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Maharajganj News: ओबरी गांव में दिखा दुर्लभ हाड़ील पक्षी, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी

Tue, 01 Sep 2026 01:31 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 01 Sep 2026 01:31 AM IST
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Rare Hadil bird spotted in Obari village; Forest Department steps up monitoring.
ओबरी गांव में इमली के पेड़ पर बैठा हांडिल पक्षी का जोड़ा।
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एक सप्ताह से पुराने इमली के पेड़ पर दिख रहा है पक्षी का जोड़ा

सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के निचलौल रेंज अंतर्गत है ग्रामसभा ओबरी

निचलौल। सोहगीबरवा वन्यजीव प्रभाग के निचलौल रेंज अंतर्गत ग्रामसभा ओबरी में इन दिनों दुर्लभ हाड़ील पक्षी का जोड़ा ग्रामीणों के बीच कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।
गांव निवासी गोविंद चौधरी के घर के पीछे स्थित पुराने इमली के पेड़ पर करीब एक सप्ताह से पक्षी का जोड़ा लगातार दिखाई दे रहा है। शुरुआत में ग्रामीणों को आशंका थी कि पक्षी का पैर पेड़ की डाली में फंस गया है, जिसके कारण वह उड़ नहीं पा रहा है। हालांकि वन विभाग और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) की टीम के निरीक्षण में पैर फंसा होने की पुष्टि नहीं हुई। टीम के अनुसार पक्षी संभवत: इसी पेड़ पर अपना घोंसला बनाने की तैयारी में है, जिसके चलते वह लंबे समय से यहां रुके हुए हैं।
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पक्षी को कई दिनों तक एक ही स्थान पर रहने और उसके जोड़े के बार-बार पेड़ पर आने-जाने की जानकारी होने पर ग्राम प्रधान प्रतिनिधि कमलेश ने वन विभाग को सूचना दी। वन क्षेत्राधिकारी निचलौल सुनील कुमार राव, वन दारोगा हरेराम यादव और डब्ल्यूटीआई के सदस्य रविंद्र मिश्रा ने टीम के साथ मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने ग्रामीणों से पक्षी के आसपास भीड़ न लगाने, उसे परेशान नहीं करने और उसके प्राकृतिक आवास में किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करने की अपील की है। इस पक्षी की पहचान दुर्लभ हाड़ील के रूप में की गई है।
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हाड़ील को आसाम में कहा जाता है हरगिला
हाड़ील को असम में स्थानीय बोली में हरगिला कहा जाता है। यह बड़े आकार का दुर्लभ पक्षी है। गर्दन के नीचे बड़ी थैलीनुमा संरचना, भारी चोंच और बाल रहित सिर इसकी प्रमुख पहचान है। वन विभाग के अनुसार यह नम भूमि, दलदली क्षेत्र, आर्द्रभूमि और नदियों के आसपास रहना पसंद करता है। यह जलीय जीव-जंतुओं के साथ सांप, मेंढक और चूहे आदि का भी शिकार करता है। चूहों को शिकार बनाने के कारण इसे किसानों का मित्र भी माना जाता है। वन विभाग के अनुसार, हाड़ील का प्रजनन काल जुलाई से सितंबर के बीच होता है। यह पुराने और ऊंचे पेड़ों की शाखाओं पर घोंसला बनाता है। सामान्य तौर पर मादा दो से चार अंडे देती है और नर-मादा मिलकर अंडों की देखभाल करते हैं। ओबरी में पक्षी के जोड़े की लगातार मौजूदगी को देखते हुए वन विभाग इसके संभावित प्रजनन को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है।

वर्जन
हाड़ीन पक्षी सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग की निचलौल रेंज के साथ ही पूरे क्षेत्र के लिए दुर्लभ पक्षी है। दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी एशिया के सीमित हिस्सों में ही इसकी मौजूदगी बची है। भारत में यह मुख्य रूप से आसाम के ब्रह्मपुत्र घाटी और गुवाहाटी के आसपास के क्षेत्रों के अलावा बिहार के भागलपुर क्षेत्र में भी पाया जाता है।
-अरशद हुसैन वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सदस्य
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