फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Maharajganj News ›   Mother's Day: The one who became homeless, may her house be safe.

मातृत्व दिवस : जिसने किया बेघर, सलामत रहे उसका घर

Sun, 12 May 2024 04:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Sun, 12 May 2024 04:08 AM IST
विज्ञापन
Mother's Day: The one who became homeless, may her house be safe.
फरेंदा। कहा जाता है कि पूत कपूत हो सकता है पर माता कुमाता नहीं हो सकती। जिस मां ने पाल पोसकर अपने बच्चों को बड़ा किया उन बच्चों ने ही उन्हें तिल-तिल मरने के लिए छोड़ दिया। आज वह वृद्धाश्रम में गुजर बसर कर रही हैं, लेकिन इसके बाद भी वह अपने कलेजे के टुकड़े के लिए सलामती की दुआ करती रहती हैं। मदर्स डे पर उनकी दिल की बात जानी तो कहा कि जिन बेटों ने बेघर किया उनके घर सलामत रहें। वह हमेशा खुश रहें।
विज्ञापन

बृजमनगंज क्षेत्र के शोभावती देवी (62) के तीन बेटे हैं। वह पति के साथ विगत चार माह से क्षेत्र के वृद्धाश्रम में हैं। घर पर सही सलामत देखभाल न होने के कारण वृद्धाश्रम में जिंदगी काट रही हैं। बताया कि तीन बेटों के बीच में आपसी कलह बना रहता हैं, घर में सुख शांति नही हैं। समय से खाना पानी न मिलने के कारण मजबूरी में वृद्धाश्रम में रह रही हूं। भले ही हम परेशानी में हैं लेकिन वह परिवार के साथ खुशी पूर्वक रहे यहीं दुआ रहती हैं।
विज्ञापन

-करमहां निवासी बिंदा देवी (65) विगत पांच वर्ष से वृद्धाश्रम में रहकर जीवन काट रही हैं। उनका एक बेटा और दो पोता, दो पोती हैं। फिर भी घर में रहने के लिए जगह नही हैं। दो जून का भोजन सही ढंग से नहीं मिल पाता है। जब घर में कोई सम्मान नहीं रह गया तो मजबूरी में आश्रम में पहुंची। जहां पर समय से पेट तो भर जाता है। औलाद से सुख की उम्मीद भी अब नहीं रही।
विज्ञापन
विज्ञापन

महावनखोर कैंपियरगंज निवासी शारदा देवी (73) हैं। जिनके चार बेटे हैं। जिनको पालने के लिए मां ने कमर तोड़ मेहनत किया लेकिन वहीं संतान आज ठुकरा दिए। वह तीन वर्षों से वृद्धाश्रम में रह रही हैं। बताया कि घर की आर्थिक स्थित ठीक न होने के कारण आपस में तनाव बना रहता था। पारिवारिक कलह हो रहा था। जिससे आजीज आकर वृद्धाश्रम में रह रही हैं। लेकिन हमेसा बच्चों के सलामती के लिए दुआएं करती हैं। तीज त्योहार मनाने के लिए घर पर जाती हूं, जहां एक दो दिन रहकर फिर आश्रम में आ जाती हूं। जहां समय से भोजन सहित अन्य सुविधाएं समय-समय पर मिलती रहती हैं।
गोरखपुर की माधुरी श्रीवास्तव (70) वर्ष जो विगत दो वर्षों से पति के साथ वृद्धाश्रम में रहती थीं। एक वर्ष पूर्व पति की मृत्यु हो गई। एक बेटा व तीन बेटियां हैं। घर पर देखभाल न होने से परेशान होकर आश्रम में पहुंची जहां पर बची जिंदगी कट रही हैं। पति की मौत के बाद बेटा देखभाल के लिए नहीं आया। फिर भी उनकी सलामती के लिए दुआ दे रही हूं कि वह परिवार के साथ सुखी रहे।

------------------------
वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की उचित देखभाल करना पहला दायित्व है। उनके रहने से लेकर खान-पान के साथ स्वास्थ्य संबंधी देखभाल भी की जाती है। बुजुर्गों की सेवा ईश्वर सेवा के समान हैं, जिसका निर्वहन कर रहा हूं। शासन से मिलने वाली सभी सुविधाएं दी जाती हैं।
-प्रदीप कटियार, प्रबंधक, आधारशिला वृद्धाश्रम, फरेंदा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed