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Maharajganj News: जिला अस्पताल में कंप्यूटरों का अभाव, आभा आईडी से कर रहे इलाज का दावा

Sat, 05 Sep 2026 02:06 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 02:06 AM IST
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Out-of-control Indian car plunges into Phewa Lake in Pokhara; two dead.
पैथोलॉजी, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड अभी डिजिटल सिस्टम से नहीं जुड़े,
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डॉक्टरों के चेंबर में भी ऑनलाइन व्यवस्था का अभाव, जिले मे बना है 20.43 लाख आभा आईडी

महराजगंज। जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए आभा आईडी बनाने का अभियान जारी है। हालांकि अस्पतालों में डिजिटल सुविधाओं के लिए पर्याप्त संसाधनों का अभाव है। विभाग आभा आईडी के जरिए मरीजों के इलाज का दावा कर रहा है जबकि हकीकत यह है कि अभी तक जांच सेंटर से लेकर डॉक्टरों के चेंबर ही ऑनलाइन नहीं किए जा सके हैं।
जनपद में 20.43 लाख से अधिक आभा आईडी बनने के बावजूद जिला अस्पताल की पैथोलॉजी, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड सेवाएं इससे पूरी तरह नहीं जोड़ी गई हैं। डॉक्टरों के चेंबर में भी मरीज की डिजिटल केस हिस्ट्री देखने के लिए पर्याप्त कंप्यूटर सिस्टम नहीं है। डिजिटल सुविधाओं के लिए जिला अस्पताल में 15 कंप्यूटर और प्रिंटर की आवश्यकता है। ऐसे में आभा आईडी बनने के बाद भी मरीजों के इलाज और जांच का रिकॉर्ड डॉक्टरों तक पहुंचने में मुश्किल आनी तय है।
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जिला अस्पताल में अब पर्ची कटवाने के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया गया है। बिना आधार कार्ड के मरीज की पर्ची नहीं काटी जा रही है। सीएमएस डॉ. एके द्विवेदी ने बताया कि आधार के माध्यम से मरीजों को आभा आईडी बनाने की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। इससे अस्पताल आने वाले मरीजों को डिजिटल स्वास्थ्य व्यवस्था में शामिल करने में मदद मिलेगी।
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घर-घर जाकर लोगों का बनाया गया आभा आईडी कार्ड
आभा आईडी बनाने के लिए आशा, एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को जिम्मेदारी दी है। विभाग के अनुसार आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम और सीएचओ के माध्यम से घर-घर जाकर लोगों की आभा आईडी बनाई जा रही है। इसका उद्देश्य मरीज के स्वास्थ्य संबंधी रिकॉर्ड को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखना और जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से उपलब्ध कराना है। डीसीपीएम संदीप पाठक ने बताया कि जिले में अब तक 20.43 लाख आभा आईडी बनाई जा चुकी है। अभी करीब छह लाख लोगों की आभा आईडी बनाया जाना बाकी है। इसके लिए जिले में 2,584 आशा, 430 एएनएम और 179 सीएचओ को लगाया गया है।
जांच रिपोर्ट मोबाइल पर देने की है योजना
आभा आईडी व्यवस्था लागू होने के बाद मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पैथोलॉजी में जांच कराने के बाद मरीज की आभा आईडी से रिपोर्ट लिंक की जाएगी। मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से सूचना मिलने के बाद मरीज दिए गए लिंक पर जाकर अपनी रिपोर्ट देख सकेगा। आगे चलकर दवाओं का विवरण भी आभा आईडी से जोड़ने की योजना है। इससे डॉक्टर और मरीज दोनों को यह जानकारी मिल सकेगी कि पहले कौन-कौन सी दवाएं दी गई थीं और कौन सी जांच कराई गई थी। हालांकि इसके लिए अस्पताल में पर्याप्त कंप्यूटर और अन्य डिजिटल संसाधनों की जरूरत है। जिला अस्पताल में पंजीकरण से लेकर डॉक्टर के परामर्श और दवा वितरण तक की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए करीब 15 कंप्यूटर और प्रिंटर की आवश्यकता बताई गई है। अभी संसाधनों की कमी के कारण पूरी व्यवस्था लागू नहीं हो पा रही है।
बार कोड स्कैन कर खुद करा सकेंगे पंजीकरण
जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए बार कोड स्कैन कर पंजीकरण कराने की व्यवस्था भी शुरू की गई है। इसके तहत अस्पताल में लगाए गए क्यूआर कोड को मोबाइल से स्कैन कर मरीज स्वयं अपना पंजीकरण कर सकते हैं। इससे पंजीकरण काउंटर पर लगने वाली भीड़ और प्रतीक्षा समय कम करने में मदद मिलेगी। मरीज घर से या अस्पताल पहुंचने के बाद अपने मोबाइल से पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर सकता है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार आभा आईडी की सुविधा से पंजीकरण प्रक्रिया तेज, सरल और डिजिटल होगी। मरीजों को बार-बार पर्ची काउंटर पर जाने की जरूरत कम होगी और स्वास्थ्य सेवाओं को डिजिटल रिकॉर्ड से जोड़ने में मदद मिलेगी।

वर्जन
जिला अस्पताल में डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए जल्द ही कंप्यूटर और प्रिंटर की खरीद की जाएगी। इसके बाद पंजीकरण, डॉक्टर के परामर्श, जांच और दवा से संबंधित प्रक्रिया को ऑनलाइन व्यवस्था से जोड़ने में सुविधा होगी।
-डॉ. एके द्विवेदी, सीएमएस
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