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Maharajganj News: पुलिस तोड़ रही सिंडिकेट...तस्कर बदलते जा रहे रास्ता और ठिकाना
Thu, 23 Jan 2025 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Thu, 23 Jan 2025 12:51 AM IST
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महराजगंज। पशु तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस की ओर से सूचना तंत्र को मजबूत कर ऐसा जाल बिछाया गया है की तस्कर उसमें फंस जा रहे हैं।
दूसरी और बॉर्डर क्षेत्र में संयुक्त गश्त के जरिए कड़ी निगरानी की जा रही है। वैसे जिले में पशुओं को उठाने का कोई निश्चित क्षेत्र नहीं है। पुलिस की बढ़ती सख्ती के साथ रास्ते और ठिकाने बदलकर तस्कर धंधा जारी रखे हुए हैं।
धंधेबाजों को गिरफ्तार करने के लिए सूचना के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया, इस वजह से ये दबोच लिए गए। पूछताछ में पता चला की तस्कर पशुओं को बिहार लेकर जा रहे थे। पिकअप पर लादकर रात में लेकर जा रहे थे। पुलिस को सूचना मिली तो त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया। इस धंधे में खास बात है कि पशुओं को खरीदने के अलावा छूट्टा पशुओं को भी तस्कर निशान बना रहे हैं।
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जिले में सख्ती होने के कारण तस्करों ने रूट बदल दिया है। ये नेपाल के बजाय, सीधे बिहार से लेकर जा रहे हैं। बिहार से लगी नेपाल सीमा से तस्कर पशुओं को ले जा रहे हैं। इस धंधे में शामिल होने के लिए युवाओं को रकम की लालच देकर फंसाया जाता है। पुलिस इस धंधे पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई कर रही है।
गांव स्तर पर सूचनाओं को एकत्र कर सिंडिकेट को तोड़ने का प्रयास हो रहा है। सूत्रों की माने तो नए धंधे में शामिल करने के लिए ऐसे युवाओं का चयन किया जाता है जिनका कोई आपराधिक रिकार्ड न हो। उन्हें अपने नेटवर्क में शामिल कर तस्कर अपना धंधा चलाते हैं। जांच पड़ताल में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे यही पता चल रहा है कि बिहार के तस्करों का जाल यहां फैल रहा है। धंधेबाज अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाकर स्थानीय युवाओं को 400 से 500 रुपये देते हैं।
ताकि वह सही सूचना दे सकें। हालांकि तस्करों के मंसूबे पर पुलिस पानी फेरने में लगी है। सबसे पहले पुलिस इनके नेटवर्क को ध्वस्त कर रही है।
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दूसरी और बॉर्डर क्षेत्र में संयुक्त गश्त के जरिए कड़ी निगरानी की जा रही है। वैसे जिले में पशुओं को उठाने का कोई निश्चित क्षेत्र नहीं है। पुलिस की बढ़ती सख्ती के साथ रास्ते और ठिकाने बदलकर तस्कर धंधा जारी रखे हुए हैं।
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धंधेबाजों को गिरफ्तार करने के लिए सूचना के आधार पर पुलिस ने जाल बिछाया, इस वजह से ये दबोच लिए गए। पूछताछ में पता चला की तस्कर पशुओं को बिहार लेकर जा रहे थे। पिकअप पर लादकर रात में लेकर जा रहे थे। पुलिस को सूचना मिली तो त्वरित कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया। इस धंधे में खास बात है कि पशुओं को खरीदने के अलावा छूट्टा पशुओं को भी तस्कर निशान बना रहे हैं।
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जिले में सख्ती होने के कारण तस्करों ने रूट बदल दिया है। ये नेपाल के बजाय, सीधे बिहार से लेकर जा रहे हैं। बिहार से लगी नेपाल सीमा से तस्कर पशुओं को ले जा रहे हैं। इस धंधे में शामिल होने के लिए युवाओं को रकम की लालच देकर फंसाया जाता है। पुलिस इस धंधे पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई कर रही है।
गांव स्तर पर सूचनाओं को एकत्र कर सिंडिकेट को तोड़ने का प्रयास हो रहा है। सूत्रों की माने तो नए धंधे में शामिल करने के लिए ऐसे युवाओं का चयन किया जाता है जिनका कोई आपराधिक रिकार्ड न हो। उन्हें अपने नेटवर्क में शामिल कर तस्कर अपना धंधा चलाते हैं। जांच पड़ताल में जो तथ्य सामने आ रहे हैं, उससे यही पता चल रहा है कि बिहार के तस्करों का जाल यहां फैल रहा है। धंधेबाज अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाकर स्थानीय युवाओं को 400 से 500 रुपये देते हैं।
ताकि वह सही सूचना दे सकें। हालांकि तस्करों के मंसूबे पर पुलिस पानी फेरने में लगी है। सबसे पहले पुलिस इनके नेटवर्क को ध्वस्त कर रही है।