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Maharajganj News: माइक्रो फाइनेंस का कर्ज...ब्याज का बोझ बढ़ा रहा दर्द
Sun, 06 Apr 2025 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
Updated Sun, 06 Apr 2025 12:11 AM IST
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महराजगंज। सदर ब्लॉक के मुड़िला गांव की महिलाएं माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कर्ज के जाल में फंस गई हैं। ब्याज के बोझ से उनकी पीड़ा बढ़ती जा रही है। एजेंट रोजाना घर पर आते हैं। किस्त जमा करने के लिए दबाव बनाते हैं। बढ़ते ब्याज के कारण जमीन और गहने बेचने को महिलाएं मजबूर हो गई हैं।
मुड़िला गांव की पुष्पा देवी ने बताया कि लॉकडाउन से पहले उन्होंने चाट-पकौड़ी की दुकान चलाने के लिए माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 13 किस्तों में 5 लाख रुपये का कर्ज लिया था। लॉकडाउन के कारण व्यवसाय ठप हो गया और ऋण का 25 प्रतिशत ब्याज बढ़ने से यह राशि लगभग नौ लाख रुपये हो गई। अब तक 10 किस्तों का भुगतान हो चुका है, लेकिन तीन लाख रुपये अभी भी बाकी है। छह माह पूर्व माइक्रो फाइनेंस एजेंट ने घर आकर गाली-गलौज की। जेवर बेचकर 75 हजार रुपये जमा किए। इन दिनों भी एजेंट घर पर आते हैं।
इसी गांव की निशा देवी ने बताया कि सब्जी की दुकान के लिए उन्होंने तीन किश्तों में 90 हजार रुपये कर्म लिया था। ब्याज दर अधिक होने के कारण यह रकम बढ़कर दो लाख रुपये हो गई। चार महीने पहले माइक्रो फाइनेंस एजेंट उनके घर पहुंचा और बकाया किस्त चुकाने का दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर घर में रखा गेहूं, चावल व अन्य सामान जबरन पिकअप पर लदवाकर ले गया। फिर दो दिन पहले आकर दुबारा गाली-गलौज करने लगा। मजबूरी में उन्होंने अपनी छह डिस्मिल जमीन बेचकर 50 हजार रुपये कर्ज जमा किया, लेकिन फिर भी कर्ज बाकी है। वहीं गरिमा देवी के पति पूर्णमासी चाट-पकौड़ी की दुकान चलाते हैं। उन्होंने बताया कि 3.5 लाख रुपये का कर्ज लिया था जो ब्याज बढ़ने के कारण पांच लाख रुपये हो गया। दो महीने पहले एजेंट घर आया और दुर्व्यवहार करने लगा। मजबूरी में 85 हजार रुपये के गहने बेचकर भुगतान किया। फिर भी कर्ज से छुटकारा नहीं मिला। अब तक 60 डिस्मिल में से 58 डिसमिल जमीन बिक चुकी है, फिर भी ऋण बाकी है। वह झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं।
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गांव की गायत्री देवी ने बताया कि सब्जी की दुकान के लिए पांच लाख रुपये का कर्ज लिया। पति परदेस में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। लेकिन बढ़ते ब्याज के कारण ऋण की राशि सात लाख रुपये तक पहुंच गई। मजबूरी में 16 डिस्मिल खेत बेच दिया, फिर भी कर्ज पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के बढ़ते ब्याज और कर्ज वसूली की कठोर प्रक्रिया से परेशानी बढ़ रही है।
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नियम के अनुसार ही किस्त की वसूली की जा सकती है। माइक्रो फाइनेंस कंपनी से ऋण लेने वाली महिलाओं की ओर से शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। किसी का उत्पीड़न न हो, इसे ध्यान में रखते हुए ब्लॉक स्तर पर पर्यवेक्षण की व्यवस्था है।
भूपेंद्र नाथ मिश्रा, लीड बैंक मैनेजर
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मुड़िला गांव की पुष्पा देवी ने बताया कि लॉकडाउन से पहले उन्होंने चाट-पकौड़ी की दुकान चलाने के लिए माइक्रो फाइनेंस कंपनी से 13 किस्तों में 5 लाख रुपये का कर्ज लिया था। लॉकडाउन के कारण व्यवसाय ठप हो गया और ऋण का 25 प्रतिशत ब्याज बढ़ने से यह राशि लगभग नौ लाख रुपये हो गई। अब तक 10 किस्तों का भुगतान हो चुका है, लेकिन तीन लाख रुपये अभी भी बाकी है। छह माह पूर्व माइक्रो फाइनेंस एजेंट ने घर आकर गाली-गलौज की। जेवर बेचकर 75 हजार रुपये जमा किए। इन दिनों भी एजेंट घर पर आते हैं।
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इसी गांव की निशा देवी ने बताया कि सब्जी की दुकान के लिए उन्होंने तीन किश्तों में 90 हजार रुपये कर्म लिया था। ब्याज दर अधिक होने के कारण यह रकम बढ़कर दो लाख रुपये हो गई। चार महीने पहले माइक्रो फाइनेंस एजेंट उनके घर पहुंचा और बकाया किस्त चुकाने का दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर घर में रखा गेहूं, चावल व अन्य सामान जबरन पिकअप पर लदवाकर ले गया। फिर दो दिन पहले आकर दुबारा गाली-गलौज करने लगा। मजबूरी में उन्होंने अपनी छह डिस्मिल जमीन बेचकर 50 हजार रुपये कर्ज जमा किया, लेकिन फिर भी कर्ज बाकी है। वहीं गरिमा देवी के पति पूर्णमासी चाट-पकौड़ी की दुकान चलाते हैं। उन्होंने बताया कि 3.5 लाख रुपये का कर्ज लिया था जो ब्याज बढ़ने के कारण पांच लाख रुपये हो गया। दो महीने पहले एजेंट घर आया और दुर्व्यवहार करने लगा। मजबूरी में 85 हजार रुपये के गहने बेचकर भुगतान किया। फिर भी कर्ज से छुटकारा नहीं मिला। अब तक 60 डिस्मिल में से 58 डिसमिल जमीन बिक चुकी है, फिर भी ऋण बाकी है। वह झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं।
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गांव की गायत्री देवी ने बताया कि सब्जी की दुकान के लिए पांच लाख रुपये का कर्ज लिया। पति परदेस में मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। लेकिन बढ़ते ब्याज के कारण ऋण की राशि सात लाख रुपये तक पहुंच गई। मजबूरी में 16 डिस्मिल खेत बेच दिया, फिर भी कर्ज पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के बढ़ते ब्याज और कर्ज वसूली की कठोर प्रक्रिया से परेशानी बढ़ रही है।
नियम के अनुसार ही किस्त की वसूली की जा सकती है। माइक्रो फाइनेंस कंपनी से ऋण लेने वाली महिलाओं की ओर से शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। किसी का उत्पीड़न न हो, इसे ध्यान में रखते हुए ब्लॉक स्तर पर पर्यवेक्षण की व्यवस्था है।
भूपेंद्र नाथ मिश्रा, लीड बैंक मैनेजर