{"_id":"65b7ceb017a82cdce10f93c4","slug":"people-angry-over-road-not-being-built-maharajganj-news-c-206-1-mhg1001-114725-2024-01-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: सड़क न बनने से लोगों में आक्रोश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: सड़क न बनने से लोगों में आक्रोश
Mon, 29 Jan 2024 09:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 29 Jan 2024 09:43 PM IST
विज्ञापन
निचलौल। सड़क न बनने से ब्लॉक क्षेत्र के नारायणी नदी और घने जंगलों से घिरे सोहगीबरवा, भोतहा, शिकारपुर के ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। उन्होंने सोमवार को मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जल्द पुल और सड़क बनवाने की मांग की। मांग पूरी न होने पर लोकसभा चुनाव में मतदान बहिष्कार की चेतावनी दी।
ग्रामीण नारायणी नदी संघर्ष समिति के अध्यक्ष रामसहाय दुबे ने पत्र के माध्यम से बताया है कि नारायणी नदी और घने जंगलों के बीच बसे निचलौल ब्लॉक के सोहगीबरवा, भोतहा, शिकारपुर और कुशीनगर जिले के हरियपुर, शिवपुर, नरायणपुर, मरिचहवा, बकुलादह गांव के करीब 50 हजार लोगों की समस्याओं को देखते हुए मार्च 2021 में नारायणी नदी पर भैसहा घाट पर पीपा पुल का निर्माण कराया गया था। उस दौरान यहां के लोगों को आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही नारायणी नदी पर पक्का पुल के साथ ही सड़क का निर्माण करा दिया जाएगा, लेकिन आज तक जिम्मेदारों ने कोई पहल नहीं की। बरसात में करीब चार माह तक यहां के लोग अपने घरों में कैद रहते हैं। लोगों को दैनिक दिनचर्या की जरूरतों को पूरा करने में काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ती है।
विज्ञापन
ग्रामीण नारायणी नदी संघर्ष समिति के अध्यक्ष रामसहाय दुबे ने पत्र के माध्यम से बताया है कि नारायणी नदी और घने जंगलों के बीच बसे निचलौल ब्लॉक के सोहगीबरवा, भोतहा, शिकारपुर और कुशीनगर जिले के हरियपुर, शिवपुर, नरायणपुर, मरिचहवा, बकुलादह गांव के करीब 50 हजार लोगों की समस्याओं को देखते हुए मार्च 2021 में नारायणी नदी पर भैसहा घाट पर पीपा पुल का निर्माण कराया गया था। उस दौरान यहां के लोगों को आश्वासन दिया गया था कि जल्द ही नारायणी नदी पर पक्का पुल के साथ ही सड़क का निर्माण करा दिया जाएगा, लेकिन आज तक जिम्मेदारों ने कोई पहल नहीं की। बरसात में करीब चार माह तक यहां के लोग अपने घरों में कैद रहते हैं। लोगों को दैनिक दिनचर्या की जरूरतों को पूरा करने में काफी दुश्वारियां झेलनी पड़ती है।
विज्ञापन