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बारिश : शहर की सड़कें, स्टेडियम और पार्क जलमग्न
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धनेवा- धनेई स्थित स्टेडियम परिसर में भरा पानी।
- फोटो : MAHARAJGANJ
बारिश : शहर की सड़कें, स्टेडियम और पार्क जलमग्न
जल निकासी की व्यवस्था की खुली पोल, 37 एमएम हुई बारिश, धान की फसल को लाभ
महराजगंज। बारिश से शहर में जलभराव होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। शहर के कई मोहल्लों की सड़कें , पार्क व स्टेडियम जलमग्न हो गए। शनिवार रात शुरू हुई बारिश रविवार दोपहर तक होती रही जिससे शहर में जगह-जगह जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई। वहीं, सूख रही धान की फसल को बारिश से संजीवनी मिली है। पिछले चौबीस घंटे में 37 एमएम बारिश हुई जो इस महीने की सर्वाधिक दर्ज की गई।
लोहिया नगर मोहल्ले में केनरा बैंक के बगल से होकर जाने वाली सड़क पर जलभराव हो गया। मोहल्ले के लोगों को आने जाने में परेशानी हुई। मोहल्ले के गणेश श्रीवास्तव ने बताया कि बारिश होने पर जल निकासी तेजी से नहीं होती है जिससे सड़क पर जलभराव हो जाता है। बारिश थमने के बाद दो से तीन घंटे में ज्यादा पानी हट जाता है। लेकिन, मोहल्ले में टूटी नालियों की वजह से सड़क के किनारे कुछ स्थानों पर अक्सर पानी जमा रहता है। धनेवा धनेई में फायर स्टेशन मार्ग पर भी जलभराव हो गया। रास्ते से आने जाने के दौरान थोड़ा-सा भी संतुलन बिगड़ने पर लोग गिर जा रहे थे।
धनेवा धनेई शमशेर ने बताया कि जन निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है। स्टेडियम में जलभराव होने से खिलाड़ियों को खेलने में परेशानी हुई। जिला कार्यालय परिसर में भी जलभराव हो गया। जिलाधिकारी आवास के पास बने पार्क में जलभराव के बीच बच्चे खेलते हुए नजर आए। इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल ने बताया कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था है। बारिश के दौरान सफाई कर्मियों की टीम भ्रमण कर जलभराव की समस्या को दूर करने में जुटी रहती है।
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सूख रही धान फसल को मिली संजीवनी
महराजगंज। जिले में सूख रही धान की फसल को बारिश से संजीवनी मिली। बारिश होने के बाद किसानों ने खेत में यूरिया का छिड़काव किया। खनुआ क्षेत्र के हरदीडाली, खनुआ, कैथवलिया उर्फ बरगदही, सुकरौली उर्फ अरघा, महुअवा, बरगदवा उर्फ गनवरिया, शेख फरेंदा आदि के किसानों ने बारिश होने पर खुशी जताई है। क्षेत्र के किसान उमाशंकर यादव, राजन, चंद्रिका, राजकुमार चौधरी आदि ने बताया कि वैसे तो बारिश होने से बहुत फायदा है। लेकिन, बारिश देर से होने के कारण फसल का पैदावार कम होने की उम्मीद है।
बसूली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विजय चंद्रन ने कहा कि अब तक सूखे से करीब 50 फीसदी तक धान की बर्बाद हो चुकी है। बारिश धान की फसलों के लिए संजीवनी साबित हुई है। इससे करीब आठ से दस दिनों तक फसलों को राहत मिलेगी। फसलों पर रोग का प्रकोप बढ़ रहा था। उस पर अंकुश लगेगा।
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जल निकासी की व्यवस्था की खुली पोल, 37 एमएम हुई बारिश, धान की फसल को लाभ
महराजगंज। बारिश से शहर में जलभराव होने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। शहर के कई मोहल्लों की सड़कें , पार्क व स्टेडियम जलमग्न हो गए। शनिवार रात शुरू हुई बारिश रविवार दोपहर तक होती रही जिससे शहर में जगह-जगह जलभराव की समस्या उत्पन्न हो गई। वहीं, सूख रही धान की फसल को बारिश से संजीवनी मिली है। पिछले चौबीस घंटे में 37 एमएम बारिश हुई जो इस महीने की सर्वाधिक दर्ज की गई।
लोहिया नगर मोहल्ले में केनरा बैंक के बगल से होकर जाने वाली सड़क पर जलभराव हो गया। मोहल्ले के लोगों को आने जाने में परेशानी हुई। मोहल्ले के गणेश श्रीवास्तव ने बताया कि बारिश होने पर जल निकासी तेजी से नहीं होती है जिससे सड़क पर जलभराव हो जाता है। बारिश थमने के बाद दो से तीन घंटे में ज्यादा पानी हट जाता है। लेकिन, मोहल्ले में टूटी नालियों की वजह से सड़क के किनारे कुछ स्थानों पर अक्सर पानी जमा रहता है। धनेवा धनेई में फायर स्टेशन मार्ग पर भी जलभराव हो गया। रास्ते से आने जाने के दौरान थोड़ा-सा भी संतुलन बिगड़ने पर लोग गिर जा रहे थे।
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धनेवा धनेई शमशेर ने बताया कि जन निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं है। स्टेडियम में जलभराव होने से खिलाड़ियों को खेलने में परेशानी हुई। जिला कार्यालय परिसर में भी जलभराव हो गया। जिलाधिकारी आवास के पास बने पार्क में जलभराव के बीच बच्चे खेलते हुए नजर आए। इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष कृष्ण गोपाल जायसवाल ने बताया कि जल निकासी की समुचित व्यवस्था है। बारिश के दौरान सफाई कर्मियों की टीम भ्रमण कर जलभराव की समस्या को दूर करने में जुटी रहती है।
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सूख रही धान फसल को मिली संजीवनी
महराजगंज। जिले में सूख रही धान की फसल को बारिश से संजीवनी मिली। बारिश होने के बाद किसानों ने खेत में यूरिया का छिड़काव किया। खनुआ क्षेत्र के हरदीडाली, खनुआ, कैथवलिया उर्फ बरगदही, सुकरौली उर्फ अरघा, महुअवा, बरगदवा उर्फ गनवरिया, शेख फरेंदा आदि के किसानों ने बारिश होने पर खुशी जताई है। क्षेत्र के किसान उमाशंकर यादव, राजन, चंद्रिका, राजकुमार चौधरी आदि ने बताया कि वैसे तो बारिश होने से बहुत फायदा है। लेकिन, बारिश देर से होने के कारण फसल का पैदावार कम होने की उम्मीद है।
बसूली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. विजय चंद्रन ने कहा कि अब तक सूखे से करीब 50 फीसदी तक धान की बर्बाद हो चुकी है। बारिश धान की फसलों के लिए संजीवनी साबित हुई है। इससे करीब आठ से दस दिनों तक फसलों को राहत मिलेगी। फसलों पर रोग का प्रकोप बढ़ रहा था। उस पर अंकुश लगेगा।