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Maharajganj News: उठान के अभाव में बंद पड़े क्रय केंद्र, बिचौलियों को गेहूं बेच रहे किसान

Wed, 13 May 2026 02:22 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2026 02:22 AM IST
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Purchasing centers closed due to lack of lifting, farmers selling wheat to middlemen
बंद पड़े साधन सहकारी समिति।  
मौसम की मार के बाद सरकारी खरीद ठप होने से बढ़ी परेशानी
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ब्लॉक मिठौरा के कई खरीद केंद्रों पर लटका ताला
मिठौरा ब्लॉक क्षेत्र में 611 किसानों से 2182.428 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का रिकॉर्ड दर्ज
मिठौरा। स्थानीय क्षेत्र में बनाए गए 22 गेहूं क्रय केंद्रों में से कई केंद्रों पर ताले लटक रहे हैं जबकि कई स्थानों पर खरीद पूरी तरह ठप पड़ी है। सरकारी खरीद व्यवस्था चरमराने से किसान खुले बाजार में औने-पौने दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हैं और बिचौलिए किसानों की मजबूरी का खुलकर फायदा उठा रहे हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, अब तक ब्लॉक क्षेत्र में 611 किसानों से 2182.428 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद का रिकॉर्ड दर्ज है। लेकिन जमीनी स्तर पर खरीद प्रक्रिया की धीमी रफ्तार और कई केंद्रों के बंद होने से किसानों में भारी नाराजगी है। किसानों का कहना है कि कागजों में खरीद दिख रही है लेकिन वास्तविकता यह है कि अधिकांश किसान अपनी उपज बेचने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। मिठौरा में कुल 22 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। मंगलवार को दरहरा, टीकर और खरचौली केंद्र में बंद मिले।
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मंगलवार को ब्लॉक क्षेत्र के साधन सहकारी समिति औराटार पर ताला लटका रहा है और परिसर में सन्नाटा पसरा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक समिति लगभग एक सप्ताह से बंद पड़ी है। किसान कई दिनों तक ट्रैक्टर-ट्राली लेकर केंद्र का चक्कर लगाते रहे, मगर खरीद शुरू न होने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। सरकारी खरीद बंद होने का सीधा असर किसानों की जेब पर पड़ रहा है। समर्थन मूल्य पर खरीद न होने के कारण किसान मजबूरी में व्यापारियों और बिचौलियों को कम कीमत पर गेहूं बेच रहे हैं। किसानों का कहना है कि जहां सरकारी केंद्रों पर समर्थन मूल्य मिलने की उम्मीद रहती है, वहीं बाजार में प्रति क्विंटल सैकड़ों रुपये कम दाम मिल रहे हैं। इससे उनके लिए गेंहू की लागत निकलना भी मुश्किल हो गया है।
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इस वर्ष मौसम की मार ने किसानों की कमर पहले ही तोड़ दी है। बेमौसम बारिश, तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण गेहूं की पैदावार प्रभावित हुई। जो थोड़ी बहुत उपज बची है उसे बेचने के लिए किसान सरकारी खरीद केंद्रों पर पहुंच रहे हैं तो वहां भी ताला लटका मिल रहा है। इससे उनकी परेशानी और बढ़ गई है।
साधन सहकारी समिति औराटार की स्थिति बदइंतजामी की कहानी खुद बयां कर रही है। भवन जर्जर अवस्था में दिखाई दिया। गंगा, अनिल, सुनील, मदन, कुलदीप, बिकाऊ, उमेश, रमेश, शैलेश सहित दर्जनों किसानों का आरोप है कि समिति में न तो पर्याप्त व्यवस्था है और न ही जिम्मेदार अधिकारी उनकी समस्याएं सुनने को तैयार हैं। किसानों का कहना है कि हर साल किसी न किसी बहाने खरीद प्रक्रिया प्रभावित होती है और नुकसान सिर्फ उन्हें ही उठाना पड़ रहा है।
छोटे और सीमांत किसानों के पास न तो फसल को लंबे समय तक घर में रखने की सुविधा है और न ही आर्थिक क्षमता कि वे खरीद शुरू होने का लंबा इंतजार कर सकें। ऐसे में बिचौलिये गांव-गांव घूमकर किसानों से सस्ते दामों में गेहूं खरीद रहे हैं और बाद में भारी मुनाफे पर बेच रहे हैं।
नहीं हो रही उठान इसलिए बंद कर दी खरीद
समिति के सचिव प्रिंस गिरी ने खरीद बंद होने का कारण गेहूं का उठान न होना बताया। उनका कहना है कि गोदामों से समय पर गेहूं का उठान नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण खरीद प्रक्रिया रोकनी पड़ी है। लेकिन किसानों के मन में बड़ा सवाल यह है कि जब पूरे जिले में गेहूं भंडारण के लिए चार बड़े डिपो बनाए गए हैं, तब आखिर उठान क्यों नहीं हो पा रही है।
चार डिपो होने के बाद भी नहीं हो रहा उठान
जानकारी के अनुसार, जिले में गेहूं भंडारण के लिए परतावल मंडी, बनगढ़िया, जोगियाबारी और लोहरपुरवा में चार डिपो बनाए गए हैं। इसके बावजूद खरीद केंद्रों पर जगह न होने और उठान बाधित होने का तर्क किसानों के गले नहीं उतर रहा है। किसानों का कहना है कि यदि समय से गेहूं का उठान कराया जाता तो खरीद प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती और उन्हें खुले बाजार में फसल बेचने को मजबूर नहीं होना पड़ता। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

वर्जन
जिले में गेहूं भंडारण के लिए पर्याप्त व्यवस्था है। यदि किसी समिति का सचिव ऐसा कहता है तो यह उसकी लापरवाही है। अगर ऐसा है तो जांचकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
-विवेक कुमार, डिप्टी आरएमओ
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