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Maharajganj News: रजिस्ट्री से हटेगी उर्दू-फारसी...हिंदी में होंगे दस्तावेज

Tue, 05 Aug 2025 01:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज Updated Tue, 05 Aug 2025 01:06 AM IST
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Mahrajganj News: Urdu-Farsi will be removed from the registry...documents will be in Hindi
महराजगंज। स्टांप पर लिखे कठिन उर्दू-फारसी भाषा के शब्दों का प्रयोग आने वाले दिनों में बंद हो जाएगा। दस्तावेजों को हिंदी में लिखा जाएगा। इससे जहां दस्तावेजों को समझने में आसानी होगी, वहीं लोगों को ट्रांसलेटर तलाशने या गूगल पर माथापच्ची की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।
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जिले स्तर पर इसे लेकर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए जरूरी तैयारी की जा रही है। उच्चाधिकारियों की बैठक में भी इस दिशा में महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हो चुकी है।
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जानकारी के अनुसार, स्टांप एवं पंजीकरण वर्ष 1908 में बने रजिस्ट्रेशन एक्ट के अधीन चलता है। अंग्रेजों के समय बना यह कानून आज भी चल रहा है। पुराने समय में हिंदी के साथ उर्दू-फारसी भाषा भी बोलचाल का हिस्सा थी। अंग्रेजों ने अपने शासन काल में उर्दू-फारसी को सरकारी दस्तावेजों में बढ़ावा दिया था। तब से रजिस्ट्री की भाषा में उर्दू-फारसी शब्दों का इस्तेमाल बढ़ता गया।
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वर्तमान में स्थिति ये है कि लोक सेवा आयोग से चुनकर आने के बाद सब रजिस्ट्रार को उर्दू इमला की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। इसमें उर्दू के शब्दों को सही अनुवाद और सही व्याकरण के साथ लिखना व समझाना होता है। सब रजिस्ट्रार का प्रोबेशन काल दो वर्ष का है। उर्दू इमला की परीक्षा पास किए बिना नौकरी स्थायी नहीं होती है।
उर्दू की इतनी अहमियत की वजह से ही सब रजिस्ट्रार स्तर से रजिस्ट्री व स्टांप के दस्तावेजों में उर्दू-फारसी शब्दों के इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जाती है। जटिल शब्द होने के कारण रजिस्ट्री की भाषा आम लोगों के समझ के बाहर होती है।
दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता सुधांशु पांडेय ने बताया कि वर्तमान दौर में इस परीक्षा का कोई औचित्य नहीं रह गया है। अब उर्दू इमला परीक्षा की जगह सामान्य कंप्यूटर ज्ञान की परीक्षा होगी।
केवल इसे ही पास करना होगा। इसका असर रजिस्ट्री में भी दिखेगा और सामान्य कामकाज की भाषा में हिंदी का अधिकाधिक इस्तेमाल होगा। इसके बाद रजिस्ट्रेशन एक्ट-1908 में भी आमूलचूल परिवर्तन की प्रक्रिया जारी है।

सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि दस्तावेजों की भाषा सरल होना चाहिए, जिसे आम आदमी भी आसानी से समझ सके। गांधी नगर के आत्माराम गुप्त ने बताया कि शासन के इस प्रयास से न केवल दस्तावेजी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी, बल्कि आमजन का भरोसा भी बढ़ेगा। साथ ही धोखाधड़ी पर भी रोक लगेगी।
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