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संस्थागत प्रसव में लापरवाही, 50 आशा कार्यकर्ताओं को नोटिस
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संस्थागत प्रसव में लापरवाही, 50 आशा कार्यकर्ताओं से मांगा जवाब
एक सप्ताह में सभी को देना है जवाब, नहीं तो होगी कार्रवाई
अप्रैल से नवंबर का लक्ष्य 7593 निर्धारित था, लेकिन 1945 संस्थागत प्रसव हुआ
10 से कम संस्थागत प्रसव कराने पर बरती गई सख्ती, दायित्वाें के प्रति सचेत रहने का निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सदर सीएचसी क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं की लापरवाही सामने आई है। ऐसे में विभाग की ओर से सख्त रुख अख्तियार किया गया है। संस्थागत प्रसव कराने में उदासीनता बरतने पर 50 आशा कार्यकर्ताओं को नोटिस दिया गया है। अप्रैल से नवंबर माह तक के कार्यों की समीक्षा में यह लापरवाही सामने आई है। ऐसे में विभाग की ओर से कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। वहीं नोटिस का जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है, संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के उद्देश्य से शासन की जननी सुरक्षा योजना संचालित है। इसके तहत अधिक से अधिक संस्थागत प्रसव कराने पर जोर दिया जा रहा है। विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जाता है। योजना को प्रोत्साहन देने के लिए संस्थागत प्रसव कराने वाली महिलाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में 1400 तथा शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये दिए जाते हैं। एएनएम और आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं की देखभाल करती हैं, साथ ही उन्हें संस्थागत प्रसव को प्रेरित करती हैं। शहरी क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी एएनएम निभाती हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर गोष्ठी आदि करके महिलाओं को जागरूक किया जाता है। अप्रैल से नवंबर माह का लक्ष्य 7593 निर्धारित था, लेकिन 1945 संस्थागत प्रसव हुआ। समीक्षा में इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को हुई। सदर ब्लॉक में 185 आशा कार्यकर्ताओं में 50 ऐसी आशा कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने संस्थागत प्रसव कराने में रुचि नहीं दिखाई। वहीं लापरवाही पर बागापार की दो एएनएम को चेतावनी दी गई है। सदर क्षेत्र में 24 उपकेंद्रों में 11 उपकेंद्रों पर संस्थागत प्रसव की व्यवस्था है।
आशाओं की होती है महत्वपूर्ण भूमिका
संस्थागत प्रसव के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं न कहीं आशाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। आशाएं महिलाओं को संस्थागत प्रसव को प्रेरित करती हैं, इसके लिए उन्हें प्रति केस 600 रुपये मिलते हैं। इसके अलावा देखभाल तथा यात्रा भत्ता जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।
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दायित्व के प्रति लापरवाही पर 50 आशा कार्यकर्ताओं को नोटिस दिया गया है। इसके बाद अगर दायित्वों के प्रति लापरवाही मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। इस संबंध में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. केपी सिंह, अधीक्षक, सदर सीएचसी
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एक सप्ताह में सभी को देना है जवाब, नहीं तो होगी कार्रवाई
अप्रैल से नवंबर का लक्ष्य 7593 निर्धारित था, लेकिन 1945 संस्थागत प्रसव हुआ
10 से कम संस्थागत प्रसव कराने पर बरती गई सख्ती, दायित्वाें के प्रति सचेत रहने का निर्देश
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। सदर सीएचसी क्षेत्र में आशा कार्यकर्ताओं की लापरवाही सामने आई है। ऐसे में विभाग की ओर से सख्त रुख अख्तियार किया गया है। संस्थागत प्रसव कराने में उदासीनता बरतने पर 50 आशा कार्यकर्ताओं को नोटिस दिया गया है। अप्रैल से नवंबर माह तक के कार्यों की समीक्षा में यह लापरवाही सामने आई है। ऐसे में विभाग की ओर से कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। वहीं नोटिस का जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया है, संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभाग की ओर से कार्रवाई की जाएगी।
मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के उद्देश्य से शासन की जननी सुरक्षा योजना संचालित है। इसके तहत अधिक से अधिक संस्थागत प्रसव कराने पर जोर दिया जा रहा है। विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित किया जाता है। योजना को प्रोत्साहन देने के लिए संस्थागत प्रसव कराने वाली महिलाओं को ग्रामीण क्षेत्रों में 1400 तथा शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये दिए जाते हैं। एएनएम और आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं की देखभाल करती हैं, साथ ही उन्हें संस्थागत प्रसव को प्रेरित करती हैं। शहरी क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी एएनएम निभाती हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर गोष्ठी आदि करके महिलाओं को जागरूक किया जाता है। अप्रैल से नवंबर माह का लक्ष्य 7593 निर्धारित था, लेकिन 1945 संस्थागत प्रसव हुआ। समीक्षा में इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को हुई। सदर ब्लॉक में 185 आशा कार्यकर्ताओं में 50 ऐसी आशा कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने संस्थागत प्रसव कराने में रुचि नहीं दिखाई। वहीं लापरवाही पर बागापार की दो एएनएम को चेतावनी दी गई है। सदर क्षेत्र में 24 उपकेंद्रों में 11 उपकेंद्रों पर संस्थागत प्रसव की व्यवस्था है।
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आशाओं की होती है महत्वपूर्ण भूमिका
संस्थागत प्रसव के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं न कहीं आशाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। आशाएं महिलाओं को संस्थागत प्रसव को प्रेरित करती हैं, इसके लिए उन्हें प्रति केस 600 रुपये मिलते हैं। इसके अलावा देखभाल तथा यात्रा भत्ता जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।
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दायित्व के प्रति लापरवाही पर 50 आशा कार्यकर्ताओं को नोटिस दिया गया है। इसके बाद अगर दायित्वों के प्रति लापरवाही मिली तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए हर संभव कोशिश की जा रही है। इस संबंध में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. केपी सिंह, अधीक्षक, सदर सीएचसी