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Maharajganj News: क्यूआर कोड होगी नमूने की पहचान कमी दूर कर पाएंगे अच्छी पैदावार
Fri, 09 May 2025 01:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Fri, 09 May 2025 01:12 AM IST
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महराजगंज। किसान अपने खेत में सीमित और उन्हीं उर्वरकों का उपयोग करें, जिसकी मिट्टी में कमी हो। इसके लिए विभाग मिट्टी जांच के नमूने संग्रहीत करा रहा है।
एचएसपी मोबाइल एप की मदद से संग्रहीत मृदा नमूने को क्यूआर कोड और जीपीएस टैगिंग कर अलग किया जा रहा है, जिससे परिणाम बताने में किसी तरह की समस्या न उत्पन्न हो। क्यूआर कोड से नमूना किस किसान का है यह आसानी से पता चल सकेगा।
इससे उनके खेत की मिट्टी में जिस पोषक तत्व की कमी होगी, उसे दूर कर किसान अच्छी पैदावार कर सकेंगे। कृषि विभाग को 24 हजार नमूने संग्रहीत करने का लक्ष्य दिया गया है, जिसमें से पांच दिन में एक हजार नमूने लिए जा चुके हैं।
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कोविड संक्रमण काल 2020 के बाद 2025 में कृषि विभाग को मिट्टी जांच के लिए नमूने संग्रहीत करने का लक्ष्य दिया गया है। मई पूरे महीने अभियान चलाकर जनपद की सभी 882 ग्राम पंचायतों से नमूना संकलित किया जा रहा है। मंगलवार को जिला कृषि अधिकारी बीरेंद्र कुमार सिंह ने फरेंदा ब्लाॅक क्षेत्र में मृदा संग्रहण कार्य का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में जिन तत्वों की कमी मिले, उसी उर्वरक का प्रयोग कर किसान बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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एचएसपी मोबाइल एप की मदद से संग्रहीत मृदा नमूने को क्यूआर कोड और जीपीएस टैगिंग कर अलग किया जा रहा है, जिससे परिणाम बताने में किसी तरह की समस्या न उत्पन्न हो। क्यूआर कोड से नमूना किस किसान का है यह आसानी से पता चल सकेगा।
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इससे उनके खेत की मिट्टी में जिस पोषक तत्व की कमी होगी, उसे दूर कर किसान अच्छी पैदावार कर सकेंगे। कृषि विभाग को 24 हजार नमूने संग्रहीत करने का लक्ष्य दिया गया है, जिसमें से पांच दिन में एक हजार नमूने लिए जा चुके हैं।
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कोविड संक्रमण काल 2020 के बाद 2025 में कृषि विभाग को मिट्टी जांच के लिए नमूने संग्रहीत करने का लक्ष्य दिया गया है। मई पूरे महीने अभियान चलाकर जनपद की सभी 882 ग्राम पंचायतों से नमूना संकलित किया जा रहा है। मंगलवार को जिला कृषि अधिकारी बीरेंद्र कुमार सिंह ने फरेंदा ब्लाॅक क्षेत्र में मृदा संग्रहण कार्य का निरीक्षण किया।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र में जिन तत्वों की कमी मिले, उसी उर्वरक का प्रयोग कर किसान बेहतर लाभ प्राप्त कर सकते हैं।