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Maharajganj News: एक लाख वाहन उगल रहे जहरीला धुआं... प्रदूषण का स्तर पहुंचा थोड़े खराब स्तर पर

Wed, 01 Nov 2023 12:23 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 01 Nov 2023 12:23 AM IST
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One lakh vehicles are spewing poisonous smoke... pollution level has reached a slightly worse level.
एक लाख वाहन उगल रहे जहरीला धुआं... प्रदूषण का स्तर पहुंचा थोड़े खराब स्तर पर
बिना प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के शहर की सड़कों पर फर्राटा भर रहे वाहन, शहर का एक्यूआई 162 पहुंचा, इसे थोड़े खराब स्तर का माना जाता है
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संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। जिले में वर्ष 2019 से पहले पंजीकृत करीब एक लाख वाहनों का प्रदूषण संबंधी प्रमाणपत्र नहीं है। इनसे निकलने वाले धुएं से सेहत खराब हो सकती है। ऐसे में जिले में जरूरी काम से कहीं निकले हैं तो सांस जरा संभलकर लें। सावधानी नहीं बरती तो बीमार भी हो सकते हैं। वजह यह है कि छोटे-बड़े तकरीबन एक लाख वाहन बिना प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के शहर की सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। इनका जहरीला धुआं किसी को भी बीमार बना सकता है।
शहर में प्रदूषण का स्तर थोड़े खराब स्तर है, यहां की हवा धीरे धीरे खराब स्तर की ओर पहुंच रही है, ऐसे में सावधान रहने की जरूरत है। जानकारी के अनुसार, वाहनों के धुएं से शरीर को बेहद नुकसान पहुंचाने वाले हानिकारक तत्व कार्बन मोनो ऑक्साइड, कार्बन, सल्फर डाई ऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड निकलते हैं। आरटीओ के आंकड़े गवाह हैं कि दो लाख वाहन जिले में बिना प्रदूषण की जांच के ही दौड़ रहे हैं। इनमें ऐसे वाहन भी हैं, जिनके चलने की समय सीमा भी बीत चुकी है।
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अब जाहिर है कि इन वाहनों का जहरीला धुआं हृदय, अस्थमा और सांस के रोगियों के लिए बहुत ही नुकसानदायक है। डॉक्टर भी इस समय भीड़भाड़ वाले इलाके में जाने से बचने और बढि़या गुणवत्ता का मास्क पहनने की सलाह दे रहे हैं।
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शहर की हवा लगातार प्रदूषित होती जा रही
--शहर की हवा लगातार प्रदूषित होती जा रही है। बीते 24 अक्तूबर को एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) जहां 110 पर रहा, वहीं सोमवार की शाम चार बजे तक इसे 150 पर दर्ज किया गया। जबकि, 101 से 200 एक्यूआई के बीच थोड़ा खराब माना जाता है। यानी अब वायु प्रदूषण अब थोड़े खराब स्तर तक पहुंच गया है। सोमवार को एक्यूआई 162 तक पहुंच गया।
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प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र की वैधता एक वर्ष की होती
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र सभी वाहनों के लिए अनिवार्य है। नई गाड़ी के लिए प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र की वैधता एक वर्ष की होती है। इसके बाद हर छह माह पर प्रदूषण जांच केंद्र पर वाहनों की जांच कराकर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र लेना होता है, लेकिन यह जांच बहुत ही कम लोग कराते हैं। जिले में 3,81,270 वाहन पंजीकृत हैं। इनके अलावा वर्ष 2019 के पहले पंजीकृत 2,54,249 वाहन हैं, इनमें एक लाख बिना प्रदूषण प्रमाणपत्र के सड़कों पर फर्राटा भरते हुए प्रदूषण फैला रहे हैं।
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हद है! बिना वाहन भी बन जाता है प्रदूषण प्रमाणपत्र

जिले में छह प्रदूषण जांच केंद्र हैं, जहां वाहनों के प्रदूषण की जांच होती है। इसमें ज्यादातर प्रदूषण जांच केंद्र शहर क्षेत्र में स्थित हैं। यहां कुछ प्रदूषण जांच केंद्र ऐसे भी हैं, जो थोड़े पैसे अधिक लेकर बिना गाड़ी की जांच किए गलत तरीके से प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी कर देते हैं।
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फेफड़े की कार्यक्षमता प्रभावित होती
डॉक्टरों के अनुसार, डीजल या पेट्रोल वाहनों में अधजला ईंधन कार्बन मोनो ऑक्साइड के रूप में बाहर निकलता है, जिससे फेफड़े की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। इसके प्रभाव से अस्थमा के रोगियों को अटैक आने का खतरा रहता है। इसीलिए जब प्रदूषण अधिक हो तो भीड़ भाड़ वाले इलाके में जाने से बचें, अथवा बढि़या गुणवत्ता का मास्क पहनकर जाएं।
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धुएं का सबसे बुरा असर अस्थमा के मरीजों पर पड़ता है
चेष्ट रोग विशेषज्ञ डॉ. एएम भाष्कर बताते हैं कि धुएं का सबसे बुरा असर अस्थमा के मरीजों पर पड़ता है। हवा में फैले विभिन्न रासायनिक अवयव अस्थमा के मरीजों की मुश्किलें बढ़ा देते हैं। कार्बन मोनो ऑक्साइड की वजह से अस्थमा का अटैक आ जाता है, जिससे रोगी की हालत गंभीर हो जाती है। दूसरी गंभीर बीमारी सीओपीडी, यानी क्रॉनिक ऑबस्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, फेफड़ों की एक क्रॉनिक बीमारी है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों में हवा के प्रवाह को रोकती है। इस स्थिति में फेफड़ों में सूजन आ जाता है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत आती है। व्यक्ति के फेफड़े की कार्यक्षमता घट जाती है। वाहनों के धुएं से एलर्जी भी होती है, जिससे व्यक्ति को लगातार छींक आने की दिक्क्त होती है।
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बच्चों को वायु प्रदूषण से बचाना सबसे जरूरी
भूगोल विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर दिवाकर सिंह ने बताया कि वायुमंडल के प्रदूषण का असर बच्चों पर भी पड़ता है। शहर कभी जाम लगता है तो वहां वाहनों से अत्यधिक धुआं निकलता है तो इससे बच्चों को ऊपरी श्वसन तंत्र में दिक्क्त हो सकती है। प्रभावित बच्चों के श्वास नली से आवाज आने लगती है और उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होती है। इसलिए बच्चों को वायु प्रदूषण से बचाना सबसे जरूरी है।
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प्रदूषण में पर्टिकुलेट मैटर मापने के दो मानक
विशेषज्ञों के मुताबिक, हवा के प्रदूषण में पर्टिकुलेट मैटर (कण प्रदूषण) मापने के दो मानक हैं। एक तो इसे 24 घंटे के आधार पर मापा जाता है। दूसरा इसका वार्षिक औसत निकाला जाता है। पीएम 2.5 का स्तर सामान्य 60 माइक्रो ग्राम प्रति घनमीटर होना चाहिए। पीएम 10 का स्तर सामान्य 100 माइक्रो ग्राम होना चाहिए। इसका वार्षिक औसत 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तय है। 24 घंटे में सल्फर डाई आक्साइड 80 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर का मानक निर्धारित है। जबकि वार्षिक मानक 50 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तय किया गया है। इसके अलावा नाइट्रोजन डाई आक्साइड का 24 घंटे में 80 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर जबकि वार्षिक 40 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इससे अधिक होने पर सेहत के लिए हानिकारक होता है।
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क्या है पीएम 2.5 और पीएम 10

विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम को पर्टिकुलेट मैटर (कण प्रदूषण) कहा जाता है। यह वातावरण में मौजूद ठोस कणों और तरल बूंदों का मिश्रण होता है। पीएम 2.5 वायुमंडलीय कण पदार्थ को बताता है। इस श्रेणी में कण इतने छोटे होते हैं कि उनको इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोप की सहायता से ही जाना जा सकता है। जबकि पीएम 10 वो कण हैं, जिनका व्यास 10 माइक्रोमीटर होता है। इसमें धूल, गरदा और धातु के सूक्ष्म कण शामिल होते हैं।
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एयर क्वालिटी---इंडेक्स मानक

0-50
------------अच्छा

51-100--संतोषजनक

101-200--थोड़ा खराब

201-300--खराब

301-400--अत्यंत खराब

401-500---गंभीर
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तारीख एक्यूआई
31 अक्तूबर 162
30 अक्तूबर 150

29 अक्तूबर 140

28 अक्तूबर 120

27 अक्तूबर 128

26 अक्तूबर 126

25 अक्तूबर 118

24 अक्तूबर 110

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जिले में सड़क पर दौड़ रहे 3,81,270 वाहन
जिले में वर्ष 2019 से पहले 2,54,249 वाहन पुराने हैं। इसमें सभी प्रकार के वाहन शामिल हैं। 26531 वाहनों का फिटनेस एक्सपायर हो चुका है। 3113 वाहन क्रियाशील नहीं है। वर्ष 2019 के बाद से जिले में 3,81,270 वाहन पंजीकृत हैं। इसमें सभी तरह से वाहन शामिल हैं। 27685 वाहनों का फिटनेस नहीं है। 3266 वाहन क्रियाशील नहीं हैं। पंजीकृत वाहनों में भारी, हल्के, सवारी समेत अन्य वाहन शामिल हैं।
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वाहनों की जांच समय समय पर की जाती है। अगर कोई वाहन जांच के दौरान प्रदूषण मुक्त प्रमाण पत्र के बिना संचालित मिला तो कार्रवाई की जाएगी। हर हाल में नियमों का पालन कराया जाएगा।
आरडी प्रसाद, संभागीय निरीक्षक
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