{"_id":"65eccbe95f3e1299a9072924","slug":"now-the-game-of-smuggling-through-luxury-vehicles-maharajganj-news-c-206-1-sgkp1021-117487-2024-03-10","type":"story","status":"publish","title_hn":"Maharajganj News: अब लग्जरी गाड़ियों से तस्करी का खेल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Maharajganj News: अब लग्जरी गाड़ियों से तस्करी का खेल
Sun, 10 Mar 2024 02:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 10 Mar 2024 02:21 AM IST
विज्ञापन
महराजगंज। पुलिस से बचने के लिए तस्करी के खेल में अब लग्जरी गाड़ियों का प्रयोग किया जा रहा है। बॉर्डर एरिया में अवैध धंधे वालों का मजबूत नेटवर्क है। बॉर्डर से लेकर पूरा सिंडिकेट देश के बड़े महानगरों तक फैला है। भारत से जरूरी सामान नेपाल पहुंचा रहे हैं तो उधर से मसाला समेत अन्य सामग्री भारत ला रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि सामान ले जाने में टैक्स की चोरी के लिए बोगस फर्म बनाकर धंधा चलाया जा रहा है। यह खेल इसलिए होता है कि सामान पकड़ में आ जाए तो असल मालिक का पता न चले। जांच में कभी कभार गाड़ियां पकड़ी जाती हैं। लक्जरी गाड़ी होने के कारण सुरक्षा कर्मियों को समझ में नहीं आता है कि इसमें तस्करी का सामान जा रहा होगा। इस खेल में कई सफेदपोश भी शामिल हैं। सीमावर्ती इलाकों में इनकी गहरी पैठ होती है। इनके हाव भाव पहनावे को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता कि इतनी बड़ी गाड़ी रखने वाला तस्करी कर सकता है। एक से दो बार गोरखपुर तक सामान पहुंचाने के एवज में अच्छी खासी रकम मिल जाती है। रकम सामान के हिसाब से तय होती है।
यही हाल नेपाल बाॅर्डर तक सामान पहुंचाने के खेल में होता है। इन धंधेबाजों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि उन्हें हर कार्रवाई की जानकारी पहले ही हो जाती है। बीते माह बरामदगी पर गौर करें तो चरस की खेप भी गाड़ी से जा रही थी। सुरक्षा कर्मियों को शक हुआ तो चरस तस्करी के सिंडिकेट का खुलासा हुआ। बीते माह नौतनवा में हुए लूट के आरोपी गिरफ्तार हुए थे तो वे भी कार से ही नेपाल जा रहे थे।
विज्ञापन
नेपाल के मसालों की मांग भारत में ज्यादा है। इससे वहां इसकी अच्छी खासी खेप पहुंचती है। सीमावर्ती इलाकों में डंप करने के बाद मौका देखकर तस्कर इन्ही गाड़ियों में भरकर गोरखपुर, लखनऊ व दिल्ली तक पहुंचा देते हैं। तस्करी के खेल में किराए पर चलने वाली गाड़ियां भी शामिल हैं। इनका किराया भी अगल-अलग होता है। करीब 2500 से 3000 रुपये तक किराया और तेल का अलग से लेते हैं। गोरखपुर से आगे बढ़ने पर यह किराया बढ़ जाता है। गाड़ी बार्डर से 500 मीटर की दूर तक जाएगी। बार्डर के बेहद करीब जाने पर चार्ज बढ़ जाएगा। पूरे नेटवर्क को बेहद होशियारी से संचालित किया जा रहा है। सुरक्षा कर्मियों को शक न हो इसके लिए सभी जतन किए जाते हैं। कार चालक की माने में तो दिन भर में दो चक्कर लगाने पर करीब छह हजार की आमदनी हो जाती है।
बार्डर से चलने पर इन्हें कोई रोकता टोकता नहीं है। इनकी सेटिंग अच्छी होती है। सोनौली से सीधे गोरखपुर, ठुठीबारी व झुनलीपुर से शिकारपुर होकर गोरखपुर चले जाते हैं। शनिवार को सुबह नौ सोनौली कस्बे में कई गाड़ियां खड़ी मिली, वहां एक नई कार नजर आई। गाड़ी पर एक पार्टी के निशान का स्टीकर लगा था। चालक ने पूछने पर बताया कि गाड़ी रिजर्व कर गोरखपुर जाना है। सवारी मिल जाएगी, तब भी चले जाएंगे। किराया और बुकिंग को लेकर बातचीत के बाद फोनकर थोड़ी देर में बताने की बात कही। वहीं खड़ी कारों में ज्यादातर का यही हाल रहा। फोन पर ही बुकिंग के आर्डर आते रहे और चालक निकलते रहे।
महाराजगंज-नेपाल बॉर्डर पर तस्करों की जड़े काफी गहरी हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में धंधेबाज अपना गोदाम बना रखे हैं। सूत्रों की माने तो अपना खुद का मकान भी बनाकर छोड़ दिए हैं। नेपाल भेजने वाला सामान जैसे कपड़ा, बेल्ट, खाद्य सामाग्री आदि गोदाम में रखते हैं। नेपाल से भी आने वाले सामान को इसी में रखा जाता है। भारतीय कपड़े की मांग नेपाल में अधिक है। सूट का कपड़ा भारतीय क्षेत्र में पांच सौ रुपये है तो नेपाल से आते ही आठ सौ से एक हजार तक हो जाता है।
विज्ञापन
सूत्र बताते हैं कि सामान ले जाने में टैक्स की चोरी के लिए बोगस फर्म बनाकर धंधा चलाया जा रहा है। यह खेल इसलिए होता है कि सामान पकड़ में आ जाए तो असल मालिक का पता न चले। जांच में कभी कभार गाड़ियां पकड़ी जाती हैं। लक्जरी गाड़ी होने के कारण सुरक्षा कर्मियों को समझ में नहीं आता है कि इसमें तस्करी का सामान जा रहा होगा। इस खेल में कई सफेदपोश भी शामिल हैं। सीमावर्ती इलाकों में इनकी गहरी पैठ होती है। इनके हाव भाव पहनावे को देखकर कोई अंदाजा नहीं लगा सकता कि इतनी बड़ी गाड़ी रखने वाला तस्करी कर सकता है। एक से दो बार गोरखपुर तक सामान पहुंचाने के एवज में अच्छी खासी रकम मिल जाती है। रकम सामान के हिसाब से तय होती है।
विज्ञापन
यही हाल नेपाल बाॅर्डर तक सामान पहुंचाने के खेल में होता है। इन धंधेबाजों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि उन्हें हर कार्रवाई की जानकारी पहले ही हो जाती है। बीते माह बरामदगी पर गौर करें तो चरस की खेप भी गाड़ी से जा रही थी। सुरक्षा कर्मियों को शक हुआ तो चरस तस्करी के सिंडिकेट का खुलासा हुआ। बीते माह नौतनवा में हुए लूट के आरोपी गिरफ्तार हुए थे तो वे भी कार से ही नेपाल जा रहे थे।
विज्ञापन
नेपाल के मसालों की मांग भारत में ज्यादा है। इससे वहां इसकी अच्छी खासी खेप पहुंचती है। सीमावर्ती इलाकों में डंप करने के बाद मौका देखकर तस्कर इन्ही गाड़ियों में भरकर गोरखपुर, लखनऊ व दिल्ली तक पहुंचा देते हैं। तस्करी के खेल में किराए पर चलने वाली गाड़ियां भी शामिल हैं। इनका किराया भी अगल-अलग होता है। करीब 2500 से 3000 रुपये तक किराया और तेल का अलग से लेते हैं। गोरखपुर से आगे बढ़ने पर यह किराया बढ़ जाता है। गाड़ी बार्डर से 500 मीटर की दूर तक जाएगी। बार्डर के बेहद करीब जाने पर चार्ज बढ़ जाएगा। पूरे नेटवर्क को बेहद होशियारी से संचालित किया जा रहा है। सुरक्षा कर्मियों को शक न हो इसके लिए सभी जतन किए जाते हैं। कार चालक की माने में तो दिन भर में दो चक्कर लगाने पर करीब छह हजार की आमदनी हो जाती है।
बार्डर से चलने पर इन्हें कोई रोकता टोकता नहीं है। इनकी सेटिंग अच्छी होती है। सोनौली से सीधे गोरखपुर, ठुठीबारी व झुनलीपुर से शिकारपुर होकर गोरखपुर चले जाते हैं। शनिवार को सुबह नौ सोनौली कस्बे में कई गाड़ियां खड़ी मिली, वहां एक नई कार नजर आई। गाड़ी पर एक पार्टी के निशान का स्टीकर लगा था। चालक ने पूछने पर बताया कि गाड़ी रिजर्व कर गोरखपुर जाना है। सवारी मिल जाएगी, तब भी चले जाएंगे। किराया और बुकिंग को लेकर बातचीत के बाद फोनकर थोड़ी देर में बताने की बात कही। वहीं खड़ी कारों में ज्यादातर का यही हाल रहा। फोन पर ही बुकिंग के आर्डर आते रहे और चालक निकलते रहे।
महाराजगंज-नेपाल बॉर्डर पर तस्करों की जड़े काफी गहरी हैं। सीमावर्ती क्षेत्र में धंधेबाज अपना गोदाम बना रखे हैं। सूत्रों की माने तो अपना खुद का मकान भी बनाकर छोड़ दिए हैं। नेपाल भेजने वाला सामान जैसे कपड़ा, बेल्ट, खाद्य सामाग्री आदि गोदाम में रखते हैं। नेपाल से भी आने वाले सामान को इसी में रखा जाता है। भारतीय कपड़े की मांग नेपाल में अधिक है। सूट का कपड़ा भारतीय क्षेत्र में पांच सौ रुपये है तो नेपाल से आते ही आठ सौ से एक हजार तक हो जाता है।