपान और बदलती जीवनशैली के कारण लोग इन बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राथमिक स्तर पर ही मरीजों की पहचान कर उन्हें आवश्यक चिकित्सा सहायता प्रदान करने की योजना बनाई गई है।
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स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एनसीडी कार्यक्रम के तहत, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले मरीजों का विशेष रूप से सांस फूलने की समस्याओं के निजात के लिए स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके बाद स्पाइरोमिट्री टेस्ट के जरिये मरीज की फेफड़ों की कार्यक्षमता की जांच की जाएगी।
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पल्स ऑक्सीमीटर से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर मापा जाएगा। इसके अलावा मरीजों से उनके लक्षणों और जीवनशैली से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। स्क्रीनिंग जांच विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा जो लंबे समय से खांसी, सांस फूलने, सीने में जकड़न या थकान की समस्या से जूझ रहे हैं। ऐसे मरीजों को इलाज में सहूलियत मिलेगी।