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Maharajganj News: कब्रिस्तान पर जुटे अकीदतमंद पूर्वजों को यादकर पढ़ी नमाज
Mon, 26 Feb 2024 09:15 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Mon, 26 Feb 2024 09:15 PM IST
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निचलौल। रहमतों की रात यानी शब-ए-बरात रविवार को मनाई गई। मान्यता है कि इस दिन अल्लाह की रहमत के दरवाजे खुल जाते हैं। इसी के चलते अल्लाह की खुशी और अपने गुनाहों की तौबा करने के लिए अकीदतमंद पूरी रात इबादत में लगे रहे।
मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पुरखों की कब्रों पर जाकर दुआ की और अपने गुनाहों की माफी मांगी। मस्जिद व कब्रिस्तान को रोशन रखा। शहर के दामोदारी पोखरा स्थित कब्रिस्तान, खोन्हौली, मिश्रवलीया, शीतलापुर, बहुआर समेत क्षेत्र भर के कब्रिस्तान पर जाकर लोगों ने अपने पूर्वजों एवं परिजनों की कब्रों पर फातेहा पढ़ी।
कब्रों पर फूल, इत्र चढ़ाकर अगरबत्ती और मोमबत्तियां जलाईं। इसके बाद सभी लोग विभिन्न मस्जिदों में पहुंचे। जहां रात भर कुरान पाक की तिलावत करने सहित विशेष नमाजें भी पढ़ीं। रात भर खुदा की इबादत की गई। मौलाना अख्तर हुसैन मिस्बाही ने बताया कि शब-ए-बरात अल्लाह का दुनिया वालों पर एक इनाम है। ये कोई त्योहार नहीं है। रमजान की तरह शब-ए-बरात पर भी रोजा रहा जाता है। यह रोजे बिल्कुल रमजान की तरह ही होते हैं। इनमें सहरी भी होती है और मगरिब की नमाज के बाद इफ्तार भी होता है। इसका बहुत महत्व है। संवाद
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मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पुरखों की कब्रों पर जाकर दुआ की और अपने गुनाहों की माफी मांगी। मस्जिद व कब्रिस्तान को रोशन रखा। शहर के दामोदारी पोखरा स्थित कब्रिस्तान, खोन्हौली, मिश्रवलीया, शीतलापुर, बहुआर समेत क्षेत्र भर के कब्रिस्तान पर जाकर लोगों ने अपने पूर्वजों एवं परिजनों की कब्रों पर फातेहा पढ़ी।
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कब्रों पर फूल, इत्र चढ़ाकर अगरबत्ती और मोमबत्तियां जलाईं। इसके बाद सभी लोग विभिन्न मस्जिदों में पहुंचे। जहां रात भर कुरान पाक की तिलावत करने सहित विशेष नमाजें भी पढ़ीं। रात भर खुदा की इबादत की गई। मौलाना अख्तर हुसैन मिस्बाही ने बताया कि शब-ए-बरात अल्लाह का दुनिया वालों पर एक इनाम है। ये कोई त्योहार नहीं है। रमजान की तरह शब-ए-बरात पर भी रोजा रहा जाता है। यह रोजे बिल्कुल रमजान की तरह ही होते हैं। इनमें सहरी भी होती है और मगरिब की नमाज के बाद इफ्तार भी होता है। इसका बहुत महत्व है। संवाद
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