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शहर बढ़ा सविधा नहीं
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लोहेपार में मूलभूत सुविधाएं नदारद, नहीं हुआ विकास कार्य
सिसवां बाजार ( महराजगंज)। नगर पालिका परिषद में दो वर्ष पूर्व शामिल लोहेपार गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यहां समुचित विकास कार्य न होने से लोग निराश हैं। सामुदायिक शौचालय के अभाव में गांव के लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है। वहीं सड़क, नाली, पथ प्रकाश, पेयजल की समस्या बरकरार है। वृद्धा, विधवा पेंशन सहित अन्य प्रमाणपत्र बनवाना मुश्किल हो गया है। आवास के लिए भी लोग इंतजार कर रहे हैं।
लोहेपार गांव में स्वच्छता मिशन का आंशिक प्रभाव भी नहीं दिखता है। सड़कों के किनारे गंदगी का अंबार है। ज्यादा लोग खुले में ही शौच जाते हैं। गांव की सुनीता का कहना है कि उन्हें विधवा पेंशन नहीं मिल पा रहा है, न ही कार्यालय से कोई प्रमाणपत्र ही निर्गत किया जा रहा है। लल्लन का कहना है कि ग्रामसभा के समय यहां सुलभ शौचालय का निर्माण हुआ था लेकिन रख-रखाव के अभाव में दो साल से बंद पड़ा है। गांव लोग विवश हो कर खुले में शौचा जाते हैं। धीरेंद्र विश्वकर्मा का कहना है कि गांव की समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या युवाओं के रोजगार का है। मनरेगा खत्म होने से उनको जीविकोपार्जन के लिए घर छोड़ कर बाहर जाने को विवश होना पड़ रहा है। कृष्णावती का कहना है कि गांव के लोग आवास के लिए जिम्मेदारों से गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इस संदर्भ में प्रशासक मोहम्मद जसीम ने बताया कि गांव में सुविधाओं के लिए विकास कार्य शुरू हो गया है। सफाई में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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सिसवां बाजार ( महराजगंज)। नगर पालिका परिषद में दो वर्ष पूर्व शामिल लोहेपार गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यहां समुचित विकास कार्य न होने से लोग निराश हैं। सामुदायिक शौचालय के अभाव में गांव के लोगों को खुले में शौच जाना पड़ता है। वहीं सड़क, नाली, पथ प्रकाश, पेयजल की समस्या बरकरार है। वृद्धा, विधवा पेंशन सहित अन्य प्रमाणपत्र बनवाना मुश्किल हो गया है। आवास के लिए भी लोग इंतजार कर रहे हैं।
लोहेपार गांव में स्वच्छता मिशन का आंशिक प्रभाव भी नहीं दिखता है। सड़कों के किनारे गंदगी का अंबार है। ज्यादा लोग खुले में ही शौच जाते हैं। गांव की सुनीता का कहना है कि उन्हें विधवा पेंशन नहीं मिल पा रहा है, न ही कार्यालय से कोई प्रमाणपत्र ही निर्गत किया जा रहा है। लल्लन का कहना है कि ग्रामसभा के समय यहां सुलभ शौचालय का निर्माण हुआ था लेकिन रख-रखाव के अभाव में दो साल से बंद पड़ा है। गांव लोग विवश हो कर खुले में शौचा जाते हैं। धीरेंद्र विश्वकर्मा का कहना है कि गांव की समस्याओं में सबसे बड़ी समस्या युवाओं के रोजगार का है। मनरेगा खत्म होने से उनको जीविकोपार्जन के लिए घर छोड़ कर बाहर जाने को विवश होना पड़ रहा है। कृष्णावती का कहना है कि गांव के लोग आवास के लिए जिम्मेदारों से गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इस संदर्भ में प्रशासक मोहम्मद जसीम ने बताया कि गांव में सुविधाओं के लिए विकास कार्य शुरू हो गया है। सफाई में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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