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Maharajganj News: मैदा और अरारोट मिलाकर बना रहे पनीर...मिलावट से मोटी कमाई़
Sat, 08 Feb 2025 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sat, 08 Feb 2025 12:46 AM IST
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महराजगंज। सहालग में पनीर की मांग बढ़ गई है। इससे धंधेबाजों को कमाई का अवसर मिल गया है। पाउडर के दूध से पनीर बनाकर धंधेबाज मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। दूध उत्पादन से ज्यादा पनीर की मांग है। दूध में मैदा व अरारोट मिलाकर पनीर तैयार किया जा रहा है।
सहालग में यह धंधा और फल-फूल रहा है। पिपराइच से सस्ता पनीर चिह्नित जगहों पर उतर रहा है। पनीर में मिलावट की जांच कम होने से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ रहा है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 3000 लीटर रोजाना दूध का उत्पादन होता है। विभागीय योजनाओं से 21 डेयरी का संचालन होता है।
अनुमान के अनुसार, शहर में रोजाना दुकानों से लेकर घरों में करीब तीन लाख लीटर दूध की खपत होती है। मांग के हिसाब से यह घटता-बढ़ता रहता है। सहालग और अन्य विशेष अवसरों पर खपत चार लाख लीटर रोजाना पहुंच जाती है, जबकि पशुपालक से लगभग एक लाख लीटर दूध की ही आपूर्ति कर पाते हैं।
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वहीं पैक दूध का कारोबार करने वाली कंपनियां भी करीब एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रही हैं। दूध की बिक्री करने वाले कहते हैं कि घरों में गाय का दूध 50 तो भैंस का 60 रुपये प्रति लीटर दिया जाता है। पानी के अलावा कुछ नहीं मिलाया जाता है।
रेट भी समय के हिसाब से घटता बढ़ता रहता है। अब पशु कोई रखना नहीं चाह रहा है तो पर्याप्त दूध कहां से होगा। इधर, सहालग में दूध एवं पनीर की मांग बढ़ गई है। इसकी पूर्ति के लिए धंधेबाज व्यवस्था करना शुरू कर दिए है। करीब 200 प्रति किलो के भाव से बिकने वाला पनीर पाउडर के दूध वाला होता है।
शहर में 330-340 रुपये प्रति किलो की दर से पनीर बिक रहा है। जानकारों की माने तो एक किलो पनीर बनाने के लिए कम से कम पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। एक लीटर दूध 60 रुपये में आता है। एक किलो पनीर के लिए 300 रुपये से अधिक का दूध लगता है। प्रोसेसिंग चार्ज अलग से शामिल है। ऐसे में पनीर की न्यूनतम लागत 300 से 350 रुपये प्रतिकिलो पहुंच जाती है। ऐसे में सस्ते पनीर में मिलावट की संभावना रहती है।
बताया जाता है कि जब दूध ही नहीं पर्याप्त मिलता तो पनीर कैसे बनाएंगे। बाजार के सूत्रों का कहना है कि डिमांड पूरी करने के लिए पिपराइच से बड़ी मात्रा में पनीर शहर में आता है। यह पनीर पाउडर से बनाया जाता है।
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सहालग में यह धंधा और फल-फूल रहा है। पिपराइच से सस्ता पनीर चिह्नित जगहों पर उतर रहा है। पनीर में मिलावट की जांच कम होने से लोगों की सेहत पर खराब असर पड़ रहा है। पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 3000 लीटर रोजाना दूध का उत्पादन होता है। विभागीय योजनाओं से 21 डेयरी का संचालन होता है।
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अनुमान के अनुसार, शहर में रोजाना दुकानों से लेकर घरों में करीब तीन लाख लीटर दूध की खपत होती है। मांग के हिसाब से यह घटता-बढ़ता रहता है। सहालग और अन्य विशेष अवसरों पर खपत चार लाख लीटर रोजाना पहुंच जाती है, जबकि पशुपालक से लगभग एक लाख लीटर दूध की ही आपूर्ति कर पाते हैं।
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वहीं पैक दूध का कारोबार करने वाली कंपनियां भी करीब एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रही हैं। दूध की बिक्री करने वाले कहते हैं कि घरों में गाय का दूध 50 तो भैंस का 60 रुपये प्रति लीटर दिया जाता है। पानी के अलावा कुछ नहीं मिलाया जाता है।
रेट भी समय के हिसाब से घटता बढ़ता रहता है। अब पशु कोई रखना नहीं चाह रहा है तो पर्याप्त दूध कहां से होगा। इधर, सहालग में दूध एवं पनीर की मांग बढ़ गई है। इसकी पूर्ति के लिए धंधेबाज व्यवस्था करना शुरू कर दिए है। करीब 200 प्रति किलो के भाव से बिकने वाला पनीर पाउडर के दूध वाला होता है।
शहर में 330-340 रुपये प्रति किलो की दर से पनीर बिक रहा है। जानकारों की माने तो एक किलो पनीर बनाने के लिए कम से कम पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। एक लीटर दूध 60 रुपये में आता है। एक किलो पनीर के लिए 300 रुपये से अधिक का दूध लगता है। प्रोसेसिंग चार्ज अलग से शामिल है। ऐसे में पनीर की न्यूनतम लागत 300 से 350 रुपये प्रतिकिलो पहुंच जाती है। ऐसे में सस्ते पनीर में मिलावट की संभावना रहती है।
बताया जाता है कि जब दूध ही नहीं पर्याप्त मिलता तो पनीर कैसे बनाएंगे। बाजार के सूत्रों का कहना है कि डिमांड पूरी करने के लिए पिपराइच से बड़ी मात्रा में पनीर शहर में आता है। यह पनीर पाउडर से बनाया जाता है।