{"_id":"6a25d496e06806a9380203b0","slug":"poultry-farm-operators-in-nepal-are-cautious-about-bird-flu-while-the-administration-is-being-lax-maharajganj-news-c-206-1-mhg1034-178812-2026-06-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: नेपाल में बर्ड फ्लू से पोल्ट्री फार्म संचालक सतर्क, प्रशासन बरत रहा शिथिलता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: नेपाल में बर्ड फ्लू से पोल्ट्री फार्म संचालक सतर्क, प्रशासन बरत रहा शिथिलता
विज्ञापन
खनुआ में स्थित मुर्गी फार्म।
नेपाल में बर्ड फ्लू देख पोल्ट्री फार्म संचालक हो गए हैं सतर्क
प्रशासन बरत रहा है शिथिलता, सीमावर्ती भारतीय इलाकों में चिकन की बिक्री बढ़ी
सोनौली। नेपाल में बर्ड फ्लू (एच 5 एन 1) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। सीमावर्ती जिला नवलपरासी समेत 10 जिलों में संक्रमण फैलने के बाद अब तक 55 व्यावसायिक एवं घरेलू पोल्ट्री फार्म प्रभावित हो चुके हैं। नेपाल में बर्ड फ्लू फैलने के बाद सीमावर्ती इलाकों में पोल्ट्री फॉर्म संचालक सतर्क हो गए हैं। हालांकि प्रशासन अभी शिथिलता बरत रहा है।
सोनौली सहित सीमावर्ती इलाकों के पोल्ट्री फार्म संचालक सुरक्षा के लिए सतर्कता बरत रहे हैं। फॉर्म पर सुरक्षा व्यवस्था के उपाय किए जा रहे हैं। कैथवलिया उर्फ बरगदही के एक पोल्ट्री फॉर्म के संचालक रामशरण ने बताया कि सभी कर्मचारियों व लेबर को मुख्य द्वार पर सेनेटाइज्ड स्पंज लगाया जाता है, फार्म की भीतर बाहरी लोगों को प्रवेश पर प्रतिबंध है। आने-जाने वाले वर्करों को सेनेटाइज्ड स्पंज से ही गुजर कर जाते हैं।
उन्होंने बताया कि इससे संक्रमण से बचाव हो सकेगा। साथ ही बताया कि फार्म में मास्क व सेनेटाइजर लगाकर ही जाते हैं। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। पशु डाॅक्टरों की टीम समय-समय पर आकर जांच करती रहती है। उनके परामर्श के अनुसार ध्यान दिया जाता है। शिकारपुर के पोल्ट्री फार्म संचालक जावेद ने बताया कि पोल्ट्री फार्म में साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुर्गियों की नियमित जांच की जा रही है।
विज्ञापन
पशु चिकित्साधिकारी नौतनवा अशोक यादव ने बताया कि हमारे क्षेत्र में कोई बर्ड फ्लू का केस नहीं है न ही कोई लक्षण मिले हैं। समय-समय पर पोल्ट्री फाॅर्म की जांच की जाती है। कमियां मिलने पर निर्देशित किया जाता है।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ गई चिकन की बिक्री
नेपाल के कुछ जिलों में पोल्ट्री उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण लोग भारतीय बाजारों का रुख कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सीमावर्ती बाजारों में नेपाली ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। सोनौली और आसपास के भारतीय बाजारों के व्यापारियों के अनुसार हाल के दिनों में चिकन और अंडों की मांग में कुछ वृद्धि दर्ज की गई है।
नेपाल में करीब पांच लाख पक्षी किए गए नष्ट
नेपाल में संक्रमण की रोकथाम के लिए 4,79,156 से अधिक पक्षियों को नष्ट किया जा चुका है। नेपाल के पशुधन सेवा विभाग के अनुसार, मोरंग, सुनसरी, झापा, चितवन, काठमांडू और नवलपरासी सहित कई जिलों में बर्ड फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों को विशेष निगरानी क्षेत्र घोषित किया गया है तथा पोल्ट्री उत्पादों और अंडों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। संक्रमण रोकने के लिए हजारों संक्रमित पक्षियों, अंडों, चारे और अन्य पोल्ट्री सामग्री को नष्ट किया गया है। विशेषज्ञों ने लोगों और वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही, जैव सुरक्षा (बायो-सिक्योरिटी) मानकों की अनदेखी तथा जीवित पक्षियों और अंडों के असुरक्षित व्यापार को संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण बताया है।
बर्ड फ्लू को लेकर मार्च में बढ़ाई गई थी सतर्कता
नेपाल में बर्ड फ्लू के मामले मिलने के बाद मार्च में पशु चिकित्सा विभाग ने महराजगंज में सतर्कता बढ़ा दी थी।सीवीओ व डिप्टी सीवीओ ने सीमा क्षेत्र के पोल्ट्री फार्मों में बचाव इंतजाम जांचे थे। जहां कमी मिली थी वहां तत्काल संचालकों से व्यवस्था कराई थी। साथ ही सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल व पुलिस से मदद के लिए अपील की थी। सीवीओ डॉ. एजाज अहमद व डिप्टी सीवीओ डॉ. विनोद विश्वकर्मा ने नौतनवा व ठूठीबारी क्षेत्र के लगभग 23 ग्राम पंचायतों का भ्रमण करते हुए 13 पोल्ट्री व तीन लेयर फार्मों में बर्डफ्लू को लेकर दिए निर्देशों के अनुपालन की जांच की थी।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. भानू प्रताप सिंह ने बर्ड फ्लू के लक्षण और सुझाव बताए हैं।
बर्ड फ्लू के लक्षण
-तेज बुखार या ठंड लगना और थकान।
-खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, और सांस लेने में कठिनाई।
-मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द।
-आंखों का लाल होना, उनमें जलन या पानी आना (कंजंक्टिवाइटिस)।
बचाव के उपाय
-चिकन, मांस या अंडों को कभी भी कच्चा या आधा पका हुआ न खाएं। इन्हें पकाने के लिए 70°C (या इससे अधिक) तापमान पर अच्छी तरह से उबालें या पकाएं ताकि वायरस नष्ट हो जाए।
-कच्चे (बिना पाश्चराइज्ड) दूध या उससे बने उत्पादों के सेवन से बचें क्योंकि वायरस दूध के माध्यम से भी फैल सकता है।
-कच्चा मांस काटने या धोने के बाद हाथों, चॉपिंग बोर्ड और बर्तनों को गर्म पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं।
वर्जन
यहां बर्ड फ्लू के मामले अभी तक सामने नहीं आए हैं। हर माह जांच की जाती है। पोल्ट्री फॉर्म के वाहन बॉर्डर से अपने क्षेत्र में न आएं इसकी भी निगरानी की जाएगी।
-डॉ. एजाज अहमद, सीवीओ, महराजगंज
वर्जन
बर्ड फ्लू का मामला अभी जिले में नहीं आया है। बॉर्डर पर जांच के लिए अभी कोई गाइड लाइन नहीं आई है। जिले में पशुपालन पालन जांच करता रहता है। -डॉ. केपी सिंह, डिप्टी सीएमओ
विज्ञापन
प्रशासन बरत रहा है शिथिलता, सीमावर्ती भारतीय इलाकों में चिकन की बिक्री बढ़ी
सोनौली। नेपाल में बर्ड फ्लू (एच 5 एन 1) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। सीमावर्ती जिला नवलपरासी समेत 10 जिलों में संक्रमण फैलने के बाद अब तक 55 व्यावसायिक एवं घरेलू पोल्ट्री फार्म प्रभावित हो चुके हैं। नेपाल में बर्ड फ्लू फैलने के बाद सीमावर्ती इलाकों में पोल्ट्री फॉर्म संचालक सतर्क हो गए हैं। हालांकि प्रशासन अभी शिथिलता बरत रहा है।
सोनौली सहित सीमावर्ती इलाकों के पोल्ट्री फार्म संचालक सुरक्षा के लिए सतर्कता बरत रहे हैं। फॉर्म पर सुरक्षा व्यवस्था के उपाय किए जा रहे हैं। कैथवलिया उर्फ बरगदही के एक पोल्ट्री फॉर्म के संचालक रामशरण ने बताया कि सभी कर्मचारियों व लेबर को मुख्य द्वार पर सेनेटाइज्ड स्पंज लगाया जाता है, फार्म की भीतर बाहरी लोगों को प्रवेश पर प्रतिबंध है। आने-जाने वाले वर्करों को सेनेटाइज्ड स्पंज से ही गुजर कर जाते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि इससे संक्रमण से बचाव हो सकेगा। साथ ही बताया कि फार्म में मास्क व सेनेटाइजर लगाकर ही जाते हैं। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। पशु डाॅक्टरों की टीम समय-समय पर आकर जांच करती रहती है। उनके परामर्श के अनुसार ध्यान दिया जाता है। शिकारपुर के पोल्ट्री फार्म संचालक जावेद ने बताया कि पोल्ट्री फार्म में साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुर्गियों की नियमित जांच की जा रही है।
विज्ञापन
पशु चिकित्साधिकारी नौतनवा अशोक यादव ने बताया कि हमारे क्षेत्र में कोई बर्ड फ्लू का केस नहीं है न ही कोई लक्षण मिले हैं। समय-समय पर पोल्ट्री फाॅर्म की जांच की जाती है। कमियां मिलने पर निर्देशित किया जाता है।
सीमावर्ती इलाकों में बढ़ गई चिकन की बिक्री
नेपाल के कुछ जिलों में पोल्ट्री उत्पादों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण लोग भारतीय बाजारों का रुख कर रहे हैं। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि सीमावर्ती बाजारों में नेपाली ग्राहकों की संख्या बढ़ी है। सोनौली और आसपास के भारतीय बाजारों के व्यापारियों के अनुसार हाल के दिनों में चिकन और अंडों की मांग में कुछ वृद्धि दर्ज की गई है।
नेपाल में करीब पांच लाख पक्षी किए गए नष्ट
नेपाल में संक्रमण की रोकथाम के लिए 4,79,156 से अधिक पक्षियों को नष्ट किया जा चुका है। नेपाल के पशुधन सेवा विभाग के अनुसार, मोरंग, सुनसरी, झापा, चितवन, काठमांडू और नवलपरासी सहित कई जिलों में बर्ड फ्लू संक्रमण की पुष्टि हुई है। संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों को विशेष निगरानी क्षेत्र घोषित किया गया है तथा पोल्ट्री उत्पादों और अंडों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाए गए हैं। संक्रमण रोकने के लिए हजारों संक्रमित पक्षियों, अंडों, चारे और अन्य पोल्ट्री सामग्री को नष्ट किया गया है। विशेषज्ञों ने लोगों और वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही, जैव सुरक्षा (बायो-सिक्योरिटी) मानकों की अनदेखी तथा जीवित पक्षियों और अंडों के असुरक्षित व्यापार को संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण बताया है।
बर्ड फ्लू को लेकर मार्च में बढ़ाई गई थी सतर्कता
नेपाल में बर्ड फ्लू के मामले मिलने के बाद मार्च में पशु चिकित्सा विभाग ने महराजगंज में सतर्कता बढ़ा दी थी।सीवीओ व डिप्टी सीवीओ ने सीमा क्षेत्र के पोल्ट्री फार्मों में बचाव इंतजाम जांचे थे। जहां कमी मिली थी वहां तत्काल संचालकों से व्यवस्था कराई थी। साथ ही सीमा पर तैनात सीमा सुरक्षा बल व पुलिस से मदद के लिए अपील की थी। सीवीओ डॉ. एजाज अहमद व डिप्टी सीवीओ डॉ. विनोद विश्वकर्मा ने नौतनवा व ठूठीबारी क्षेत्र के लगभग 23 ग्राम पंचायतों का भ्रमण करते हुए 13 पोल्ट्री व तीन लेयर फार्मों में बर्डफ्लू को लेकर दिए निर्देशों के अनुपालन की जांच की थी।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. भानू प्रताप सिंह ने बर्ड फ्लू के लक्षण और सुझाव बताए हैं।
बर्ड फ्लू के लक्षण
-तेज बुखार या ठंड लगना और थकान।
-खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, और सांस लेने में कठिनाई।
-मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द।
-आंखों का लाल होना, उनमें जलन या पानी आना (कंजंक्टिवाइटिस)।
बचाव के उपाय
-चिकन, मांस या अंडों को कभी भी कच्चा या आधा पका हुआ न खाएं। इन्हें पकाने के लिए 70°C (या इससे अधिक) तापमान पर अच्छी तरह से उबालें या पकाएं ताकि वायरस नष्ट हो जाए।
-कच्चे (बिना पाश्चराइज्ड) दूध या उससे बने उत्पादों के सेवन से बचें क्योंकि वायरस दूध के माध्यम से भी फैल सकता है।
-कच्चा मांस काटने या धोने के बाद हाथों, चॉपिंग बोर्ड और बर्तनों को गर्म पानी और साबुन से अच्छी तरह धोएं।
वर्जन
यहां बर्ड फ्लू के मामले अभी तक सामने नहीं आए हैं। हर माह जांच की जाती है। पोल्ट्री फॉर्म के वाहन बॉर्डर से अपने क्षेत्र में न आएं इसकी भी निगरानी की जाएगी।
-डॉ. एजाज अहमद, सीवीओ, महराजगंज
वर्जन
बर्ड फ्लू का मामला अभी जिले में नहीं आया है। बॉर्डर पर जांच के लिए अभी कोई गाइड लाइन नहीं आई है। जिले में पशुपालन पालन जांच करता रहता है। -डॉ. केपी सिंह, डिप्टी सीएमओ